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नई दिल्ली. दो दशक पहले दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के हाथ लगे दो आतंकवादी अब एक बार फिर सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ा सिरदर्द बन गए हैं. ये दोनों तिहाड़ जेल में सजा काट कर रिहा हुए थे. जांच एजेंसियों के अनुसार, ये दोनों आतंकी अब लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के मोस्ट वांटेड ऑपरेटिव बन चुके हैं और भारत के खिलाफ आतंकी साजिशों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. खतरनाक बात यह है कि इनमें से एक लश्‍कर आतंकवादी पहलगाम में निर्दोष पर्यटकों का नरसंहार करने वाले आतंकी संगठन का सरगना है.

इस कहानी की शुरुआत 9 मई 2002 की एक रात से होती है. उस रात दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को खुफिया सूचना मिली थी कि राजधानी में बड़ा आतंकी हमला हो सकता है. खुफिया सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने हुमायूं के मकबरे के पास और निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन इलाके में विशेष निगरानी शुरू कर दी थी. मुंबई से आने वाली पंजाब मेल ट्रेन से उतर रहे यात्रियों की भीड़ के बीच पुलिस ने तीन संदिग्ध आतंकियों (सज्जाद, मेहराजुद्दीन और फिरोज) को गिरफ्तार कर लिया. तलाशी के दौरान इनके पास से लगभग 5 किलो RDX, एक AK-47 राइफल, दो पिस्तौल, चार डेटोनेटर, प्लास्टिक विस्फोटक सामग्री और नकदी बरामद की गई थी.

दो पाकिस्‍तानी आतंकवादियों का एनकाउंटर

‘टाइम्‍स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के अनुसार, पूछताछ के दौरान गिरफ्तार आतंकियों ने पुलिस को पास में खड़ी एक मारुति कार के बारे में जानकारी दी, जिसमें दो पाकिस्तानी आतंकवादी उनका इंतजार कर रहे थे. इसके बाद पुलिस टीम ने मौके पर घेराबंदी की. उस समय के डीसीपी अशोक चंद, एसीपी राजबीर सिंह और इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा की टीम ने मुठभेड़ में दोनों पाकिस्‍तानी आतंकियों (अबू बिलाल और अबू जाबीउल्लाह) को मार गिराया. इस मामले में गिरफ्तार सज्जाद और उसके सहयोगियों को अदालत ने दोषी ठहराते हुए तिहाड़ जेल भेज दिया था. लेकिन ठहरिए… यह कहानी यहीं खत्म नहीं हुई.

पांच साल बाद…

करीब पांच साल बाद जुलाई 2007 में स्पेशल सेल को फिर सूचना मिली कि एक आतंकी ऑपरेटिव दिल्ली भेजा गया है. इसके बाद पुलिस ने शब्बीर अहमद लोन नामक आतंकी को गिरफ्तार किया. उसके पास से ग्रेनेड, हथियार, गोला-बारूद, 280 अमेरिकी डॉलर और एक लाख रुपये बरामद हुए थे. इसके बाद लगभग एक दशक तक सज्जाद और शब्‍बीर अहमद लोन तिहाड़ जेल में बंद रहे. दोनों की रिहाई 2018 और 2019 के आसपास हुई. जेल से बाहर आने के बाद इन दोनों की गतिविधियों ने सुरक्षा एजेंसियों को चौंका दिया.

लश्‍कर के सरगना हाफिज सईद भारत में तबाही मचाने की साजिश रचता रहता है. वह आतंकी संगठन के नेटवर्क को बढ़ाने में जुटा है. (फाइल फोटो/Reuters)

एक पाकिस्‍तान तो दूसरा गया बांग्‍लादेश

जांच एजेंसियों के मुताबिक, रिहाई के बाद शब्बीर अहमद लोन पाकिस्तान भाग गया. वहां से पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI ने उसे बांग्लादेश भेजा, जहां उसने एक नया आतंकी नेटवर्क खड़ा करना शुरू किया. हाल ही में उसके नेटवर्क के लोगों ने दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय AI शिखर सम्मेलन से पहले भड़काऊ पोस्टर चिपकाया था. इसके बाद जांच एजेंसियों के कान खड़े हो गए थे. सूत्रों के अनुसार, शब्‍बीर लोन इस समय बांग्लादेश में रहकर ISI के समर्थन और वित्तीय मदद से काम कर रहा है और उसका मुख्य लक्ष्य बांग्लादेशी युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलकर भारत के खिलाफ आतंकी साजिशों में शामिल करना है.

फिर बन गया पहलगाम हमले का मास्‍टरमाइंड

दूसरी ओर, सज्जाद उर्फ शेख सज्जाद गुल भी पाकिस्तान पहुंच चुका है और अब लश्कर के प्रॉक्सी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) का प्रमुख ऑपरेटिव या सरगना माना जा रहा है. इसी संगठन को कई आतंकी हमलों के पीछे जिम्मेदार बताया गया है, जिनमें पहलगाम हमला भी शामिल है. इस अटैक में 27 पर्यटकों की निर्मम तरीके से हत्‍या कर दी गई थी. 1974 में जन्मे सज्जाद ने कश्मीर में शुरुआती शिक्षा प्राप्त की थी. उसने श्रीनगर से BSc. की पढ़ाई की, इसके बाद केरल में लैब टेक्नीशियन का कोर्स किया और 1996 में बेंगलुरु में एमबीए की पढ़ाई शुरू की थी. बाद में उसने कश्मीर में एक डायग्नोस्टिक सेंटर भी खोला, लेकिन इसी दौरान वह लश्कर के लिए ओवरग्राउंड वर्कर के तौर पर आतंकवादी गतिविधियों में शामिल हो गया.

आसिम मुनीर के गढ़ में सज्‍जाद का ठिकाना

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, पहलगाम हमले के बाद सज्जाद इस समय पाकिस्तान के रावलपिंडी में रह रहा है और उसे ISI की सुरक्षा भी दी गई है. रावलपिंडी में ही पाकिस्‍तान आर्मी का मुख्‍यालय भी है, जहां आसिम मुनीर रहते हैं. भारतीय एजेंसियों ने सज्जाद और लोन दोनों को कैटेगरी-A का बेहद खतरनाक आतंकवादी घोषित किया है. दोनों पर भारी-भरकम इनाम घोषित किया गया है और इनके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है. अधिकारियों का कहना है कि इन दोनों आतंकियों की गतिविधियों पर करीबी नजर रखी जा रही है और भारत के खिलाफ किसी भी आतंकी साजिश को विफल करने के लिए सुरक्षा एजेंसियां एकसाथ मिलकर लगातार कार्रवाई कर रही हैं.

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