दिल्ली हाईकोर्ट ने 2018 के दुष्कर्म मामले में झारखंड की रहने वाली पीड़िता के खिलाफ ट्रायल कोर्ट द्वारा जारी जमानती वारंट को तत्काल रद्द कर दिया है। न्यायमूर्ति मनोज जैन की एकलपीठ ने पीड़िता को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए गवाही पूरी करने की अनुमति देने को कहा है।
कोर्ट ने साफ निर्देश दिया कि अगर ट्रायल कोर्ट शारीरिक उपस्थिति जरूरी मानता है तो लिखित कारण बताए और राज्य सरकार पीड़िता की दिल्ली यात्रा की पूरी व्यवस्था करे। पीड़िता (याचिकाकर्ता) ने अपनी याचिका में बताया कि 2018 में हुई बलात्कार की घटना के मामले में वह 22 फरवरी 2023 को गवाही दे चुकी है लेकिन बचाव पक्ष की क्रॉस-एक्जामिनेशन पूरी नहीं हो सकी। इसके बाद वह चार बार और अदालत में पेश हुई, फिर भी पूछताछ अधूरी रही।
6 दिसंबर 2024 को तय तारीख पर वह नहीं पहुंच सकी। इसके चलते 13 फरवरी 2025 को ट्रायल कोर्ट ने उनके खिलाफ बेलेबल वारंट जारी कर दिए। पीड़िता झारखंड के एक दूरदराज गांव में रहती है, जो रांची से करीब 300 किलोमीटर दूर है। उनके वकील ने कोर्ट को बताया कि समन उन्हें देर से मिला, दिल्ली आने में काफी समय लगता है और उनके नाबालिग बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी भी उन पर है। गांव से सबसे नजदीकी जिला गोड्डा महज 60 किलोमीटर दूर है, जहां से वे डीएसएलए या कोर्ट कॉम्प्लेक्स से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़ सकती हैं।
न्यायमूर्ति मनोज जैन ने याचिका की तत्काल सुनवाई की अनुमति दी और फैसला सुनाते हुए कहा कि पीड़िता की विशेष स्थिति को ध्यान में रखते हुए ट्रायल कोर्ट को सहानुभूतिपूर्वक विचार करना चाहिए। ट्रायल कोर्ट की अगली सुनवाई 2 मार्च 2026 को होनी है।
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