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ब्रज में होली का खुमार हर दिन बढ़ता जा है। वसंत पंचमी से शुरू हुआ होली उत्सव जो अभी तक मंदिर परिसरों तक सीमित था, 24 फरवरी से गलियों-चौबारों में उतर आएगा। अभी तक मंदिरों में होली के रसिया व धमार गायन हो रहा था, लेकिन मंगलवार को बरसाना में लड्‌डू होली के साथ रंगोत्सव का नया चरण शुरू होगा जब ब्रज के मंदिरों के अंदर से बाहर तक गुलाल उड़ेगा और रंग बरसेगा। वसंत पंचमी से अब तक रोज ठाकुरजी (गर्भगृह में विराजमान विग्रह) के कपोलों पर गुलाल लगाया जा रहा था, लेकिन अब सभी मंदिरों में टेसू के फूलों को उबालकर गीला रंग तैयार हो रहा है, गुलाल के बोरे मंगाए जा रहे हैं। 25 को बरसाना में लट्ठमार होली है, जबकि अगले दिन 26 को नंदगांव में लट्‌ठमार होली होगी। 27 से मथुरा के द्वारकाधीश मंदिर व कृष्ण जन्मस्थान सहित सभी मंदिरों में विराजमान ठाकुरजी के कमर में गुलाल से भरा फेंटा बांध दिया जाएगा जो इस बात का संकेत है कि अब होली जलने तक अनवरत गुलाल व रंग उड़ता रहेगा। गीली होली चार दिन रहेगी सामान्य रूप से गीले रंगों की होली पांच दिन होती है लेकिन इस बार यह चार दिन होगी। 3 मार्च को फाल्गुन पूर्णिमा के दिन चंद्रग्रहण होने से सुबह 9 बजकर 5 मिनट पर सूतक काल की शुरुआत में मंदिरों के पट बंद हो जाएंगे और फिर शाम को चंद्र ग्रहण समाप्त होने के बाद बेहद सीमित अवधि के लिए खुलेंगे। ब्रज में रिवाज है कि ग्रहण शुरू होने के 9 घंटे पहले मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। प्रमुख पड़ाव 24 फरवरी- नंदगांव में फाग आमंत्रण, बरसाना में लड्डू होली 25 फरवरी- बरसाना में लठ्ठमार होली 26 फरवरी- नंदगांव व रावल में लठ्ठमार होली 27 फरवरी- मथुरा के मंदिरों में उत्सव 1 मार्च- गोकुल में छड़ीमार होली 3 मार्च- मथुरा में चतुर्वेदी समाज का डोला 4 मार्च- ब्रज में धुलेंडी 5 मार्च- दाऊजी व जाव का हुरंगा 6 मार्च- बठैन का हुरंगा

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