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नई दिल्ली. मकान बनाना तो हर किसी का सपना होता है, लेकिन इस सपने को पूरा करने में रातों की नींद और दिन का चैन उड़ जाता है. पैसों का जुगाड़ हो भी जाए तो इसे बनाने की सामग्री और कारीगर खोजने में हालत खराब हो जाती है. इसी चुनौती से पार पाने के लिए अब प्रीफैब्रिकेटेड हाउस का चलन तेजी से बढ़ रहा है. इसमें पारंपरिक ईंट, सीमेंट, मोरंग और पानी की जगह सबकुछ फैक्ट्री में बनाकर लाया जाता है. प्रीफैब हाउस का सारा सामान फैक्ट्री में बनाया जाता है और इसे साइट पर लाकर जोड़ दिया जाता है.

पारंपरिक मकानों के बजाय प्रीफैब मकान को बनाने के लिए एरोकॉन पैनल, बाइसन बोर्ड, स्टील सेक्शन और आयरन पाइप्स का इस्तेमाल होता है, जो दीवाल, छत और फर्श बनाने में काम आते हैं. इससे निर्माण की लागत तो कम होती ही है, उसकी लागत भी पारंपरिक मकान के मुकाबले काफी कम हो जाती है. यह तकनीक तेजी से लोकप्रिय हो रही है और दक्षिण भारत में इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है.

क्या होता है एयरोकॉन पैनल्स
प्रीफैब हाउस की दीवारें बनाने में ईंट की जगह एयरोकॉन पैनल्स का इस्तेमाल किया जाता है. छत बनाने के लिए बाइसन बोर्ड लगाए जाते हैं, जबकि घर में पार्टीशन, फ्लोर और फाल्स सीलिंग के लिए भी इसी का इस्तेमाल किया जाता है. एयरोकॉन पैनल एक तरह के सैंडविच पैनल होते हैं, जो सीमेंट आधारित मैटेरियल और फाइबर सीमेंट बोर्ड से बनाए जाते हैं. यह पैनल साउंड इंश्यूलेशन बनाते हैं और घर पूरी तरह साउंड प्रूफ हो जाता है. साथ ही इसमें सीलन, आग लगने जैसी समस्या भी नहीं आती है और गर्मियों में तापमान भी कम रहता है.

बाइसन बोर्ड का क्या काम
प्रीफैब हाउस बनाने के लिए बाइसन बोर्ड का भी खूब इस्तेमाल होता है. बाइसन बोर्ड भी सीमेंट के पार्टिकल से बने बोर्ड होते हैं, जिसमें सीमेंट के साथ लकड़ियां भी शामिल होती हैं. इस बोर्ड का इस्तेमाल घरों के बीच पार्टिशन बनाने यानी दीवारें बनाने में होता है. इसके अलावा सीलिंग और फ्लोरिंग में भी इसका इस्तेमाल होता है. यह बोर्ड पानी और आग से पूरी तरह सुरक्षित होते हैं, जिससे न तो प्रीफैब घर में सीलन आती है और न ही इसमें आग का डर रहता है.

कैसे बनता है मकान
प्रीफैब मकान बनाने के लिए एयरोकॉन और बाइसन बोर्ड को स्टील फ्रेमवर्क के जरिये इंटरलॉक किया जाता है. जब मेन फ्रेम तैयार हो जाता है तब इंटीरियर का काम जैसे फ्लोरिंग, दीवारें, लकड़ी का काम आदि किया जाता है. इन सभी के बाद यह पूरी तरह मकान जैसा हो जाता है. आज प्रीफैब मकानों की डिमांड सबसे ज्यादा केरल और दक्षिणी भारत में काफी ज्यादा हो रहा है. यह मकान काफी मजबूत होता है और मॉडर्न फिनिशिंग भी रहती है.

कितनी आती है लागत
प्रीफैब मकानों से जुड़े एक्सपर्ट का कहना है कि इसकी लागत परंपरागत मकानों की तुलना में 30 फीसदी कम रहती है और इसमें सीमेंट, मोरंग, पानी सरिया जैसी चीजों की जरूरत नहीं होती है. साइज और मोटाई के हिसाब से एयरोकॉन पैनल की कीमत 25 से 80 रुपये वर्गफुट रहती है. बाजार में जरूरत के हिसाब से अलग-अलग साइज के पैनल भी मौजूद हैं. एक सामान्य प्रीफैब हाउस की लागत 1,000 रुपये वर्गफुट से शुरू हो जाती है और 1,500-1,600 रुपये तक जाती है. वहीं, एक परंपरागत मकान बनाने की लागत 1,600 रुपये प्रति वर्गफुट से शुरू होती है.

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