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08:40 AM, 29-Oct-2026

करवाचौथ पूजन का शुभ मुहूर्त  

ज्योतिषाचार्य वेद प्रकाश प्रचेता ने बताया कि 28 अक्तूबर की रात 1:07 बजे कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि शुरू होगी, जो 29 अक्तूबर की रात 10:07 बजे तक रहेगी। करवाचौथ पर रात आठ बजे चंद्रोदय होगा। इसके बाद महिलाएं चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य देंगी और पति का चेहरा देखकर व्रत का पारण करेंगी।

08:34 AM, 29-Oct-2026

दिल्ली-एनसीआर में कब देखेगा करवाचौथ का चांद

द्रिक पंचांग के अनुसार, करवा चौथ की शाम को नई दिल्ली में चांद के निकलने का समय करीब 8 बजकर 17 मिनट  है। वहीं  नोएडा में  रात 8:16 बजे, गुरुग्राम में रात 8:18 बजे,  गाजियाबाद में रात 8:17 बजे और मेरठ रात 8:07 बजे चांद दिखेगा। 

08:34 AM, 29-Oct-2026

करवा चौथ 2026: पूजा मुहूर्त और व्रत अवधि

करवा चौथ सुहागिनों का सबसे बड़ा पर्व होता है। करवा चौथ की शाम को चांद के निकलने से पहले सुहागिन महिलाएं करवा माता की पूजा और कथा सुनती हैं, फिर चंद्रोदय होने पर चांद के दर्शन और अर्घ्य देकर व्रत पूरा करती हैं। 

करवा चौथ 2026: तिथि और समय

करवा चौथ

तिथि और समय

करवा चौथ की तिथि

गुरुवार, 29 अक्तूबर 2026

चतुर्थी तिथि आरंभ

29 अक्तूबर, सुबह 1:06 बजे

चतुर्थी तिथि समापन

29 अक्तूबर, रात 10:09 बजे

पूजा मुहूर्त

शाम 5:38 बजे से 6:56 बजे तक

व्रत आरंभ

सुबह 6:31 बजे से

चंद्रोदय का समय

रात करीब 8:17 बजे

 

08:25 AM, 29-Oct-2026

Karwa Chauth 2026 Live: दिल्ली-एनसीआर में आज कब दिखेगा करवाचौथ का चांद?, जानें शुभ मुहूर्त और सही समय

आज 29 अक्तूबर को देश भर में करवाचौथ का त्योहार मनाया जा रहा है। सुहागिन महिलाएं इस दिन अपने पति की दीर्घायु की कामना करती हैं। यह व्रत करक चतुर्थी, दशरथ चतुर्थी और संकष्टि चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है।

करवाचौथ के दिन करवा माता के साथ मां पार्वती, भगवान शिव और गणेश जी की पूजा करने का विधान है। सुहागिन महिलाएं इस दिन व्रत रखती हैं। वे अपने पति की दीर्घायु की प्रार्थना करती हैं। ज्योतिषाचार्य वेद प्रकाश प्रचेता ने पूजन का शुभ मुहूर्त बताया है। कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 28 अक्तूबर की रात 1:07 बजे शुरू हुई। यह तिथि 29 अक्तूबर की रात 10:07 बजे तक रहेगी।

पूजन का शुभ मुहूर्त और चंद्रोदय

द्रिक पंचांग के अनुसार, नई दिल्ली में चांद करीब 8 बजकर 17 मिनट पर निकलेगा। करवाचौथ पर रात आठ बजे चंद्रोदय होगा। इसके बाद महिलाएं चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य देंगी। फिर वे अपने पति का चेहरा देखकर व्रत का पारण करेंगी।

 

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