• भुवनेश्वर में राष्ट्रीय शहरी सम्मेलन में नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने साझा की शहर के विकास की कार्ययोजना
• जैव विविधता पार्क, कचरा निस्तारण, भूजल संरक्षण और वायु गुणवत्ता सुधार की योजनाओं पर दिया जोर
• नागरिक सुविधाओं के साथ पर्यावरण संरक्षण और उद्योगों की जरूरतों को ध्यान में रखकर हो रहे कार्य
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। शहरों को आधुनिक, स्वच्छ, सुविधाजनक और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित शहरी सम्मेलन में गाजियाबाद नगर निगम की विकास योजनाओं और कार्ययोजना को साझा किया गया। ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में 24 और 25 अक्टूबर को आयोजित राष्ट्रीय शहरी सम्मेलन-2026 में नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने गाजियाबाद में चल रहे विकास कार्यों, आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल और आगामी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नगर निगम शहरवासियों की आवश्यकताओं के साथ पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए काम कर रहा है। विकास योजनाओं का उद्देश्य नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ शहर को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है।
भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने ओडिशा सरकार के सहयोग से सम्मेलन का आयोजन किया। ‘शहरी विकास की नई दिशा : शहरी व्यवस्थाओं, समाधानों और सेवा वितरण पर पुनर्विचार’ विषय पर आयोजित सम्मेलन में 1,200 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इसमें विभिन्न राज्यों के नगर विकास मंत्री, महापौर, नगर निकायों के प्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारी, शहरी विकास विशेषज्ञ, शिक्षाविद और उद्योग जगत से जुड़े प्रतिनिधि शामिल हुए। सम्मेलन का उद्घाटन केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने किया। उत्तर प्रदेश के नगर विकास मंत्री ए.के. शर्मा, प्रमुख सचिव नगर विकास पी. गुरु प्रसाद और गाजियाबाद के नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक भी इसमें शामिल हुए। नगर निगम के अपर नगर आयुक्त अवनींद्र कुमार ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।
जैव विविधता पार्क से लेकर कचरा निस्तारण तक की योजनाएं
सम्मेलन में नगर आयुक्त ने गाजियाबाद में चल रहे प्रमुख विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए जैव विविधता पार्क, अपशिष्ट से ऊर्जा तैयार करने की टीएसटीपी परियोजना और इंदिरापुरम में मुख्यमंत्री हरित सड़क अवसंरचना विकास योजना के दूसरे चरण के कार्यों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि नगर निगम की योजनाओं में शहर की बढ़ती आबादी, नागरिक सुविधाओं की जरूरतों और पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखा जा रहा है।
कचरे के बेहतर निस्तारण, भूजल संरक्षण और वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए किए जा रहे प्रयासों पर भी विशेष जोर दिया गया। नगर निगम का लक्ष्य आधुनिक तकनीक और प्रभावी प्रबंधन के माध्यम से शहरी सेवाओं को बेहतर बनाना है। इन योजनाओं से शहर की स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और आधारभूत सुविधाओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है। नगर आयुक्त ने आगामी योजनाओं को भी साझा किया और बताया कि विकास कार्यों में शहरवासियों के हित के साथ उद्योग जगत की जरूरतों को भी ध्यान में रखा जा रहा है।
बेहतर शहरी प्रशासन और नागरिक सुविधाओं पर मंथन
सम्मेलन में शहरों की सुनियोजित बसावट, मजबूत नगर प्रशासन, आधुनिक आधारभूत ढांचे, किफायती आवास, स्वच्छता, जल प्रबंधन और ठोस कचरे के निस्तारण जैसे विषयों पर चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने इस बात पर जोर दिया कि शहरी विकास का उद्देश्य केवल निर्माण कार्य कराना नहीं, बल्कि नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं देना, नगर निकायों की कार्यक्षमता बढ़ाना और शहरों को सुरक्षित, समावेशी तथा टिकाऊ बनाना भी है।
सम्मेलन के दौरान शहरी विकास को गति देने के लिए कई पहल और प्रकाशन प्रस्तुत किए गए। इनमें शहरी निवेश को प्रोत्साहित करने वाली आवास एवं शहरी विकास निगम की पत्रिका, जल और अपशिष्ट प्रबंधन के लिए क्षमता निर्माण मंच, नगर नियोजन संबंधी पुस्तिकाएं तथा प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी से जुड़े प्रकाशन शामिल रहे। इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी के दूसरे चरण का मोबाइल अनुप्रयोग, निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट प्रबंधन संबंधी दिशा-निर्देश और सार्वजनिक स्थानों को सभी नागरिकों के लिए अधिक सुलभ बनाने की पहल भी प्रस्तुत की गई।
वर्ष 2047 तक विकसित शहरों का लक्ष्य
सम्मेलन के समापन सत्र में केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने शहरी चुनौतियों के समाधान, किफायती आवास, स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और नगर निकायों की कार्यक्षमता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। चर्चा में बेहतर शहरी नियोजन, विभागीय समन्वय, मजबूत स्थानीय निकाय, टिकाऊ वित्तीय व्यवस्था और जवाबदेह नागरिक सेवाओं को प्राथमिकता देने पर सहमति बनी। राष्ट्रीय शहरी सम्मेलन में हुए विचार-विमर्श को विकसित भारत-2047 के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गाजियाबाद नगर निगम के लिए भी यह सम्मेलन अपनी योजनाओं को साझा करने और दूसरे शहरों के अनुभवों से सीखने का अवसर बना। नगर निगम का जोर ऐसे विकास पर है, जिसमें नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिलें, पर्यावरण सुरक्षित रहे और शहर भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हो सके।
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