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केरल हाईकोर्ट ने ‘द केरल स्टोरी 2’ की रिलीज पर लगा 15 दिनों का ‘स्टे’ हटाकर इसकी स्क्रीनिंग का रास्ता साफ कर दिया है. कोर्ट ने माना कि सेंसर बोर्ड के सर्टिफिकेट के बाद केवल कुछ क्लिप्स के आधार पर फिल्म को रोकना गलत है. फिल्ममेकर विपुल अमृतलाल शाह ने कोर्ट का आभार जताते हुए साफ किया कि फिल्म केरल या वहां के लोगों के खिलाफ नहीं, बल्कि केवल अपराधियों और गलत गतिविधियों को उजागर करने के लिए बनाई गई है. उन्होंने इसे सच्चाई की जीत बताते हुए दर्शकों से बिना किसी पूर्वग्रह के फिल्म देखने की अपील की है.

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द केरल स्टोरी 2: गोज बियॉन्ड को मिली राहत.

नई दिल्ली: ‘द केरल स्टोरी 2’ को लेकर चल रही कानूनी खींचतान अब खत्म हो गई है और फिल्म की रिलीज का रास्ता बिल्कुल साफ है. केरल हाईकोर्ट ने फिल्म की रिलीज पर लगे 15 दिनों के स्टे को हटाकर निर्माता विपुल अमृतलाल शाह और उनकी टीम को बड़ी राहत दी है. दरअसल, पहले एक सिंगल जज बेंच ने सिर्फ कुछ क्लिप्स देखकर फिल्म की स्क्रीनिंग रोकने का आदेश दिया था, जिसे अब डिवीजन बेंच ने पलट दिया है. कोर्ट का मानना है कि जब सेंसर बोर्ड (CBFC) ने फिल्म को सर्टिफिकेट दे दिया है, तो इसका मतलब है कि उन्होंने सभी नियमों और सार्वजनिक व्यवस्था का बारीकी से ध्यान रखा होगा. कोर्ट ने साफ कहा कि केवल कुछ टुकड़ों को देखकर पूरी फिल्म के बारे में राय बनाना सही नहीं है और अब दर्शक सिनेमाघरों में जाकर फिल्म देख सकते हैं.

केरल के अपमान पर चुप्पी तोड़ी
फिल्म की रिलीज का रास्ता साफ होते ही निर्माता विपुल शाह ने अपनी चुप्पी तोड़ी और उन आरोपों का जवाब दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि फिल्म केरल की इमेज खराब कर रही है. उन्होंने मीडिया से बात करते हुए साफ किया कि न तो वे और न ही उनकी टीम केरल या वहां के लोगों के खिलाफ है. उन्होंने केरल को एक बेहद खूबसूरत और ईश्वर का अपना देश बताया. विपुल ने जोर देकर कहा कि फिल्म का मकसद वहां के लोगों को नीचा दिखाना नहीं, बल्कि उन अपराधियों और गलत गतिविधियों को उजागर करना है जो उस राज्य के साथ-साथ राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे अन्य हिस्सों में भी जड़ें जमा रहे हैं.

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