जिला आबकारी अधिकारी सुबोध कुमार श्रीवास्तव की सख्त रणनीति से माफियाओं में हड़कंप
-छापेमारी, चौकसी और पारदर्शिता से बढ़ा राजस्व, व्यवस्था बनी मिसाल
-दिन-रात मुस्तैद आबकारी टीम, सीमाओं से लेकर दुकानों तक कड़ी निगरानी
उदय भूमि संवाददाता
गौतमबुद्ध नगर। होली पर्व को लेकर जहां एक ओर बाजारों में रौनक और उत्साह का माहौल है, वहीं दूसरी ओर हर वर्ष की तरह इस बार भी शराब माफिया सक्रिय होने की फिराक में थे। त्योहारों, चुनावी मौसम या शादी-विवाह के सीजन में अवैध शराब का कारोबार बढ़ाने की कोशिशें आम बात रही हैं, लेकिन इस बार जनपद गौतमबुद्ध नगर में उनकी एक नहीं चली। बड़े शराब माफिया हों या छोटे तस्कर, सभी की गतिविधियों पर जिला आबकारी विभाग की कड़ी नजर रही और नतीजा यह रहा कि अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश बना रहा। इस सख्ती के पीछे जिला आबकारी अधिकारी सुबोध कुमार श्रीवास्तव की स्पष्ट नीति, रणनीतिक सोच और निरंतर निगरानी को प्रमुख कारण माना जा रहा है। पदभार संभालने के बाद से ही उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया था कि जनपद में आबकारी नियमों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होगा। उनकी कार्यशैली का असर दो स्तरों पर साफ दिखाई दे रहा है-एक ओर जहां अवैध शराब के कारोबार पर प्रभावी रोक लगी है, वहीं दूसरी ओर विभागीय राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
गौतमबुद्ध नगर, जो कभी हरियाणा और दिल्ली से आने वाली अवैध शराब के लिए आसान प्रवेश द्वार माना जाता था, अब तस्करों के लिए जोखिम भरा इलाका बन चुका है। सीमावर्ती क्षेत्रों में लगातार निगरानी, संदिग्ध वाहनों की जांच और नियमित छापेमारी के चलते अवैध शराब की सप्लाई चेन को काफी हद तक तोड़ दिया गया है। त्योहार के मद्देनजर विशेष अभियान चलाकर गोदामों, दुकानों और संभावित ठिकानों पर दबिश दी गई, जिससे माफियाओं के मंसूबों पर पानी फिर गया। जिला आबकारी अधिकारी की कार्यशैली की खास बात यह है कि वे केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहते, बल्कि स्वयं फील्ड में उतरकर निरीक्षण करते हैं। ऑकेजनल बार लाइसेंस से लेकर लाइसेंसी दुकानों की बिक्री तक, हर पहलू की बारीकी से समीक्षा की जाती है। दुकानों पर आकस्मिक निरीक्षण के दौरान न केवल स्टॉक और बिलिंग की जांच की जाती है, बल्कि ग्राहकों से भी बातचीत कर पारदर्शिता की पुष्टि की जाती है। इस पहल ने विभाग की साख को मजबूत किया है और शराब विक्रेताओं में भी जवाबदेही की भावना बढ़ी है।
उनकी रणनीति का दूसरा मजबूत स्तंभ टीमवर्क है। आबकारी निरीक्षक आशीष पाण्डेय, अखिलेश बिहारी वर्मा, सचिन त्रिपाठी, डॉ. शिखा ठाकुर, अभिनव शाही, नामवर सिंह और संजय चन्द्र की टीमें लगातार सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। ये टीमें दुकानों के खुलने से पहले और बंद होने के बाद भी अपने-अपने क्षेत्रों में निगरानी करती हैं। रात में गश्त, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर और सूचना तंत्र को मजबूत रखना इनकी प्राथमिकता में शामिल है। होली जैसे संवेदनशील पर्व पर विभाग ने विशेष चौकसी बरती। अवैध शराब की संभावित खेप को रोकने के लिए सीमाओं पर चेकिंग बढ़ाई गई। साथ ही, लाइसेंसी दुकानों को भी स्पष्ट निर्देश दिए गए कि किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। परिणामस्वरूप, इस बार त्योहार के दौरान अवैध शराब की कोई बड़ी बरामदगी या दुर्घटना सामने नहीं आई, जिसे विभाग अपनी सतर्कता का सकारात्मक परिणाम मान रहा है।
राजस्व वृद्धि भी इस सख्ती का एक महत्वपूर्ण पहलू है। जहां पहले अवैध बिक्री के कारण सरकारी राजस्व को नुकसान होता था, वहीं अब वैध बिक्री में पारदर्शिता आने से आय में उछाल देखा गया है। इससे न केवल विभाग की छवि सुधरी है, बल्कि शासन की मंशा के अनुरूप राजस्व संग्रह भी सुनिश्चित हुआ है। किसी भी जिले में अवैध शराब पर अंकुश तभी संभव है, जब नेतृत्व सख्त और नीतियां स्पष्ट हों। गौतमबुद्ध नगर में यह मॉडल सफल होता दिखाई दे रहा है। जिला आबकारी अधिकारी सुबोध कुमार श्रीवास्तव की सक्रियता, सतत निगरानी और टीम की समन्वित कार्रवाई ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया है कि नियमों से समझौता नहीं होगा। त्योहारों के इस मौसम में जहां अन्य जिलों में अवैध शराब की खबरें सुर्खियां बनती हैं, वहीं गौतमबुद्ध नगर में सख्त निगरानी और प्रभावी रणनीति के चलते माफियाओं की राह मुश्किल बनी हुई है। आने वाले समय में भी यदि यही सख्ती और पारदर्शिता बरकरार रहती है, तो जनपद अवैध शराब मुक्त जिले के रूप में एक उदाहरण बन सकता है।
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