गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध का शंखनाद करते हुए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने घोषणा की कि वे धर्म की रक्षा के लिए शंकराचार्य चतुरंगिणी सेना बनाएंगे जो संत समाज में व्याप्त अशास्त्रीयता और अधर्म को दूर करने का कार्य करेगी। उन्होंने कहा कि धार्मिक समाज में धर्मनिरपेक्ष शपथ नहीं, बल्कि धर्म की शपथ ही चलेगी और अगर परिस्थितियां बनीं तो फिर शस्त्र उठाने से भी परहेज नहीं करेंगे।
कांशीराम स्मृति सांस्कृतिक स्थल पर बुधवार को आयोजित कार्यक्रम में देशभर से जुटे संत, धर्माचार्य और गो रक्षकों को संबोधित करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि साधु समाज में भी विकृतियां आ रही हैं। अखाड़ा परिषद के बहुत से महंतों और साधुओं ने कहा कि हम मुख्यमंत्री के साथ हैं, शंकराचार्य के साथ नहीं हैं। इस पर उन्होंने कहा कि जब अखाड़े हमारे साथ नहीं हैं तो अब हम अपनी अलग सेना बनाएंगे।
कहा, हम शंकराचार्य चतुरंगिणी की स्थापना करेंगे। शंकराचार्य ने कहा कि दोहरा चरित्र किसी संन्यासी या योगी का नहीं हो सकता। शंकराचार्य ने प्रयागराज में माघ मेले में हुई घटना का जिक्र करते हुए कहा कि वेद पढ़ने वाले बटुक क्या लाठी और आपके जूते के योग्य थे जो उनके साथ अन्याय किया गया। उन्होंने जनता को आगाह किया कि कसाई ही हत्यारा नहीं है, बल्कि गो वध की अनुमति देने वाला और मौन रहने वाला भी उसी पाप का भागी है।
गोरखपुर से होगी गविष्ठि यात्रा की शुरुआत
शंकराचार्य ने कहा कि समग्र गविष्ठि गोयुद्ध यात्रा शुरू की जाएगी। यह यात्रा तीन मई से 23 जुलाई तक चलेगी। इसका प्रारंभ गोरखपुर से होगा। गोरखपुर में ही संपन्न होगी। 24 जुलाई को फिर से कांशीराम स्मृति स्थल पर बड़ी सभा होगी।
सनातन की सुप्रीम कोर्ट हैं शंकराचार्य
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि सनातन की सुप्रीम कोर्ट हैं शंकराचार्य। गो माता की रक्षा के साथ हमें सनातन की रक्षा का भी संकल्प लेना होगा।
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