मंगलवार से पानी देना बंद करने के बाद, पोषण और हाइड्रेशन के लिए लगी ट्यूब पर कैप लगा दिया जाएगा, लेकिन उसे उनके शरीर से हटाया नहीं जाएगा। एम्स के विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम लगातार हरीश राणा के स्वास्थ्य की हर धड़कन और नब्ज पर मॉनिटर के जरिए कड़ी नजर रख रही है। जीवन रक्षक उपकरणों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।
आधिकारिक प्रतिक्रिया और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन
हालांकि, एम्स अस्पताल प्रशासन ने इस मामले पर आधिकारिक तौर पर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया है और कोई भी औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, डॉक्टरों की 5 से 9 सदस्यों वाली एक मल्टीडिसिप्लिनरी टीम सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी किए गए निर्देशों के अनुसार हर कार्रवाई को अंजाम दे रही है। एम्स के शांत गलियारों में इस समय एक अत्यंत कठिन और भावनात्मक निर्णय की प्रक्रिया चल रही है, जहां चिकित्सा विज्ञान, कानूनी प्रावधान और मानवीय संवेदनाएं एक साथ मिलकर एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ी हैं।
यह है मामला
जुलाई 2010 में हरीश ने चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया था। वर्ष 2013 में वह अंतिम वर्ष के छात्र थे। इसी दौरान अगस्त 2013 में रक्षाबंधन वाले दिन बहन से मोबाइल फोन पर बात करते हुए पीजी की चौथी मंजिल से गिर गए थे। गंभीर रूप से घायल हरीश को तुरंत पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया। बाद में दिसंबर 2013 में उसे दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि वह क्वाड्रिप्लेजिया से ग्रसित है।
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