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Agriculture News: बाराबंकी के किसान अब परंपरागत खेती को छोड़कर फूलों की खुशबू से अपनी तकदीर संवार रहे हैं. कभी सब्जियों की खेती करने वाले किसान मंगल मौर्य ने जब गेंदे के फूलों पर दांव लगाया, तो उन्हें उम्मीद से कहीं ज्यादा मुनाफा मिला. मात्र 5 हजार रुपये की मामूली लागत लगाकर वे एक सीजन में अच्छी कमाई कर रहे हैं. आवारा जानवरों के आतंक और बीमारियों के डर से मुक्त यह खेती बाराबंकी के किसानों की पहली पसंद बनती जा रही है.
बाराबंकी: उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में परंपरागत खेती से हटकर अब किसान फूलों की खेती की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं. बाजार में सालभर गेंदा, गुलाब और अन्य सजावटी फूलों की भारी मांग बनी रहती है, जिससे किसानों को स्थायी और बेहतर आय का अवसर मिल रहा है. खासकर शादी-विवाह, धार्मिक कार्यक्रमों और त्योहारों के मौसम में फूलों की खपत कई गुना बढ़ जाती है. यही कारण है कि जिले के प्रगतिशील किसान अब कम लागत और अधिक मुनाफे वाली इस खेती को अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहे हैं.
बाराबंकी के बंकी ब्लॉक क्षेत्र के बडेल गांव के रहने वाले प्रगतिशील किसान मंगल मौर्य ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि वे पिछले 15 सालों से पालक, गोभी, बैंगन और मिर्च जैसी सब्जियों की खेती कर रहे थे, लेकिन पिछले 2-3 सालों से उन्होंने अपना ध्यान फूलों की खेती पर लगाया है. उनका मानना है कि सब्जियों के मुकाबले फूलों में मुनाफा कहीं अधिक है. वर्तमान में वे करीब 2 बीघे जमीन पर गेंदे की खेती कर रहे हैं. जिसमें क़रीब 8 से 10 हज़ार का खर्च आता है.
कम लागत में होगी बंपर कमाई
मंगल मौर्य के अनुसार गेंदे की खेती का सबसे बड़ा फायदा इसकी कम लागत और सुरक्षा है. एक बीघे खेत में गेंदा लगाने का खर्च मात्र 4 से 5 हजार रुपये के आसपास आता है, जबकि एक अच्छी फसल से होने वाला मुनाफा 1 से डेढ़ लाख रुपये तक पहुंच जाता है. गेंदे के फूलों की मांग बाजार में पूरे साल बनी रहती है, इसलिए इसे बेचने में कोई परेशानी नहीं होती. इसके अलावा इस फसल की सबसे खास बात यह है कि इसमें रोगों का प्रकोप बहुत कम होता है और आवारा जानवरों से भी फसल को कोई बड़ा खतरा नहीं रहता है, जिससे देखरेख का खर्च भी कम हो जाता है.
कैसे करें गेंदे की खेती और क्या है आसान तरीका
इस खेती की प्रक्रिया के बारे में जानकारी देते हुए मंगल मौर्य ने बताया कि इसकी शुरुआत खेत की गहरी जुताई से होती है. सबसे पहले जमीन को तैयार कर उसे बराबर किया जाता है और फिर गोबर की खाद के साथ अन्य पोषक तत्वों का छिड़काव किया जाता है. इसके बाद पूरे खेत में छोटी-छोटी मेड़ें बनाई जाती हैं और उन पर गेंदे के छोटे पौधों की रोपाई कर दी जाती है. रोपाई के तुरंत बाद पहली सिंचाई की आवश्यकता होती है और इसके महज 40 से 45 दिनों के भीतर ही फसल में फूल निकलना शुरू हो जाते हैं, जिन्हें तोड़कर किसान प्रतिदिन बाजार में बेच सकते हैं.
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सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें
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