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भारतीय समाज में 'मांगलिक दोष' का नाम सुनते ही लोग अक्सर घबरा जाते हैं, लेकिन ज्योतिषीय दृष्टिकोण से यह उतना डरावना नहीं है जितना इसे बना दिया गया है। असल में, मांगलिक होना कोई “श्राप” नहीं, बल्कि एक विशेष ऊर्जा की स्थिति है। आइए, इसके पीछे के विज्ञान और सत्य को समझते हैं।

 

1. क्या है मांगलिक दोष?

ज्योतिष में जब मंगल कुंडली के 1, 4, 7, 8 या 12वें भाव में बैठा होता है, तो उसे 'मंगली' कहा जाता है। मंगल ऊर्जा, साहस और गर्मी का ग्रह है। इन भावों में बैठकर मंगल वैवाहिक जीवन की शांति, स्वभाव की उग्रता और स्वास्थ्य पर प्रभाव डालता है।


 

2. यह डरावना क्यों लगता है? (भ्रांतियां)

भ्रांति: मांगलिक की शादी गैर-मांगलिक से होने पर जीवनसाथी की मृत्यु हो जाती है।


सत्य: यह एक बहुत बड़ी अतिशयोक्ति है। कुंडली में लंबी उम्र के लिए 'आयु भाव' देखा जाता है, न कि सिर्फ मंगल। मंगल केवल आपसी तालमेल और स्वभाव में टकराव (Ego Clashes) पैदा कर सकता है।


 

3. मंगल दोष का 'सकारात्मक' पक्ष

मांगलिक व्यक्ति स्वभाव से बहुत उत्साही, अनुशासित और कार्य के प्रति समर्पित होते हैं। यदि इस ऊर्जा को सही दिशा दी जाए, तो ऐसे जातक अपने करियर में बहुत सफल होते हैं।


 

4. दोष का प्रभाव कम करने वाले ज्योतिषीय नियम

ज्योतिष शास्त्र में ऐसे कई नियम हैं जिनसे मांगलिक दोष स्वतः समाप्त हो जाता है:


<strong>ग्रहों की युति: </strong>यदि मंगल पर गुरु की दृष्टि हो या मंगल अपनी स्वराशि (मेष/वृश्चिक) या उच्च राशि (मकर) में हो, तो दोष का प्रभाव नगण्य हो जाता है। चंद्रमा के साथ मंगल होने से भी यह दोष समाप्त हो जाता है।


<strong>उम्र का प्रभाव: </strong>माना जाता है कि 28 वर्ष की आयु के बाद मंगल की उग्रता शांत हो जाती है, जिससे दोष का असर कम हो जाता है।


 


<strong>परिहार: </strong>यदि दूसरे साथी की कुंडली में उन्हीं भावों में शनि, राहु या केतु बैठे हों, तो वे मंगल की ऊर्जा को संतुलित कर देते हैं (इसे &#039;काट&#039; होना कहते हैं)। अधिकांश मामलों (लगभग 80%) में मंगल दोष कुंडली में ही स्वतः समाप्त हो जाता है। यदि मंगल के साथ चन्द्र, गुरु या शनि हो, या शनि/गुरु की दृष्टि पड़े, तो दोष नहीं रहता। कुछ विशेष राशियों व भावों में मंगल होने पर भी दोष समाप्त हो जाता है। गुरु या चन्द्र की शुभ स्थिति, राहु का 6-11वें भाव में होना, या मंगल का कमजोर (नीच, वक्री, अस्त) होना भी दोष को खत्म कर देता है। अन्य पाप ग्रहों की उपस्थिति या मंगल की गुरु/चन्द्र से युति भी इसे निरस्त करती है।


 

5. क्या करना चाहिए? (सुझाव)

<strong>गुण मिलान: </strong>केवल मंगल ही नहीं, बल्कि &#039;भकूट&#039; और &#039;गण&#039; मिलान पर भी ध्यान दें।


<strong>मानसिक सामंजस्य: </strong>मंगल दोष वाले व्यक्ति को एक ऐसे साथी की जरूरत होती है जो उनकी ऊर्जा को समझ सके। बातचीत और धैर्य इसका सबसे बड़ा उपाय है।


कुंभ विवाह: यदि दोष बहुत भारी हो, तो शास्त्र सम्मत &#039;कुंभ विवाह&#039; या &#039;विष्णु प्रतिमा विवाह&#039; का सुझाव दिया जाता है।


 


<strong>निष्कर्ष:</strong> मांगलिक दोष वैवाहिक जीवन में "तलाक" या "विनाश" का गारंटी कार्ड नहीं है। यह सिर्फ दो लोगों के बीच ऊर्जा के असंतुलन का संकेत है। सही समझ और थोड़े से धैर्य के साथ मांगलिक जातक एक अत्यंत सुखी वैवाहिक जीवन व्यतीत कर सकते हैं।

 

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