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ओडिशा में कटक के श्रीराम चंद्र भंज मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 14-15 मार्च की दरम्यानी रात करीब 3 बजे आग लग गई। हादसे में 10 मरीजों की मौत हो गई है। इनमें से 7 ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, 3 की मौत इलाज के दौरान हुई। आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट बताया गया है।
आग पहली मंजिल पर ट्रॉमा केयर के ICU में लगी थी। यहां करीब 23 मरीज भर्ती थे। उन्हें बचाने में अस्पताल के कम से कम 11 कर्मचारी झुलस गए।
एक मरीज के रिश्तेदार ने बताया- आग बहुत तेजी से फैल गई थी। उन्होंने वहां मौजूद कुछ और मरीजों के रिश्तेदारों ने मिलकर 8 से 10 मरीजों को बाहर निकालने में मदद की।
उनका कहना था कि मरीजों की मदद के लिए स्टाफ में बहुत कम लोग थे। इसलिए समय रहते मरीजों को बाहर नहीं निकाला जा सका।
पहले देखें, हादसे की तीन तस्वीरें…
हादसे के बाद अस्पताल के बाहर मची अफरातफरी।
हादसे की खबर लगते ही मरीजों के परिजन हॉस्पिटल के बाहर जमा हो गए।
परिजन को ही ऑक्सीजन सिलेंडर समेत बाकी जरूरी सामान लाना पड़ा।
अस्पताल में फायर सेफ्टी के इंतजाम नहीं थे
घटना के बाद परिजन में काफी गुस्सा देखने को मिला। लोग सवाल उठा रहे थे कि ICU में फायर सेफ्टी का सही इंतजाम नहीं था। एक मृतक के भाई का कहना था कि अगर समय पर सही व्यवस्था होती, तो शायद कुछ लोगों की जान बचाई जा सकती थी।
उन्होंने बताया कि आग पहली मंजिल पर ही लगी थी। लेकिन घना धुआं बाकी मंजिलों तक फैल गया था। इससे कर्मचारियों को अलग-अलग वार्डों से मरीजों को बाहर निकालना पड़ा।
कर्मचारियों ने बताया कि फायर टेंडर को घटनास्थल तक पहुंचने में लगभग 30 मिनट लगे, जबकि फायर स्टेशन एससीबी परिसर के अंदर ही मौजूद था।
अस्पताल के डॉक्टर और नर्सों ने तुरंत मरीजों को वहां से बाहर निकालने की कोशिश शुरू की। इसी बीच फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाया गया।
अलार्म या पब्लिक अनाउंसमेंट सुनाई नहीं दिया
एक मरीज के रिलेटिव ने बताया कि आईसीयू में कोई फायर प्रोटेक्शन नहीं था। आग लगने के वक्त उन्हें किसी तरह का अलार्म या पब्लिक अनाउंसमेंट भी सुनाई नहीं दिया। अगर समय रहते अलर्ट मिलता, तो शायद हालात इतने खराब नहीं होते।
कुछ लोगों का यह भी कहना है कि आग लगने के बाद शुरुआती कुछ मिनटों तक लोगों को यह समझ ही नहीं आया कि आखिर हुआ क्या है। धुआं बढ़ने के बाद ही लोगों में घबराहट फैली और तब जाकर मरीजों को बाहर निकालने की कोशिश शुरू हुई।
डॉक्टर ने मीडिया के सवालों का जवाब देने से इनकार किया
डॉक्टर और स्टाफ की भूमिका जानने के बाद हम पोस्टमॉर्टम काउंटर के सामने मौजूद एक डॉक्टर से भी बात करने की कोशिश की। हम उनसे पूछना चाहते थे कि आखिर कुल कितने लोगों की मौत हुई है। क्योंकि वहां मौजूद कुछ लोग कह रहे थे कि जितनी संख्या मीडिया में सामने आ रही है, संख्या कहीं उससे ज्यादा है।
लेकिन जब हमने डॉक्टर से सवाल पूछने की कोशिश की, तो उन्होंने मीडिया के सवालों का जवाब देने से इनकार कर दिया और कुछ ही देर बाद मोटरसाइकिल के पीछे बैठकर वहां से चले गए।
चश्मदीदों ने बताया कि धुआं तेजी से फैलने के कारण ICU में भर्ती कई मरीजों की हालत बिगड़ने लगी थी। जो मरीज पहले से गंभीर थे और ऑक्सीजन या वेंटिलेटर पर थे, उन्हें सांस लेने में और ज्यादा परेशानी हो रही थी। शुरुआती जानकारी के अनुसार इस हादसे में करीब 10 मरीजों की मौत हो गई।
सुबह जब आग बुझी तब ICU के अंदर बेड और मशीनें जले हुए नजर आए।
10 साल पहले भी हुई 22 मौतें, दोबारा हुआ ऐसा हादसा
2016 में ओडिशा में भुवनेश्वर के एक निजी SUM हॉस्पिटल में आग लगी थी। इसमें 22 मरीजों की मौत हो गई थी। तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री अस्पताल के मालिक के करीबी थे। इसलिए उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था। अस्पताल के मालिक को भी हत्या के केस में जेल जाना पड़ा था।
2016 में SUM हॉस्पिटल की घटना के बाद उसके मालिक मनोज को गिरफ्तार किया गया था। आज SCB मेडिकल की इस घटना के बाद लोगों के मन में यही सवाल है- इस बार जिम्मेदार कौन होगा और सरकार किस पर कार्रवाई करेगी?
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हॉस्पिटल में आग से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…
जयपुर के SMS हॉस्पिटल में आग से 8 मरीजों की मौत हुई थी, ट्रॉमा सेंटर के ICU में शॉर्ट सर्किट से हादसा
अक्टूबर 2025 में जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) हॉस्पिटल के ट्रॉमा सेंटर के आईसीयू में भी आग लगी थी। इस हादसे में 8 मरीजों की मौत हुई थी। हादसे के समय आईसीयू में 11 मरीज थे। हादसे का शिकार मरीज वेंटिलेटर पर थे। यह भी पता चला था कि स्टोर रूम में लगे स्मोक डिटेक्टर ने सही से काम नहीं किया। इसके कारण अलार्म सिस्टम समय पर एक्टिवेट नहीं हुआ। पढ़ें पूरी खबर…
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