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आजादी के इतने सालों बाद भी इस गांव में बिजली नहीं पहुंची है. यह गांव पीलीभीत टाइगर रिजर्व की बाराही रेंज के जंगलों से महज 20 मीटर की दूरी पर स्थित है. हालांकि कुछ समाजसेवी संस्थाओं ने हाल ही में यहां कुछ सोलर लाइटें लगवाई हैं, लेकिन वे पूरे गांव की जरूरत के लिए नाकाफी हैं. गांव के एक बुजुर्ग ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि उनकी पूरी उम्र गुजर गई, लेकिन उन्होंने आज तक बिजली से चलने वाले उपकरणों का सुख नहीं देखा.

पीलीभीतः पीलीभीत जिले से एक राहत भरी खबर आई है. सालों से अंधेरे में जी रहे 117 गांवों के लिए अब रोशनी की नई उम्मीद जगी है. पावर कॉरपोरेशन के एक सर्वे में यह साफ हुआ है कि ये गांव अब तक बिजली की मुख्य लाइन से पूरी तरह कटे हुए हैं. यहां रहने वाले लोग आज भी पुराने समय की तरह लालटेन और ढिबरी के सहारे अपना गुजारा करने को मजबूर हैं. सर्वे के अनुसार, पीलीभीत के 59, बीसलपुर के 38 और पूरनपुर के 20 गांव ऐसे हैं जहां अब तक बिजली का नामोनिशान नहीं है.

1947 में देश हुआ आजाद, लेकिन इस गांव के लोगों ने अंधेरे में गुजारे 78 साल

लोकल 18 की टीम जब इन 117 गांवों में से एक सेल्हा ग्राम पंचायत पहुंची, तो वहां के हालात काफी अलग थे. आजादी के इतने सालों बाद भी इस गांव में बिजली नहीं पहुंची है. यह गांव पीलीभीत टाइगर रिजर्व की बाराही रेंज के जंगलों से महज 20 मीटर की दूरी पर स्थित है. हालांकि कुछ समाजसेवी संस्थाओं ने हाल ही में यहां कुछ सोलर लाइटें लगवाई हैं, लेकिन वे पूरे गांव की जरूरत के लिए नाकाफी हैं. गांव के एक बुजुर्ग ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि उनकी पूरी उम्र गुजर गई, लेकिन उन्होंने आज तक बिजली से चलने वाले उपकरणों का सुख नहीं देखा.

मोबाइल चार्ज करने से लेकर बच्चों की पढ़ाई तक की समस्या

वहीं, गांव के युवाओं का कहना है कि बिजली न होने से रोजमर्रा के काम ठप रहते हैं. अगर मोबाइल भी चार्ज करना हो, तो उन्हें कई किलोमीटर दूर दूसरे गांव जाना पड़ता है. गांव वालों की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं है कि वे खुद का सोलर सिस्टम लगवा सकें. उन्हें उम्मीद है कि अगर सरकार बिजली पहुंचाती है, तो बच्चों की पढ़ाई से लेकर बुजुर्गों तक, सभी का जीवन आसान हो जाएगा. प्रशासन की पहल के बाद अब तक 713 ग्रामीणों ने कनेक्शन के लिए आवेदन किया है. विभाग की योजना है कि पहले चरण में इन इलाकों में खंभे और ट्रांसफार्मर लगाकर जल्द से जल्द बिजली सप्लाई शुरू की जाए.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

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