राउज एवेन्यू कोर्ट ने कथित आबकारी नीति घोटाले से जुड़े मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत अन्य को आरोपमुक्त करते हुए एजेंसियों के बर्ताव पर सवाल उठाए। अदालत ने अपने आदेश में गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि न्यायिक कार्य किसी सुविधाजनक परिणाम को सुनिश्चित करना या किसी प्रमुख कथा का समर्थन करना नहीं है, बल्कि कानून के शासन को बनाए रखना है। जज ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत लंबी या अनिश्चितकालीन हिरासत की प्रक्रिया को दंडात्मक प्रक्रिया में बदलने का जोखिम बताया और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को खतरे में डालने वाली प्रक्रियाओं पर गंभीर चिंता जताई।
आदेश में कहा गया कि कई मामलों में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) या सीबीआई जांच एजेंसियां पूर्व अपराध की जांच पूरी होने से पहले ही पीएमएलए के तहत कार्रवाई शुरू कर देती हैं, जिससे आरोपी लंबे समय तक हिरासत में रहते हैं। जज ने कहा कि व्यक्ति की स्वतंत्रता पर आधारित एक अनिश्चित और परीक्षणाधीन आरोप पर लंबी हिरासत का जोखिम है। यह जांच या नियामक प्रक्रिया के बजाय दंडात्मक प्रक्रिया में बदल जाए।
कहीं भी अन्याय हर जगह न्याय के लिए है खतरा
अदालत ने मार्टिन लूथर किंग जूनियर का उदाहरण देते हुए कहा, कहीं भी अन्याय हर जगह न्याय के लिए खतरा है और कानूनी सिद्धांत फियात जस्टिशिया रुअत कोएलम (न्याय हो, चाहे आकाश गिर जाए) का जिक्र किया। हालांकि, सीबीआई ने इस आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
अदालत ने कहा केजरीवाल और सिसोदिया के खिलाफ कोई क्रिमिनल इंटेट नहीं
दिल्ली एक्साइज पॉलिसी मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। स्पेशल जज जितेंद्र सिंह ने अपने आदेश में कहा कि सीबीआई ने सिसोदिया और केजरीवाल के खिलाफ कोई प्राइमा फेसी केस नहीं बनाया। अदालत ने पाया कि रिश्वत की मांग या स्वीकृति का सबूत नहीं है, कोई वित्तीय लेन-देन का ट्रेल नहीं मिला। इस नीति के फैसले सामूहिक रूप से लिए गए थे, जिसमें कोई व्यक्तिगत अपराधी इरादा नहीं दिखता। केजरीवाल हो या सिसोदिया दोनों में कोई क्रिमिनल इंटेंट नहीं पाया गया।
मनीष सिसोदिया, जो दिल्ली सरकार में उप-मुख्यमंत्री और एक्साइज मंत्री थे, को सीबीआई ने मुख्य साजिशकर्ता बताया था। आरोप था कि उन्होंने 2021-22 की एक्साइज पॉलिसी में बदलाव कर निजी शराब कारोबारियों को फायदा पहुंचाया, जिससे करोड़ों की रिश्वत ली गई। सीबीआई की मुख्य चार्जशीट (24 नवंबर 2022, फाइल 25 नवंबर 2022) और चार पूरक चार्जशीटों में दावा किया गया कि नीति को साउथ ग्रुप के फायदे के लिए डिजाइन किया गया। इसमें थोक मार्जिन 12% तय किया गया और रिटेल जोन आवंटन में अनियमितता बरती गई। अदालत ने इन आरोपों को अनुमान-आधारित और कॉन्जेक्चर बताया, न कि ठोस सबूतों पर आधारित। जज ने कहा कि नीति के फैसले कई अधिकारियों और हितधारकों से जुड़े थे और सिसोदिया ने एकतरफा कोई फैसला नहीं लिया। कोई रिकवरी नहीं हुई, कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष फाइनेंशियल लिंक नहीं मिला।
अदालत ने कहा सीबीआई की जांच अंतर्विरोध से भरी
सिसोदिया ने इस मामले में करीब 530 दिन जेल में बिताए। अदालत ने कहा कि लंबी हिरासत के बावजूद जांच एजेंसी आरोप साबित करने में पूरी तरह विफल रही। नीति को मोनोपॉली और कार्टेल रोकने के लिए बनाया गया था, जिसमें मैन्युफैक्चरर, थोक (L-1) और रिटेल जोन अलग किए गए थे। टेंडर प्रक्रिया में ई-टेंडर, भागीदारी शुल्क और ईएमडी थे, और कोई प्राइमा फेसी उल्लंघन नहीं दिखा। अदालत ने सीबीआई की थ्योरी को आंतरिक विरोधाभासों से भरी बताया, जो जांच की जड़ पर सवाल उठाती है।
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