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होमताजा खबरकृषिकिसान इस तरीके से करें लौकी खेती, बंपर होगी पैदावार, लाखों में होगी कमाई

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Agriculture News: किसान यदि वैज्ञानिक तरीके से लौकी की खेती करें तो कम लागत में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. कृषि वैज्ञानिक डॉ. दीपक मेहंदी रत्ता के अनुसार हल्की दोमट मिट्टी में उन्नत बीजों की बुवाई कर बेहतर उत्पादन लिया जा सकता है. प्रति हेक्टेयर 4–5 किलो बीज पर्याप्त होता है, जबकि कतार दूरी 250 सेमी और पौधे की दूरी 75–100 सेमी रखनी चाहिए. सही जल निकासी और मचान विधि से एक हेक्टेयर में 25–30 टन तक उत्पादन संभव है, जिससे किसान 1–2 लाख रुपये तक की कमाई कर सकते हैं.

मुरादाबाद: मुरादाबाद के किसान यदि वैज्ञानिक तरीके से लौकी की खेती करें तो कम लागत में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार हल्की दोमट मिट्टी में उन्नत किस्म के बीजों की बुवाई करके किसान बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं. करीब 15 से 20 हजार रुपये की लागत में की जाने वाली यह खेती किसानों को अच्छी आमदनी दे सकती है. सही जल निकासी और मचान विधि का उपयोग करने पर प्रति एकड़ 70 से 90 क्विंटल तक पैदावार मिल सकती है, जिससे एक लाख रुपये से अधिक का शुद्ध मुनाफा कमाया जा सकता है.

इतने बीज की होती है आवश्यकता
मुरादाबाद के कृषि वैज्ञानिक डॉ. दीपक मेहंदी रत्ता के अनुसार लौकी की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर 4 से 5 किलो बीज की आवश्यकता होती है. बीज बोते समय कतार से कतार की दूरी लगभग 250 सेंटीमीटर रखी जाती है, जबकि पौधे से पौधे के बीच 75 से 100 सेंटीमीटर की दूरी रखना जरूरी होता है. इन वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने से पौधों को पर्याप्त जगह मिलती है और उनकी बढ़वार अच्छी होती है.

उन्होंने बताया कि यदि किसान इन बातों का ध्यान रखते हुए खेती करें तो एक हेक्टेयर क्षेत्र में 25 से 30 टन तक लौकी का उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है. बाजार में लौकी की मांग हमेशा बनी रहती है, इसलिए इसकी बिक्री भी आसानी से हो जाती है. ऐसे में किसान एक हेक्टेयर में करीब एक से दो लाख रुपये तक की कमाई कर सकते हैं.

मार्च के बाद कर सकते हैं खेती
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार लौकी की खेती के लिए हल्की दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है. किसान इसकी बुवाई मार्च महीने के बाद या फिर जून-जुलाई में कर सकते हैं. यदि पौध पहले से तैयार हो तो इस समय रोपाई करना फायदेमंद होता है.

इसके साथ ही खेत में जल निकासी की उचित व्यवस्था होना भी बेहद जरूरी है, क्योंकि पानी भराव होने से फसल को नुकसान हो सकता है. मचान विधि से लौकी की खेती करने पर बेलों को सहारा मिलता है और फल जमीन से ऊपर रहते हैं, जिससे फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है और पैदावार भी अधिक मिलती है.

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसान आधुनिक तकनीक और उन्नत बीजों का उपयोग करें तो लौकी की खेती उनकी आय बढ़ाने का एक अच्छा विकल्प साबित हो सकती है.

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Lalit Bhatt

पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 में प्रिंट मीडिया से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों म…और पढ़ें

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