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Mirzapur News: आम के पेड़ों में अब बौर आने लगे हैं, लेकिन अब इनमें फंगस रहने का खतरा होता है. इसके लिए किसान नीला थोथा का प्रयोग फंगीसाइड के लिए करते हैं. आइए आपको इसे लगाने की विधि और इसके फायदे के बारे में बताते हैं.
मिर्जापुर: आम में बौर आने शुरू हो गए हैं. बौर आने के साथ ही कई तरीके के फंगल्स पैदावार को प्रभावित करते हैं. ऐसे में आपको महंगे रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग करना पड़ता है. आम को फंगस से बचाने के लिए जैविक एक्सपर्ट योगेंद्र सिंह ने घरेलू टिप्स बताए हैं. योगेंद्र सिंह ने कहा कि आम को फंगस से बचने के लिए नीला थोथा और चुना की मदद से पेस्ट तैयार करके पौधे पर लगा दें. इससे फंगस का प्रकोप कम होता है. आम की पैदावार भी बढ़ती है और किसानों के जेब पर खर्च भी कम आता है.
जैविक खेती एक्सपर्ट योगेंद्र सिंह ने लोकल 18 से बताया कि नीले रंग के दिख रहे पदार्थ को नीला थोथा (तूतिया) कहते हैं. इसका प्रयोग फंगीसाइड के लिए करते हैं. आम के बौर आ रहे हैं. हालांकि, उत्पादन प्रभावित हो रहा है. कारण कीटनाशकों की ओर से फली को नष्ट कर देना है. मिट्टी से होकर तने के माध्यम से फंगस ऊपर जाते हैं. इससे बचाव के लिए हम नीला थोथा का प्रयोग करते हैं. 100 ग्राम नीला थोथा और 100 ग्राम बुझा हुआ चुना लेकर पेस्ट बना लें. पेस्ट बनाने के बाद बारिश खत्म हो तो इसे वृक्ष पर लगा लें. बारिश से पहले लगाने पर यह धुल जाता है.
ज्यादा से ज्यादा होगा उत्पादन
योगेंद्र सिंह ने बताया कि पेस्ट लगने के बाद जो भी फंगस है, वह मिट्टी से ऊपर नहीं जा पाते हैं. फल सुरक्षित रहता है और ज्यादा से ज्यादा उत्पादन आता है. नीला थोथा बेहद कारगर और देशी नुस्खा है. पौधे के तनों के हिसाब से इस पेस्ट को लगा सकते हैं. इसकी पतली लेप लगानी चाहिए. नीला थोथा और बुझा चुना का पेस्ट ऐसा लगाएं कि वृक्ष का तना नजर नहीं आना चाहिए.
योगेंद्र सिंह ने बताया कि इस बात का पूरा ध्यान रखें कि जितना बुझा हुआ चुना ले रहे हैं, उतना ही नीला थोथा का इस्तेमाल करें. नीला थोथा अम्लीय है. उसकी अम्लीयता को कम करने के लिए बुझा हुआ चुना का इस्तेमाल करते हैं. दोनों से पेस्ट बनाते हैं. आम के वृक्ष को फंगस से बचाने का यह बेस्ट तरीका है. फंगस से बचने के लिए महंगे कीटनाशकों का प्रयोग नहीं करना पड़ेगा. देशी और कारगर विधि से फंगस से बचाव कर सकते हैं.
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आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.
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