हैदराबाद के पत्थर गट्टी इलाके की 116 वर्ष पुरानी पत्थर की इमारतें आज भी अपनी मजबूती के लिए मिसाल मानी जाती हैं. 1908 में मूसी नदी की विनाशकारी बाढ़ के दौरान जब हजारों घर ढह गए, तब ये संरचनाएं अडिग रहीं. इन इमारतों में सीमेंट की जगह चूना, गुड़, अंडे की सफेदी, बेल का गूदा और उड़द की दाल से बने पारंपरिक लेप का उपयोग किया गया था, जो समय के साथ और कठोर होता गया. चारमीनार क्षेत्र की ये ऐतिहासिक मेहराबें आज भी प्राचीन भारतीय इंजीनियरिंग कौशल का जीवंत प्रमाण हैं.
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