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नागपुर9 मिनट पहले

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RSS प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को कहा कि दुनिया में संघर्षों की असली वजह स्वार्थी हित और वर्चस्व की चाहत है। स्थायी शांति केवल एकता, अनुशासन और धर्म को मानने से ही हासिल की जा सकती है।

भागवत नागपुर में विश्व हिंदू परिषद के कार्यालय की आधारशिला रखने के बाद एक सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा- पिछले 2,000 सालों से दुनिया ने संघर्षों को सुलझाने के लिए कई विचारों पर प्रयोग किए हैं, लेकिन उन्हें बहुत कम सफलता मिली है।

RSS चीफ ने यह भी कहा कि भारत मानवता के नियम का पालन करता है, जबकि दुनिया के दूसरे देश ‘योग्यतम की उत्तरजीविता’ (सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट) में विश्वास रखते हैं।

भारत का स्वभाव ही ऐसा है जो सद्भाव में विश्वास रखता है। यही कारण है कि पूरी दुनिया से यह आवाज उठ रही है कि भारत ही ईरान-इजराइल युद्ध को खत्म करने में मदद कर सकता है।

भागवत के बयान की बड़ी बातें…

  • धार्मिक असहिष्णुता, जबरन धर्म परिवर्तन और ऊंच-नीच की भावनाएं आज भी मौजूद हैं। भारत का प्राचीन ज्ञान हमें सिखाता है कि सभी आपस में जुड़े हुए हैं और एक हैं।
  • धर्म केवल शास्त्रों तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि लोगों के व्यवहार में भी झलकना चाहिए।
  • अनुशासन और नैतिक मूल्यों के पालन के लिए लगातार अभ्यास जरूरी है और इसमें अक्सर निजी परेशानियां भी आती हैं।

RSS को 86 संभागों में बांटने की बात कही, लेकिन तरीका नहीं बदलेगा

नागपुर में एक मराठी अखबार के 100 साल पूरे होने पर गुरुवार को भागवत ने बताया कि स्वयंसेवकों को मजबूत बनाने और काम बेहतर करने के लिए संगठन में बदलाव किए गए हैं। भागवत ने कहा कि RSS का काम बहुत तेजी से बढ़ रहा है और लोगों की उम्मीदें भी बढ़ रही हैं, इसलिए अब काम को अलग-अलग हिस्सों में बांटने विकेंद्रीकरण की शुरुआत की जा रही है।

उन्होंने कहा कि पहले RSS में 46 प्रांत थे, अब इन्हें बढ़ाकर छोटी-छोटी इकाईयों यानी 86 संभागों में बांटा जाएगा, ताकि स्थानीय स्तर पर काम आसानी और अच्छे तरीके से हो सके।

भागवत कहा कि संघ के काम करने का तरीका नहीं बदलेगा। दोस्ती बनाकर और अच्छे उदाहरण देकर समाज में बदलाव लाना ही संघ का मुख्य तरीका है, और यह आगे भी चलता रहेगा। पढ़ें पूरी खबर…

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