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बारापुला नाले में गंदे पानी के बहाव को रोकने के लिए दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) ने कदम तेज कर दिए हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों के बाद डीजेबी ने झुग्गी बस्तियों से निकलने वाले सीवेज को रोकने और स्थानीय स्तर पर उपचार करने की योजना बनाई है। इसके तहत आठ झुग्गी क्लस्टरों में छोटे और मॉड्यूलर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगाए जाएंगे, ताकि गंदा पानी नाले में न गिरे। डीजेबी ने इस संबंध में एक रिपोर्ट शपथ-पत्र के साथ एनजीटी में दाखिल की है। डीजेबी के मुख्य अभियंता भूपेश कुमार ने रिपोर्ट में बताया कि 10 झुग्गी (जेजे) क्लस्टरों के नालों को ट्रैप करने की योजना बनाई गई थी। इनमें से दो का काम पहले ही पूरा हो चुका है।

श्री राम कैंप (धौलाकुआं के पास स्प्रिंगडेल स्कूल के नजदीक) और मद्रासी कैंप के नालों को पहले ही दिल्ली जल बोर्ड के सीवर नेटवर्क से जोड़ दिया गया है। हालांकि, बाकी आठ क्लस्टरों में अब भी गंदा पानी बारापुला ड्रेन में गिर रहा है। इन क्षेत्रों में सीवेज को एक जगह इकट्ठा कर मुख्य सीवर लाइन से जोड़ना संभव नहीं है। ऐसे में इन बस्तियों में छोटे-छोटे डिसेंट्रलाइज्ड एसटीपी लगाने का फैसला किया है। आठ झुग्गी क्लस्टरों में आरके पुरम का अंबेडकर बस्ती (वेस्ट ब्लॉक-2), मोहन सिंह मार्केट के सामने स्थित लेब्रोसी कॉलोनी, सेक्टर-7 का नेहरू एकता कैंप, सेक्टर-6 की एसपी/जेपी कॉलोनी और सेक्टर-1 की पुलिस पोस्ट के पास स्थित हनुमान कैंप शामिल हैं। इसके अलावा वसंत विहार क्षेत्र के नेपाली कैंप, सेवा कैंप (मुनिरका डिपो के पास) और शिवा कैंप भी इस योजना में शामिल हैं।

एसटीपी होंगे फैब्रिकेटेड टैंकों पर आधारित

डीजेबी ने इन सभी क्लस्टरों के लिए आरके पुरम सेक्टर-12 में एक स्थान चिह्नित किया है, जो अंबेडकर बस्ती नाले के पास और रिंग रोड स्थित पीडब्ल्यूडी कार्यालय के नजदीक है। प्रस्तावित एसटीपी फैब्रिकेटेड टैंकों पर आधारित होंगे। इन संयंत्रों में गंदे पानी को साफ किया जाएगा, जिसका उपयोग बागवानी या अन्य कार्यों में किया जा सकेगा। रिपोर्ट में बताया गया कि बारापुला ड्रेन मूल रूप से वर्षा जल निकासी का नाला है। इसमें सीवेज डालना गैरकानूनी है। इससे नाले की क्षमता कम हो जाती है, जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।

परियोजना के लिए डुसिब से कई बार किया संपर्क

रिपोर्ट में बताया गया कि परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डुसिब) से कई बार संपर्क किया गया, लेकिन वहां से कोई ठोस सहयोग नहीं मिला। पत्रों में कहा गया था कि जेजे क्लस्टरों का सीवेज एक स्थान पर एकत्र कर डीजेबी को सौंपा जाए, ताकि उसे सीवर नेटवर्क से जोड़ा जा सके। रिपोर्ट के अनुसार, 27 नवंबर 2025 को दोनों एजेंसियों ने संयुक्त निरीक्षण भी किया था, लेकिन उसके बाद भी डुसिब की ओर से कोई स्पष्ट कार्य योजना सामने नहीं आई। इस स्थिति में डीजेबी ने एनजीटी में डुसिब के खिलाफ एक आवेदन भी दाखिल किया है।

एनडीएमसी से मांगी नक्शे और ट्रैपिंग योजना की जानकारी

रिपोर्ट के अनुसार, इसके अलावा डीजेबी ने नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) को भी पत्र लिखकर उनके अधिकार क्षेत्र में आने वाले नालों की स्थिति, नक्शे और ट्रैपिंग योजना की जानकारी मांगी है। इस संबंध में 5 जनवरी को रिमाइंडर भी भेजा गया है और संयुक्त निरीक्षण का प्रस्ताव रखा गया है। डीजेबी ने नालों में बहने वाले पानी की मात्रा मापने के लिए भी कदम उठाए हैं। इसके लिए एक टेंडर जारी किया गया। गौरतलब है कि एनजीटी ने 9 सितंबर 2025 को अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि किसी भी स्थिति में बिना उपचार का सीवेज स्टॉर्म वॉटर ड्रेन में नहीं डाला जा सकता।

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