छठी पीढ़ी के मिनी जेट
लेकिन अब समय पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स से भी आगे निकल चुका है. चीन और अमेरिका जैसे देश छठी पीढ़ी के जेट्स बनाने में लगे हैं. इस बीच भारत भी हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठा है. भारत के पास अमेरिका और चीन के तरह बेतहाशा संसाधन नहीं हैं लेकिन, वह अपने सीमित संसाधन में काफी कुछ करने की क्षमता रखता है. इसी कड़ी में भारत ने छठी पीढ़ी के मिनी फाइटर जेट्स पर काम शुरू कर दी है. एयरफोर्स के लिए ऐसे 60 प्लेटफॉर्म खरीदे जाएंगे. रक्षा मंत्रालय ने की रक्षा खरीद परिषद ने इसकी मंजूरी दे दी है. इस एक प्लेटफॉर्म की कीमत करीब 600 से 700 करोड़ रुपये बीच है.
भारत फ्रांस से 114 राफेल विमान खरीद रहा है.
घातक की 6th जेन वाली खासियतें
- घातक एक पूरी तरह स्टेल्थ प्लेटफॉर्म है. इसकी डिजाइन टेललेस है. स्टेल्थ होने की वजह से इसको रडार सिस्टम इंटरसेप्ट नहीं कर सकता.
- यह प्लेटफॉर्म कई तरह के हथियारों से लैस है. यह एक बार में 1500 किलो का पेलोड ले जा सकता है.
- इसमें कावेरी डेरिवैटिव ड्राई टर्बोफैन इंजन लगा है. जो शानदार थर्स्ट के साथ लगातार अपनी ताकत बनाए रखता है. भारत के हिमालय क्षेत्र में भी यह ताकत बनाए रखता है. जबकि चीन का इंजन इस मामले में आज भी परेशानी का सामना कर रहा है.
- यह दुश्मन के इलाके में बेहद डीप स्ट्राइक करने की क्षमता रखता है. इसे डीआरडीओ ने विकसित किया है और इसका वजन करीब 13 टन है.
- इस एरियल वेहिलक की तकनीक बेहद एडवांस है. यह भारत की पांचवीं पीढ़ी के एम्का जेट और 4.5 पीढ़ी के तेजस मार्क-2 के साथ मिलकर एक टीम की तरह काम करेगा. इसी साल इसके प्रोटोटाइप को मंजूरी मिलने की संभावना है.
घातक क्यों है मिनी 6th जेन फाइटर जेट?
दरअसल, दुनिया में अभी तक छठी पीढ़ी का कोई फाइटर जेट मौजूद नहीं है. लेकिन, इसका जो कंसेप्ट है उसके मुताबिक पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर जेट्स को तकनीकी तौर पर अपग्रेड कर उसे बेहद इंटेलिजेंट बनाने की योजना है. जहां तक घातक की बात है तो यह इन सभी पैमाने पर एक परफेक्ट प्लेटफॉर्म है.
भारत पांचवीं पीढ़ी के एम्का प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है.
मैन्ड-अनमैन्ड टीमिंग
छठी पीढ़ी के एरियल वेहिकल की यही सबसे बड़ी ताकत है. जंग के मैदान में एक सिंगल फाइटर जेट की तरह काम नहीं करता. बल्कि यह एक टीम की तरह काम करता है, जो खुद मल्टीपल टार्गेट की पहचान कर उसको अपने हिसाब से हिट करता है.
चीन की तुलना में कहां है भारत
ऐसा नहीं है कि भारत का घातक प्लेटफॉर्म अपनी तरह का दुनिया का पहला प्लेटफॉर्म है. चीन ने 2013 में करीब-करीब ऐसी ही प्लेटफॉर्म जीजे-11 को डेवलप कर लिया था. मौजूदा वक्त में चीन की सेना में इसे शामिल किया जा चुका है. लेकिन, जीजे-11 कई मामले में भारत के घातक की तुलना में तकनीकी रूप से पीछे है. भारत ने घातक को एआई से लैस कर इसे और घातक बनाने की योजना बनाई है.
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