-10.30 लाख रुपये और क्रेटा कार बरामद, बाकी रकम की तलाश जारी
-एडीसीपी/एसीपी मसूरी लिपि नगायच की मॉनिटरिंग में 4 टीमों ने सुलझाया हाई-प्रोफाइल केस
– सीसीटीवी, सर्विलांस और मैनुअल इनपुट से खुली फर्जी क्राइम ब्रांच की साजिश
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। जमीन का एग्रीमेंट कराने के बहाने 35 लाख रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए स्वाट टीम ग्रामीण जोन और थाना मुरादनगर पुलिस ने दो शातिर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों के कब्जे से ठगी की रकम में से 10 लाख 30 हजार रुपये तथा घटना में प्रयुक्त एक क्रेटा कार बरामद की गई है।
एडीसीपी/एसीपी मसूरी लिपि नगायच ने बताया घटना 21 फरवरी की है, जब आरोपियों ने खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर 35 लाख रुपये से भरा बैग ठग लिया था। वादी को तहसील मोदीनगर में जमीन का एग्रीमेंट कराने के नाम पर बुलाया गया था। रास्ते में मुख्य आरोपी फुरकान ने पीडि़त को अपनी क्रेटा कार में बैठाया और रुपये का बैग भी गाड़ी में रखवा लिया। इसी दौरान काली स्कॉर्पियो में सवार अन्य आरोपी पहुंचे और खुद को क्राइम ब्रांच बताते हुए पीडि़त को जबरन दूसरी गाड़ी में बैठाकर दुहाई की ओर ले गए और रास्ते में उतारकर फरार हो गए। पीडि़त कि तहरीर के आधार पर थाना मुरादनगर में बीएनएस की धारा 318(4) के तहत मुकदमा दर्ज कर चार पुलिस टीमों का गठन किया गया।
एसीपी लिपि नगायच ने पूरे मामले की खुद निगरानी की और तकनीकी साक्ष्यों के साथ मैनुअल इनपुट, सीसीटीवी फुटेज व सर्विलांस की मदद से आरोपियों तक पहुंच बनाई। रविवार को पुलिस ने फुरकान (निवासी बरेली) और विनोद चौहान (निवासी नॉर्थ ईस्ट दिल्ली) को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में दोनों ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर ठगी की साजिश रचने की बात स्वीकार की। खुलासे में सामने आया कि फुरकान ने 35 लाख रुपये का बैग अपनी कार में रखवाकर साथी विनोद व रामविलास को लोकेशन भेजी थी। बाद में फर्जी क्राइम ब्रांच टीम बनाकर पीडि़त को अलग कर दिया गया और रकम हड़प ली गई। पुलिस ने आरोपियों के पास से नगद 10.30 लाख रुपये, मोबाइल फोन तथा वारदात में प्रयुक्त क्रेटा कार बरामद की है। शेष आरोपियों की तलाश में दबिश दी जा रही है।
एडीसीपी/एसीपी लिपि नगायच ने बताया कि इस तरह की सुनियोजित ठगी में शामिल गिरोहों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि जनता के विश्वास के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस की टीमें तकनीकी और मानवीय संसाधनों का बेहतर समन्वय कर ऐसे अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगा रही हैं। उनकी सक्रिय नेतृत्व क्षमता और केस मॉनिटरिंग की कार्यशैली की सराहना पुलिस महकमे में भी की जा रही है। सीमित समय में तकनीकी साक्ष्यों को जोड़ते हुए आरोपियों तक पहुंच बनाना पुलिस की पेशेवर दक्षता का उदाहरण माना जा रहा है। फिलहाल पुलिस अन्य फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है और बरामद रकम के अतिरिक्त शेष धनराशि की रिकवरी के प्रयास जारी हैं। यह कार्रवाई अपराधियों के लिए स्पष्ट संदेश है कि कानून से बच निकलना अब आसान नहीं है।
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