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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) छात्र संघ का कुलगुरु के यूजीसी संबंधी बयान के खिलाफ और पदाधिकारियों के निष्कासन के विरोध में आंदोलन जारी है। मंगलवार को छात्र संघ के नेतृत्व में स्कूल ऑफ सोशल साइंस और स्कूल ऑफ लैंग्वेज में तालाबंदी की गई। इस बीच स्कूल में फंसे कुछ प्रोफेसर को बाहर निकालने के लिए पुलिस भी  बुलानी पड़ी। 

इसको लेकर सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल है। वीडियो में छात्र पुलिस को बुलाने और दमकल कर्मियों की मौजूदगी को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं। स्कूल के गेट पर सुरक्षाकर्मी और छात्र जुटे हैं। छात्र बंधक बनाने की बात को लेकर प्रोफेसर से सवाल कर रहे कि झूठ बोलकर पुलिस को क्यों बुलाया गया। वहीं जेएनयू छात्र संघ के महासचिव सुनील यादव ने कहा कि कुलगुरु ने यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन को अनावश्यक बताने और एक वर्ग विशेष को स्थायी रूप से पीड़ित बने रहने या पीड़ित होने का दावा करने से प्रगति नहीं होने की बात की थी। इसे लेकर यह विरोध किया जा रहा है। कुलगुरु के इस्तीफा नहीं देने तक यह आंदोलन जारी रहेगा। 

26 फरवरी को यूजीसी रेगुलेशन 2026 को लागू करने सहित कई दूसरी मांगों को लेकर जेएनयू के साबरमती टी प्वाइंट से लेकर शिक्षा मंत्रालय तक मार्च निकाला जाएगा। जेएनयू में स्कूल ऑफ सोशल साइंस की तालाबंदी को लेकर रविवार देर रात को एबीवीपी और वामपंथी छात्र संगठनों के बीच जमकर झड़प हुई थी। इस मामले में पुलिस ने केस किया है। विश्वविद्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि पुलिस को एक प्रोफेसर द्वारा स्कूल में फंसे होने के संबंध में कॉल की गई थी। बाहर से किसी को अंदर आने नहीं दिया जा रहा था। जिसके चलते पुलिस के साथ दमकल कर्मी भी पहुंचे थे।

जामिया ने वायरल निकाह को बताया गलत

जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने रमजान के महीने में लड़का-लड़की (युगल) के साथ खड़े होने पर निकाह कराने संबंधी सोशल मीडिया पर वायरल फर्जी अधिसूचना के संबंध में दिल्ली पुलिस की साइबर सेल में जामिया प्रशासन ने शिकायत दी है। इस संबंध में जामिया के रजिस्ट्रार कार्यालय ने सर्कुलर जारी किया है। सर्कुलर के अनुसार रमजान के पवित्र महीने के दौरान लड़के-लड़की के एक साथ खड़े पाए जाने पर निकाह कराने का निर्देश पूरी तरह से फर्जी है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा ऐसी कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई है। सभी से अनुरोध है कि इसे गंभीरता से न लें। इसका उद्देश्य विश्वविद्यालय की छवि को धूमिल करना है। विश्वविद्यालय प्रशासन ऐसी अधिसूचना की निंदा करता है। विश्वविद्यालय ने दिल्ली पुलिस के साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई है। 

डीयू के ग्वायर हॉल में झड़प और हंगामा, जांच के लिए कमेटी गठित

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में विवाद अभी थमा ही था कि दिल्ली विश्वविद्यालय के ग्वायर हॉल में हंगामे का मामला सामने आया है। नॉर्थ कैंपस स्थित ग्वायर हाल हॉस्टल में डूसू अध्यक्ष आर्यनमान के समर्थकों पर मेस में हंगामा और कर्मचारियों से हाथापाई के आरोप लगे हैं। इस दौरान डूसू अध्यक्ष की सिक्योरिटी में शामिल एक व्यक्ति ने बंदूक दिखाई और छात्रों को धमकाया। इस मामले में ग्वायर हाल रेजिडेंट ने शिकायत डीयू प्रॉक्टर कार्यालय को दी। जिसके बाद मंगलवार को प्रॉक्टर कार्यालय ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया है।

ग्वायर हॉल रेजिडेंट ने आरोप लगाया कि सोमवार रात मेस कूपन को लेकर डूूसू अध्यक्ष आर्यन मान और उनके सिक्योरिटी से जुड़े लोगों ने हंगामा किया। बताया जा रहा कि डूसू अध्यक्ष के साथ जुड़े कुछ लोग हॉस्टल की टोकन बुक दिखाकर मेस से खाना लेने पहुंचे। जब मेस कर्मियों ने बिना अनुमति भोजन देने से इंकार किया तो विवाद शुरू हो गया। विरोध पर झड़प और हंगामा हुआ। आरोप है कि विरोध करने पर मेस स्टाफ को अभद्र भाषा भी बोली गई। डीयू प्रॉक्टर कार्यालय के दखल दिया और मामला सुलझा लिया गया। कार्यालय के अधिकारियों के अनुसार छोटी सी बहस थी जो बढ़ गई। बंदूक दिखाने के आरोप पर कहा कि उन्हें ऐसी किसी घटना की जानकारी नहीं है और कमिटी शिकायत की जांच करेगी। इस मामले को लेकर डूसू अध्यक्ष से बात करने का प्रयास किया गया लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।

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