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होमखेलक्रिकेट‘गोरे-काले’ के फेर में फंसा टीम इंडिया का दिग्गज, कौन हैं लक्ष्मण शिवरामकृष्णन

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Who is Laxman Sivaramakrishnan alleging racism: भारतीय क्रिकेट के दिग्गज लेग नर और 1985 वर्ल्ड चैंपियनशिप के नायक लक्ष्मण शिवरामकृष्णन ने 23 साल बाद बीसीसीआई कमेंट्री पैनल से इस्तीफा देकर सनसनी मचा दी है.उन्होंने सोशल मीडिया पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि दो दशकों के लंबे करियर के बावजूद उन्हें ‘रंगभेद’ और ‘भेदभाव’ का सामना करना पड़ा. रामकृष्णन के मुताबिक उनके रंग की वजह से उन्हें टॉस और प्रेजेंटेशन जैसे मुख्य भूमिकाओं से दूर रखा गया. जिसने अब भारतीय क्रिकेट जगत में एक बड़ी बहस छेड़ दी है.

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कौन हैं लक्ष्मण शिवरामकृष्णन जिन्होंने रंग की वजह से भेदभाव का आरोप लगाया.

नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट इतिहास में कुछ खिलाड़ी ऐसे होते हैं जो आसमान में बिजली की तरह चमकते हैं और अपनी छाप छोड़ जाते हैं. लक्ष्मण शिवरामकृष्णन भी एक ऐसा ही नाम हैं. 80 के दशक की शुरुआत में अपनी जादुई लेग-स्पिन से दुनिया को दीवाना बनाने वाला यह खिलाड़ी आज एक बेहद गंभीर और कड़वे आरोप के कारण चर्चा में है.शिवरामकृष्णन का उदय किसी परीकथा जैसा था. एक युवा खिलाड़ी के रूप में घरेलू क्रिकेट में महज 2 रन देकर 7 विकेट चटकाकर उन्होंने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा. 1983 में वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट डेब्यू करने वाले ‘शिवा’ (जैसा कि उन्हें प्यार से बुलाया जाता है) ने जल्द ही खुद को स्थापित कर लिया.

लक्ष्मण शिवरामकृष्णन (Laxman Sivaramakrishnan) के करियर का सबसे यादगार साल 1984 रहा. जब उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ एक ही टेस्ट मैच में 12 विकेट लेकर अंग्रेजों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिए. इतना ही नहीं, 1985 में ऑस्ट्रेलिया में आयोजित वर्ल्ड चैंपियनशिप ऑफ क्रिकेट में भारत की ऐतिहासिक जीत के वह महानायक थे. उस टूर्नामेंट में वह सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज रहे और भारत को विश्व विजेता बनाने में अहम भूमिका निभाई. उन्होंने 1983 और 1987 के बीच 9 टेस्ट और 16 वनडे मैच खेले, जिसमें उन्होंने टेस्ट में तीन बार पांच विकेट लेकर 26 विकेट लिए और वनडे में 15 विकेट लिए.

कौन हैं लक्ष्मण शिवरामकृष्णन जिन्होंने रंग की वजह से भेदभाव का आरोप लगाया.

कमेंट्री बॉक्स की बुलंद आवाज
1987 में क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद, शिवरामकृष्णन ने कमेंट्री की दुनिया में कदम रखा. पिछले 23 वर्षों से वह बीसीसीआई (BCCI) के मुख्य कमेंट्री पैनल का हिस्सा रहे. स्पिन गेंदबाजी की उनकी तकनीकी समझ और बारीकियों को समझाने का अंदाज उन्हें अन्य कमेंटेटरों से अलग बनाता था. वह दो दशकों से अधिक समय तक भारतीय क्रिकेट की एक प्रमुख आवाज बने रहे.

‘रंगभेद’ और भेदभाव के आरोप
60 वर्षीय शिवरामकृष्णन ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (ट्विटर) पर अपनी रिटायरमेंट की घोषणा की, लेकिन यह विदाई सामान्य नहीं थी.उनके पोस्ट ने क्रिकेट जगत में खलबली मचा दी है. शिवरामकृष्णन ने आरोप लगाया कि 23 साल के लंबे अनुभव के बावजूद उनके साथ भेदभाव किया गया. उन्होंने लिखा कि उन्हें टॉस ड्यूटी और पोस्ट-मैच प्रेजेंटेशन जैसे मुख्य ऑन-एयर रोल से जानबूझकर दूर रखा गया. जब एक यूजर ने सोशल मीडिया पर सवाल किया कि क्या इसके पीछे उनकी त्वचा का रंग एक कारण हो सकता है, तो शिवरामकृष्णन ने सीधे तौर पर सहमति जताते हुए लिखा, ‘आप सही हैं. यह रंग के आधार पर किया गया भेदभाव (Colour Discrimination) है.’

एक कड़वा सच?
शिवरामकृष्णन का यह आरोप भारतीय क्रिकेट प्रशासन और ब्रॉडकास्टिंग की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े करता है. एक ऐसा दिग्गज जिसने देश को विश्व स्तर पर गौरवान्वित किया, उसे अपने करियर के आखिरी पड़ाव पर ‘नस्लवाद’ और ‘अवसरों की कमी’ की शिकायत करनी पड़ी. उनके ये वायरल पोस्ट अब सोशल मीडिया पर एक बड़ी बहस का रूप ले चुके हैं. शिवरामकृष्णन की यह कहानी हमें याद दिलाती है कि खेल के मैदान पर रिकॉर्ड बनाना जितना मुश्किल है, खेल के बाहर अपनी गरिमा को बचाए रखना कभी-कभी उससे भी कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो जाता है.

About the Author

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Kamlesh Raiचीफ सब एडिटर

करीब 15 साल से पत्रकारिता में सक्रिय. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई. खेलों में खासकर क्रिकेट, बैडमिंटन, बॉक्सिंग और कुश्ती में दिलचस्पी. IPL, कॉमनवेल्थ गेम्स और प्रो रेसलिंग लीग इवेंट्स कवर किए हैं. फरवरी 2022 से…और पढ़ें

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