दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए एमसीडी ने सड़कों को गड्ढा मुक्त बनाने की दिशा में एक नई तकनीक अपनाने का फैसला किया है। एमसीडी अब ऐसी आधुनिक मशीनों का उपयोग करेगी जो कुछ ही मिनटों में सड़क के गड्ढों को भरकर समतल कर देती हैं। विशेष बात यह है कि ये मशीनें बारिश के दौरान भी काम करने में सक्षम हैं।
एमसीडी का मानना है कि सड़कों पर बने गड्ढों के कारण वाहनों की आवाजाही से भारी मात्रा में धूल उड़ती है, जो वायु प्रदूषण को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है। धूल कण (डस्ट पार्टिकल्स) पीएम-10 और पीएम-2.5 स्तर को बढ़ाते हैं, जिससे सांस संबंधी बीमारियों का खतरा भी बढ़ता है।
इस समस्या के मद्देनजर सड़कों को समय रहते दुरुस्त रखने की तैयारी शुरू की। इसी कड़ी में बृहस्पतिवार को सिविक सेंटर के सामने एक विशेष पॉटहोल रिपेयर मशीन का ट्रायल कराया गया। मशीन ने सड़क पर बने गड्ढे को चंद मिनटों में भरकर समतल कर दिया।
एमसीडी अधिकारियों के अनुसार, यह तकनीक पारंपरिक तरीकों की तुलना में तेज, टिकाऊ और अधिक प्रभावी है। इससे यातायात भी लंबे समय तक प्रभावित नहीं होगा और मरम्मत कार्य शीघ्र पूरा किया जा सकेगा। ट्रायल के दौरान स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा भी मौजूद थीं।
वायु प्रदूषण से निपटना एमसीडी की प्राथमिकताओं में शामिल है और सड़क मरम्मत केवल बुनियादी सुविधा नहीं, बल्कि पर्यावरणीय कदम भी है। उन्होंने बताया कि बजट पेश करते समय वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए विभिन्न विभागों का एक ग्रुप ऑफ डिपार्टमेंट गठित करने का निर्णय लिया गया था, ताकि समन्वित रणनीति के तहत ठोस कदम उठाए जा सकें। उधर, एमसीडी ने दावा किया कि यदि यह तकनीक सफल रहती है तो इसे शहर के अन्य इलाकों में भी व्यापक स्तर पर लागू होगा।
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