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तमिलनाडु के नीलगिरी जिले में बस ड्राइवर जनगराज ने यात्रियों की जान बचाने के लिए अपनी जान गंवा दी. 23 तारीख की रात कुन्नूर से कोयंबटूर जा रही सरकारी बस परलियार के पास खराब हो गई थी. भारी बारिश और भूस्खलन के खतरे के बीच जनगराज ने यात्रियों को सुरक्षित दूसरी बस में भेज दिया. लेकिन वह खुद बस को छोड़कर नहीं गए. इसी दौरान पहाड़ से बड़ा पत्थर और पेड़ नीचे गिरने से बस क्षतिग्रस्त हो गई. अगले दिन बचाव दल ने चालक की सीट पर उनका शव बरामद किया. बेटे ने पिता को याद कर रोते हुए बताया कि वही उसकी पढ़ाई और शिक्षक बनने की प्रेरणा थे. सहकर्मियों ने परिवार को राहत और रोजगार देने की मांग की है.
तमिलनाडु के नीलगिरी में भूस्खलन के दौरान बस ड्राइवर जनगराज ने यात्रियों को सुरक्षित दूसरी बस से भेज दिया.
न्यूज18 तमिल
तमिलनाडु के नीलगिरी जिले से एक ऐसी कहानी सामने आई है जो किसी का भी दिल भारी कर देगी. पहाड़ों पर मूसलाधार बारिश हो रही थी. सड़क पर भूस्खलन का खतरा था और सरकारी बस भी रास्ते में खराब हो गई थी. ऐसे मुश्किल हालात में ड्राइवर जनगराज ने पहले यात्रियों की जान बचाने का फैसला किया. उन्होंने सभी यात्रियों को सुरक्षित दूसरी बस में बैठाकर रवाना कर दिया. लेकिन खुद अपनी बस को छोड़कर जाने के लिए तैयार नहीं हुए. उन्हें क्या पता था कि यात्रियों को सुरक्षित भेजने की यह कोशिश उनकी जिंदगी की आखिरी जंग बन जाएगी. पहाड़ से अचानक एक विशाल पत्थर और पेड़ नीचे गिरे. बस बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और जनगराज की जान चली गई. उनके इस बलिदान ने पूरे तमिलनाडु को शोक में डुबो दिया है.
जनगराज नीलगिरी जिले के दुराट्टी गांव के रहने वाले थे. वह राज्य परिवहन निगम में बस ड्राइवर के तौर पर काम करते थे. 23 तारीख की रात वह कुन्नूर से कोयंबटूर जा रही सरकारी बस चला रहे थे. बस में कंडक्टर केशवन और अन्य यात्री भी मौजूद थे. भारी बारिश के कारण परलियार के पास बस खराब हो गई. रात का वक्त था और चारों तरफ घना जंगल था. ऐसे में यात्रियों को वहीं रोकना जोखिम भरा हो सकता था. जनगराज ने सूझबूझ दिखाते हुए सभी यात्रियों को दूसरी बस से सुरक्षित भेज दिया. इसके बाद वह अपनी बस को बचाने की कोशिश में जुटे रहे. अगली सुबह जब बचाव दल ने बस तक पहुंचकर तलाशी ली तो चालक की सीट पर जनगराज का बेजान शरीर मिला. वह बस के तारों को पकड़े हुए थे.
यात्रियों को सुरक्षित भेजने के बाद खुद बस के पास रुके
बताया गया कि जनगराज अपनी सरकारी बस को अकेला छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे. वह बस को बचाने की कोशिश कर रहे थे. इसी दौरान पहाड़ की चोटी से एक बड़ा पत्थर और विशाल पेड़ नीचे आ गिरे. इससे बस बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई. लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण बचाव कार्य में देरी हुई. सुबह बचाव दल ने अभियान तेज किया और जनगराज का शव बरामद किया. उन्हें मेट्टुपलयम सरकारी अस्पताल भेजा गया. हादसे में बस कंडक्टर केशवन को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया.
पिता को याद कर फूट-फूटकर रोया बेटा
जनगराज की मौत की खबर से उनका परिवार टूट गया. पिता को खोने के दर्द में उनके बेटे के रोने का दृश्य लोगों को भावुक कर गया. बेटे ने बताया कि उसके पिता ही उसकी पढ़ाई और शिक्षक बनने के सपने की वजह थे. परिवार के लिए जनगराज सिर्फ कमाने वाले सदस्य नहीं थे बल्कि उसके भविष्य की उम्मीद भी थे. उनके सहकर्मियों ने भी उन्हें याद करते हुए सरकार से परिवार को राहत देने और एक सदस्य को रोजगार उपलब्ध कराने की मांग की है.
पहाड़ी सड़कों की सुरक्षा पर भी उठे सवाल
इस घटना के बाद परलियार के आसपास की पहाड़ी सड़क पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. स्थानीय स्तर पर उन क्षेत्रों में सड़क चौड़ी करने और सुरक्षा दीवार बनाने की मांग की गई है जहां अक्सर भूस्खलन का खतरा बना रहता है. भारी बारिश के दौरान पहाड़ी रास्तों पर सफर करना कितना जोखिम भरा हो सकता है यह हादसा उसकी गंभीर याद दिलाता है. जनगराज ने यात्रियों को सुरक्षित भेजने की जिम्मेदारी निभाई. उनकी मौत ने परिवार को गहरा दुख दिया है. वहीं उनके सहकर्मियों और स्थानीय लोगों के बीच उनका साहस और कर्तव्य के प्रति समर्पण लंबे समय तक याद किया जाएगा.
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