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विपक्ष लोक सभा अध्‍यक्ष के बाद देश के मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साध लिया है. उनके खिलाफ भी हमलावर हो चुका है. अब उनके खिलाफ सांसदों ने हस्‍ताक्षर अभियान शुरू कर दिया है. उनकी तैयारी इसी सप्‍ताह संसद के दोनों हाउस के सचिवालयों में नो‍टिस जमा करने की तैयारी है.

स्‍पीकर के बाद अब विपक्ष के निशाने पर CEC,अविश्वास प्रस्ताव की तैयारीZoom

विपक्ष ने हस्‍ताक्षर अभियान शुरू किया है.

नई दिल्ली. विपक्ष लोक सभा अध्‍यक्ष के बाद देश के मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साध लिया है. उनके खिलाफ भी हमलावर हो चुका है. अब उनके खिलाफ सांसदों ने हस्‍ताक्षर अभियान शुरू कर दिया है. उनकी तैयारी इसी सप्‍ताह संसद के दोनों हाउस के सचिवालयों में नो‍टिस जमा करने की तैयारी है. जो मुख्य चुनव आयुक्त को हटाने के लिए प्रस्ताव संबंधी होगा. इतिहास में ऐसा पहली बार हो है, जब किसी मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का नोटिस दिया जा रहा है.

टाइम्‍स ऑफ इं‍डिया की रिपोर्ट के अनुसार टीएमसी की अगुवाई में तैयार यह नोटिस लोकसभा और राज्यसभा के महासचिवों को दिया जाएगा. सूत्रों के अनुसार नोटिस में लगभग आधा दर्जन आरोप लगाए गए हैं. इनमें मुख्य चुनाव आयुक्त का पक्षपात व्यवहार और वोटर लिस्ट से मतदाताओं के नाम हटाने जैसे गंभीर आरोप शमिलहै. इंडिया गठबंधन की सभी पार्टियों के साथ-साथ गठबंधन से बाहर आम आदमी पार्टी के सांसदों ने भी हस्ताक्षर किये हैं. सूत्रों ने बताया कि नोटिस गुरुवार को ही जमा किया जा सकता है.

बुधवार रात तक लोकसभा के लिए करीब 120 और राज्यसभा के लिए लगभग 60 सांसदों के साइन हो चुके थे. नियम के अनुसार लोकसभा में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के नोटिस के लिए कम से कम 100 सांसदों के साइन जरूरी हैं. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर विपक्ष के आरोप लगातार बढ़ रहे हैं.
टीएमसी कई महीनों से उन्हें हटाने का नोटिस देने की मांग कर रही थी. अन्य विपक्षी दल भी हमलावर हैं. राहुल गांधी ने ‘वोट चोरी’ अभियान चलाया है. शनिवार को टीएमसी ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को हटाने के प्रस्ताव का समर्थन की घोषणा की थी. हालांकि बजट सत्र के पहले चरण में स्पीकर हटाने के विपक्ष के नोटिस पर टीएमसी ने हस्ताक्षर नहीं किए थे. उस समय पार्टी ने कहा था कि पहले स्पीकर को पत्र लिखकर सुधार का मौका दिया जाना चाहिए था. बुधवार को लोकसभा में स्पीकर हटाने का नोटिस वॉइस वोट से हार गया. उसी दिन विपक्ष ने दोनों सदनों से सांसदों के हस्ताक्षर जुटाकर इंडिया गठबंधन की मजबूती दिखाई.

मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के जज हटाने जैसी है. यह केवल ‘कदाचार या अक्षमता’ के आधार पर ही संभव है. 1968 के जजेस (इंक्वायरी) एक्ट के अनुसार नोटिस स्वीकार होने पर स्पीकर या चेयरमैन तीन सदस्यीय समिति बनाएंगे. जो मामले की जांच करेगी. रिपोर्ट आने पर सदन में चर्चा होगी. दोनों सदनों से विशेष बहुमत से प्रस्ताव पास होना जरूरी है. इसमें सदन के कुल सदस्यों का बहुमत और मौजूद व मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत जरूरी होन चाहिए.

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Sharad Pandeyविशेष संवाददाता

करीब 20 साल का पत्रकारिता का अनुभव है. नेटवर्क 18 से जुड़ने से पहले कई अखबारों के नेशनल ब्‍यूरो में काम कर चुके हैं. रेलवे, एविएशन, रोड ट्रांसपोर्ट और एग्रीकल्चर जैसी महत्वपूर्ण बीट्स पर रिपोर्टिंग की. कैंब्रिज…और पढ़ें

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