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रांची. दो अलग घटनाएं और दो अलग नतीजे. एक में चमत्कार था तो दूसरे में मातम. पहले बात चतरा की घटना की करते हैं. 23 फरवरी को झारखंड के चतरा जिले के सिमरिया प्रखंड के कासीयातु गांव के घने जंगल में जो मंजर दिखा, उसने पूरे राज्य को झकझोर दिया. रांची से दिल्ली जा रही एक एयर एम्बुलेंस अचानक क्रैश हो गई. विमान में सवार मरीज सहित सात लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई. जैसे ही हादसे की खबर फैली, जिला प्रशासन हरकत में आ गया. उपायुक्त और वरीय अधिकारी रात भर घटनास्थल पर डटे रहे. राहत और बचाव दल जब जंगल के भीतर पहुंचे तो विमान का मलबा दूर दूर तक बिखरा था. डॉक्टरों ने जांच के बाद सभी सात लोगों को मृत घोषित कर दिया. शवों को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल चतरा भेजा गया. स्थानीय लोगों के मुताबिक चतरा में इस तरह का विमान हादसा पहली बार हुआ है. गांव में सन्नाटा पसरा है और हर कोई यही पूछ रहा है कि आखिर यह हादसा कैसे हुआ? इसके साथ ही चर्चा 2012 की घटना की भी होने लगी है जब तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा का हेलीकॉप्टर हादसे का शिकार हो गया था.

अधूरा रह गया सफर

एयर एम्बुलेंस सेवा आमतौर पर जीवन बचाने के लिए होती है. गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज के लिए बड़े शहरों तक पहुंचाने का यह जरिया कई बार उम्मीद की आखिरी किरण बनता है. लेकिन इस बार वही विमान सात जिंदगियां लील गया. माना जा रहा है कि मरीज को बेहतर इलाज के लिए दिल्ली ले जाया जा रहा था. पर सफर बीच रास्ते में ही खत्म हो गया. हादसे की वजहों की जांच शुरू हो गई है. मौसम, तकनीकी खराबी या मानवीय चूक, हर पहलू पर पड़ताल की जा रही है. लेकिन, इसी की साथ इस बात की चर्चा होने लगी है जब 2012 में भी एक हादसा हुआ था जिसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा बाल-बाल बचे थे.

2012 की घटना फिर चर्चा में

9 मई 2012… उस दिन झारखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा एक हेलिकॉप्टर हादसे में बाल बाल बचे थे. दोपहर करीब 12.30 बजे रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट रांची (Birsa Munda Airport) पर लैंडिंग के दौरान हेलिकॉप्टर संतुलन खो बैठा था. यह अगुस्ता AW 109 हेलिकॉप्टर था. करीब 20 फीट की ऊंचाई से वह नीचे गिर गया. उस वक्त अर्जुन मुंडा के साथ उनकी पत्नी और अन्य लोग सवार थे. सभी को चोटें आईं, लेकिन किसी की जान नहीं गई. उन्हें रांची के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इस हादसे में अर्जुन मुंडा के बचने की उस घटना को लोगों ने चमत्कार माना था, क्योंकि इतनी ऊंचाई से गिरने के बावजूद सभी सुरक्षित बच गए थे.
9 मई 2012 को झारखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा भी हैलिकॉप्टर लैंडिंग के दौरान एक हादसे में बाल-बाल बच गए थे.

अगुस्ता हेलिकॉप्टर और वह क्षण

उस समय उनके साथ उनकी पत्नी और अन्य लोग भी सवार थे. सभी घायल हुए, लेकिन चमत्कारिक रूप से उनकी जान बच गई. बताया जाता है कि उस दिन अगुस्ता AW 109 हेलिकॉप्टर सरायकेला खरसावां में उतरने वाला था, लेकिन तकनीकी कारणों से उसे रांची लौटना पड़ा. लैंडिंग के दौरान हेलिकॉप्टर एक तरफ झुक गया और नीचे गिर गया. हादसे में अर्जुन मुंडा को कंधे और टखने में चोट आई थी. उन्हें रांची के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उस हादसे में कोई जान नहीं गई थी, लेकिन वह घटना झारखंड की राजनीति और प्रशासन के लिए बड़ा झटका थी. अब जब चतरा की घटना सामने आई है तो कई सवाल खड़े हो रहे हैं.

दो हादसों की अलग तस्वीर

2012 का हादसा डरावना जरूर था, लेकिन उसका अंत राहत भरा था. वहीं चतरा की यह घटना पूरी तरह त्रासदी में बदल गई. एक ओर जहां पहले हादसे में जिंदगी जीत गई थी, वहीं इस बार सात परिवारों की दुनिया उजड़ गई. इन दोनों घटनाओं ने झारखंड में हवाई सुरक्षा को लेकर बहस फिर तेज कर दी है. छोटे विमानों और हेलिकॉप्टर संचालन में सुरक्षा मानकों की समीक्षा की जरूरत महसूस की जा रही है.

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सुरक्षा पर बड़ा सवाल

जानकार मानते हैं कि एयर एम्बुलेंस संचालन बेहद संवेदनशील होता है. मौसम की सटीक जानकारी, तकनीकी जांच और पायलट की तैयारी बेहद अहम होती है. जरा सी चूक भी बड़ी दुर्घटना में बदल सकती है. चतरा का यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि चेतावनी भी है. 2012 में किस्मत ने साथ दिया था. लेकिन इस बार किस्मत साथ नहीं थी. सात जिंदगियां चली गईं और पीछे रह गया है दर्द, सवाल और जवाब का इंतजार.

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