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होमफोटोकृषिअभी नहीं संभले तो पछताएंगे! अरहर की फसल के लिए बेहद जरूरी समय, जानिए टिप्स

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अरहर की फसल में फूल आते ही असली परीक्षा शुरू होती है. जरा सी लापरवाही से पैदावार घट सकती है, लेकिन सही समय पर सही उपाय अपनाकर किसान अपनी फसल को कीटों और बीमारियों से बचा सकते हैं. आइए जानते है खेती से जुड़ी कुछ जरूरी टिप्स…

arhar fasal

अगर अरहर के पौधे में फल नहीं आ रहे हैं या आने के बाद रोग और कीड़ों का प्रकोप हो रहा है, तो इसका सीधा असर पैदावार पर पड़ सकता है. ऐसे में नुकसान से बचने के लिए इस समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, इसे समझना बेहद जरूरी हो जाता है. इसी विषय पर आज हम कृषि वैज्ञानिक से जानेंगे.

arhar Flower

कृषि विज्ञान केंद्र सुलतानपुर में कार्यरत कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर सी.के. त्रिपाठी बताते हैं कि फरवरी के महीने में दलहनी फसलों, खासकर अरहर के पौधों में पुष्पन की अवस्था चल रही होती है. ऐसे में इस दौरान यह ध्यान रखना जरूरी है कि अरहर के फूल किसी रोग से प्रभावित न हों. यदि पौधों में किसी भी प्रकार के अप्रत्याशित लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत कृषि वैज्ञानिक से सलाह लेकर उचित उपचार करना चाहिए.

arhar farming

चूंकि मार्च का महीना अरहर के पौधों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इस समय बीज बनने से पहले पौधों में पुष्प निकलने लगते हैं. लेकिन सबसे बड़ी गलती किसान यह करते हैं कि अरहर के खेतों में नमी की मात्रा को बनाए नहीं रखते, जिससे फसल पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है.

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arhar fasal

डॉक्टर सी.के. त्रिपाठी बताते हैं कि यदि फरवरी महीने में अरहर के खेतों में हल्की सिंचाई कर दी जाए और बीज बनने तक पौधों को नमी मिलती रहे, तो इससे पैदावार में कई गुना बढ़ोतरी हो सकती है. इससे पौधे भी पूरी तरह ऊर्जा से भरपूर हो जाते हैं, जिससे अरहर के दाने मोटे और मजबूत बनते हैं. हालांकि, इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि सिंचाई हल्की मात्रा में ही करें, वरना पौधे गिर भी सकते हैं.

arhar ki fasal

डॉक्टर सी.के. त्रिपाठी बताते हैं कि अरहर की फसल में मुख्य रूप से माहू रोग का खतरा रहता है. इसकी पहचान के लिए पत्तियों और टहनियों को ध्यान से देखें. छोटे-छोटे झुंड में हरे, काले या भूरे रंग के कीट पत्तियों की निचली सतह और नई टहनियों पर चिपके दिखाई देते हैं. ये सीधे फूलों पर आक्रमण करते हैं, जिससे प्रभावित पत्तियां ऊपर या अंदर की ओर मुड़ जाती हैं और पौधे की बढ़वार रुकने लगती है.

arhar fasal

अगर अरहर की फसल में माहू रोग के लक्षण दिख रहे हैं तो किसान इमिडाक्लोप्रिड दवा का घोल बनाकर छिड़काव कर सकते हैं. इसके लिए एक बीघा में लगभग 15-20 लीटर पानी में 15-20 मिलीलीटर दवा मिलाकर घोल तैयार करें और प्रति बीघा के हिसाब से छिड़काव करें, ताकि फसल को नुकसान से बचाया जा सके.

arhar ki fasal

अरहर के पौधों में सबसे खतरनाक कीट फली भेदक होता है. इसके लक्षण के रूप में अरहर की फलियों में छोटे-छोटे छिद्र दिखाई देने लगते हैं. ऐसे में इससे बचाव के लिए फसल में नीम तेल का छिड़काव करना चाहिए. इन उपायों को अपनाकर किसान अरहर की फसल को सुरक्षित रख सकते हैं और कीटों पर नियंत्रण पा सकते हैं.

arhar ki fasal

अरहर के पौधों में जब फूल आने लगें, तो उनके आसपास हल्की-हल्की मिट्टी चढ़ा देनी चाहिए. इसका फायदा यह होता है कि दाने बनने के बाद हवा या सिंचाई के दौरान पौधे गिरते नहीं हैं और पैदावार पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता.

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