Image Slider

असमय दस्तक और असमय विदाई के संकेतों के बीच भारत में सर्दी का मिजाज बदलता नजर आ रहा है। जनवरी 2026 में जहां देशभर में शीतलहर और कोल्ड डे के 24 दिन दर्ज किए गए, वहीं फरवरी पूरी तरह सूनी रही। पिछले पांच वर्षों में यह पहला मौका है जब फरवरी में एक भी दिन शीतलहर दर्ज नहीं हुई। आंकड़े बताते हैं कि सर्दी का समय और उसका भूगोल दोनों अब पुराने ढांचे से बाहर निकलते दिख रहे हैं।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार 28 फरवरी को सर्दी का आधिकारिक समापन माना जाता है। जनवरी 2026 में देश के विभिन्न हिस्सों में शीतलहर और कोल्ड डे की कुल 24 घटनाएं दर्ज की गईं, लेकिन 27 जनवरी के बाद से देश में ऐसी कोई स्थिति दर्ज नहीं हुई। फरवरी 2026 पूरी तरह शीतलहर से मुक्त रही। आईएमडी ने पहले ही अनुमान जताया था कि फरवरी में अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से 2 से 4 डिग्री सेल्सियस अधिक रह सकते हैं, जिससे सर्दी की वापसी की संभावना कम थी। डाउन टू अर्थ और सीएसई डाटा सेंटर द्वारा तैयार इंडियाज एटलस ऑन वेदर डिजास्टर्स के विश्लेषण के मुताबिक 2022 से 2025 तक हर वर्ष फरवरी में शीतलहर दर्ज हुई थी। 2022 में 6 दिन, 2023 में 1 दिन, 2024 में 7 दिन और 2025 में 5 दिन शीतलहर रही। इसके विपरीत 2026 में फरवरी पूरी तरह खाली रही, जो हाल के वर्षों के पैटर्न से अलग रुझान दिखाती है।

सर्दी कम तो रबी फसलों को होता है नुकसान

अमेरिकी एजेंसी एनओएए के ताजा अपडेट के अनुसार फिलहाल प्रशांत महासागर में तटस्थ स्थिति है, लेकिन अगस्त तक अल नीनो बनने की संभावना जताई गई है। विशेषज्ञों के अनुसार ला नीना की स्थिति दक्षिण, मध्य और पूर्व भारत में शीतलहर को बढ़ावा देती है, जबकि अल नीनो सर्दी को छोटा कर तेज और गर्म गर्मी की शुरुआत का कारण बन सकता है। यदि सर्दी के दिनों में कमी आती है तो इसका सीधा असर रबी फसलों, विशेषकर गेहूं पर पड़ सकता है।

क्या है शीतलहर और कोल्ड डे

जब अधिकतम तापमान सामान्य से 4.5 से 6.4 डिग्री कम हो तो उसे कोल्ड डे और 6.4 डिग्री से अधिक गिरावट पर सीवियर कोल्ड डे माना जाता है। इसी प्रकार न्यूनतम तापमान में इतनी गिरावट होने पर शीतलहर और अधिक गिरावट पर गंभीर शीतलहर घोषित की जाती है।

अस्थायी उतार-चढ़ाव या स्थायी बदलाव

2025 की असामान्य नवंबर ठंड और 2026 की पूरी तरह सूनी फरवरी यह संकेत देती है कि भारत में सर्दियों का स्वरूप बदल रहा है। कभी शीतलहर जल्दी आ रही है, कभी जल्दी विदा ले रही है। कभी उसका दायरा फैल रहा है तो कभी सिमट रहा है। आंकड़े यह तो स्पष्ट करते हैं कि पैटर्न स्थिर नहीं है, लेकिन यह बदलाव अस्थायी है या दीर्घकालिक, इसका उत्तर अभी बाकी है। इतना जरूर है कि सर्दी की यह बदलती तस्वीर केवल तापमान की कहानी नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन, कृषि और आने वाले वर्षों की तैयारी से जुड़ा बड़ा संकेत है।

———-

🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।

 

Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||