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Agriculture News: आम की बागवानी करने वाले किसानों के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इसी समय आम के पेड़ों में बौर यानी मंजरियां निकलती हैं और इन्हीं पर कीट और फफूंदजनित रोगों का सबसे ज्यादा खतरा रहता है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यदि बौर में कीड़े लग जाते हैं, तो इससे आम के फल की गुणवत्ता और आकार दोनों प्रभावित होते हैं.
चित्रकूट: जिले का किसान आज भी खेती और बागवानी को लेकर कई चुनौतियों से जूझ रहा है. आधुनिक संसाधनों की कमी, तकनीकी जानकारी का अभाव और समय पर सही सलाह न मिल पाने के कारण कई बार किसानों की मेहनत पर पानी फिर जाता है. यही वजह है कि जिले के कई किसान खेती या बागवानी जैसे कामों में जोखिम लेने से पीछे हट जाते हैं.
हालांकि इन सबके बीच कुछ किसान ऐसे भी हैं, जो नई सोच के साथ बागवानी की ओर कदम बढ़ा रहे हैं और खासतौर पर आम की खेती से अच्छी आमदनी कमाने की कोशिश कर रहे हैं. इन दिनों आम के बाग लगाने वाले किसानों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि पेड़ों में बौर आते ही उनमें कीड़ों का प्रकोप दिखाई देने लगा है. यदि समय रहते इस पर छिड़काव न किया गया, तो यह समस्या आम की फसल को काफी नुकसान पहुंचा सकती है.
बौर में लगते हैं कीड़े
बता दें कि गर्मी का मौसम शुरू हो चुका है और लगभग एक महीने बाद बाजारों में आम की आवक भी शुरू हो जाएगी. ऐसे में आम की बागवानी करने वाले किसानों के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इसी समय आम के पेड़ों में बौर यानी मंजरियां निकलती हैं और इन्हीं पर कीट और फफूंदजनित रोगों का सबसे ज्यादा खतरा रहता है.
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यदि बौर में कीड़े लग जाते हैं, तो इससे आम के फल की गुणवत्ता और आकार दोनों प्रभावित होते हैं. कई बार फल छोटे रह जाते हैं या समय से पहले गिर जाते हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है.
इस संबंध में जानकारी देते हुए राजकुमार उप कृषि निदेशक, चित्रकूट ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि जैसे ही आम के पेड़ों में बौर आना शुरू होता है, उसी समय से कीटों और फफूंद जनित रोगों का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए किसानों को समय रहते दवा का छिड़काव करना बेहद जरूरी है.
उन्होंने बताया कि किसान यूडोक्लोरिपिड दवा को 2 ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से घोल बनाकर छिड़काव कर सकते हैं. इसके साथ ही कार्बेन्डाजिम दवा को भी 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर पेड़ों पर छिड़काव करना लाभकारी रहेगा. पहला छिड़काव अभी करना चाहिए और दूसरा छिड़काव लगभग 10 दिन बाद दोबारा करना चाहिए.
नहीं पड़ेगा फफूंदजनित बीमारी का असर
इससे आम की मंजरियों पर किसी भी प्रकार की फफूंदजनित बीमारी का असर नहीं पड़ेगा.इसके अलावा कृषि विभाग ने किसानों को AlphNaa दवा के इस्तेमाल की भी सलाह दी है.इस दवा को 15 लीटर पानी में लगभग 4.5 मिलीलीटर मिलाकर बौर के समय छिड़काव किया जा सकता है,इससे मंजरियों की सुरक्षा होती है और फल गिरने की समस्या भी काफी हद तक कम हो जाती है
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आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.
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