क्या पिछला जन्म सच में इस जन्म में काम आता है? बॉलीवुड ने दशकों से अपनी पुनर्जन्म थीम वाली फिल्मों के जरिए इस दिलचस्प सवाल का जवाब दिया है. 1958 में ‘मधुमती’ ने जो डर और प्यार का माहौल बनाया, उसे ‘करण अर्जुन’ के बदलाव और ‘ओम शांति ओम’ की शान ने अमर कर दिया. आज हम आपको पुनर्जन्म पर बनी 7 ऐसी फिल्मों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो रिलीज के साथ ही बॉक्स ऑफिस पर छा गई थीं.
नई दिल्ली. बॉलीवुड की खूबसूरती इसकी अलग-अलग तरह की चीजों में है, लेकिन एक थीम ने दशकों से दर्शकों को बांधे रखा है और वह है ‘पुनर्जन्म’. पिछले जन्म की एक अधूरी प्रेम कहानी, एक पुराना दुश्मन और आज उन यादों का फिर से ताजा होना. यह एक ऐसा ताना-बाना है जिसने लगातार बॉक्स ऑफिस पर सफलता का एक नया अध्याय लिखा है. 1958 में ‘मधुमती’ से शुरू होकर, यह ट्रेंड ‘करण अर्जुन’ और ‘ओम शांति ओम’ जैसी फिल्मों के साथ एक सुपरहिट फॉर्मूले में बदल गया है. तो आइए, 1958 से लेकर 2007 तक की उन 7 ब्लॉकबस्टर फिल्मों के बारे में आपको विस्तार से बताते हैं.
1. मधुमती (1958): जब भी पुनर्जन्म की कहानियों पर बात होती है, तो बिमल रॉय की ‘मधुमती’ का जिक्र सबसे पहले होता है. यह फिल्म सिर्फ हिट नहीं थी, बल्कि आने वाले कई दशकों के लिए एक ब्लूप्रिंट थी. रहस्यमयी धुंध, पहाड़ियां और भूतों से भरी हवेली. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इन सबने दर्शकों को रोमांच से भर दिया और रिलीज के साथ ही यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी. दिलीप कुमार और वैजयंतीमाला की शानदार एक्टिंग ने फिल्म में जान डाल दी. फिल्म का म्यूजिक ‘आजा रे परदेसी’ आज भी लोगों के बीच मशहूर है. खबरों की मानें तो फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 4 करोड़ कमाए थे, जो उस समय फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक बड़ी बात थी.
2. मिलन (1967): 1960 के दशक के आखिर में सुनील दत्त और नूतन की फिल्म ‘मिलन’ रिलीज हुई थी. इस फिल्म में पुनर्जन्म के पहलू को दिखाया गया है, जहां समाज की मजबूरियां दो प्रेमियों को अलग कर देती हैं, लेकिन किस्मत उन्हें अगले जन्म में फिर से मिला देती है. फिल्म के गाने खासकर ‘सावन का महीना’ आज भी गुनगुनाए जाते हैं. इस फिल्म ने न सिर्फ पैसे कमाए बल्कि पुनर्जन्म की कहानियों में इमोशनल ड्रामा का लेवल भी बढ़ाया.
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3. नील कमल (1968): ‘नील कमल’ ने पुनर्जन्म की कहानी को एक नया मोड़ दिया. यहां हीरो राज कुमार ने एक ऐसी आत्मा का रोल किया जो अपने अधूरे प्यार की तलाश में सदियों से भटक रही है. विदाई गीत ‘बाबुल की दुआएं लेती जा’ के बीच दिल को छू लेने वाली आवाज- ‘आजा तुझको पुकारे मेरा प्यार’ फिल्म की जान थी. फिल्म ने रहस्य और प्यार का ऐसा मेल दिखाया कि यह एक कल्ट क्लासिक बन गई.
4. कर्ज (1980): 1980 के दशक की शुरुआत में डायरेक्टर सुभाष घई ने पुनर्जन्म को एक ग्लैमरस ट्विस्ट दिया. ‘कर्ज’ पुरानी हवेलियों की सीमाओं से बाहर निकलकर डिस्को और गिटार की दुनिया में चली गई. ऋषि कपूर का ‘मोंटी’ का किरदार और सिमी ग्रेवाल का ‘कमनी’ का नेगेटिव किरदार आज भी यादगार है. पिछले जन्मों की यादें जगाने के लिए फिल्म में एक धुन ‘ओम शांति ओम’ का इस्तेमाल स्क्रिप्टराइटिंग का एक मास्टरपीस था. बॉक्स ऑफिस पर धीमी शुरुआत के बाद, फिल्म एक बड़ी हिट बन गई और म्यूजिक इंडस्ट्री में क्रांति ला दी थी.
5. कुदरत (1981): राजेश खन्ना और हेमा मालिनी स्टारर ‘कुदरत’ में पुनर्जन्म को कानूनी न्याय के साथ जोड़ा गया था. एक वकील को अपने क्लाइंट की पिछली जिंदगी में हुई हत्या का राज खोलते देखना दर्शकों के लिए एक अनोखा अनुभव था. फिल्म ने यह मैसेज दिया कि समय बदल सकता है, लेकिन इंसाफ का पहिया कभी न कभी जरूर घूमता है.
6. करण अर्जुन (1995): 90 के दशक में पुनर्जन्म का सबसे बड़ा धमाका फिल्म ‘करण अर्जुन’ के साथ हुआ. राकेश रोशन ने एक मां के विश्वास और दो भाइयों के बदले की कहानी को इस तरह बुना कि थिएटर छोटे पड़ गए. शाहरुख खान और सलमान खान की जोड़ी ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया. ‘मेरे करण अर्जुन आएंगे’- यह सिर्फ एक लाइन नहीं थी, बल्कि इसने फिल्म की सफलता की गारंटी दी. फिल्म ने उस समय 50 करोड़ से ज्यादा की कमाई की और सालों तक सिंगल-स्क्रीन थिएटर में लगी रही. आज भी इसे पुनर्जन्म पर आधारित सबसे कमर्शियली सफल फिल्मों में से एक माना जाता है.
7. ओम शांति ओम (2007): शाहरुख खान की ‘ओम शांति ओम’ इस जॉनर की सबसे शानदार फिल्मों में से एक है. फराह खान की यह बड़ी पुनर्जन्म की कहानी 70 के दशक के बॉलीवुड को ट्रिब्यूट देती है. एक आम जूनियर आर्टिस्ट के सुपरस्टार बनने और अपनी प्रेमिका की मौत का बदला लेने की कहानी वाली इस फिल्म ने दर्शकों को बहुत पसंद किया. यह दीपिका पादुकोण की पहली फिल्म थी और इसने ग्लोबल बॉक्स ऑफिस पर 150 करोड़ से ज्यादा की कमाई की थी.
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