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IAF Chief AP Singh: एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने अपने उड़ान करियर को एक अविस्मरणीय और भावुक विदाई दी. रिटायरमेंट से चंद रोज पहले उन्होंने वायुसेना के प्रतिष्ठित एचजेटी-16 ‘किरण एमके-1’ ट्रेनर एयरक्राफ्ट में अपनी विदाई उड़ान भरी.
वायुसेना प्रमुख एपी सिंह ने अपने पहले उड़ान प्रशिक्षक के साथ आखिरी उड़ान भरी.
IAF Chief AP Singh: भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने 20 अक्टूबर को वायुसेना के विमान में अपनी अंतिम उड़ान भरी. वह वायुसेना के एचजेटी-16 किरण एमके-1 प्रशिक्षण विमान में सवार हुए. इस उड़ान के साथ ही भारतीय वायुसेना के विमानों में उनके उड़ान करियर का एक यादगार अध्याय पूरा हो गया. यह उड़ान उनके लिए खास थी, क्योंकि इस दौरान उनके साथ उनके पहले उड़ान प्रशिक्षक विंग कमांडर वीएस कोचर (रिटायर) भी मौजूद थे.
इस तरह चार दशक से अधिक समय पहले शुरू हुआ उड़ान का सफर एक भावुक याद के साथ अपने महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंचा. बता दें कि एयर चीफ मार्शल एपी सिंह इसी महीने रिटायर हो रहे हैं. केंद्र सरकार ने एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित को भारतीय वायुसेना का अगला प्रमुख नियुक्त किया है. वर्तमान में वह वायुसेना उपप्रमुख हैं. एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित 31 अक्टूबर को वायुसेना प्रमुख का पद संभालेंगे.
वायुसेना प्रमुख एपी सिंह ने 28 जनवरी 1984 को अपनी पहली उड़ान भरी थी. इसके बाद चार दशकों से अधिक समय तक उनका जुड़ाव उड़ान से बना रहा. अब उसी उड़ान यात्रा के समापन के लिए उन्होंने किरण एमके-1 विमान को चुना. इस विमान से उनका पुराना जुड़ाव भी रहा है, क्योंकि यह भारतीय वायुसेना के पायलटों को प्रशिक्षण देने वाले प्रमुख विमानों में शामिल है.
20 अक्टूबर को इस उड़ान की सबसे खास बात यह रही कि एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के साथ उनके पहले उड़ान प्रशिक्षक विंग कमांडर वीएस कोचर (रिटायर) भी विमान में सवार थे. दोनों ने यू-707 नंबर वाले विमान में 55 मिनट तक आसमान में उड़ान भरी. यह मुलाकात प्रशिक्षक और प्रशिक्षु के उस रिश्ते की याद दिलाने वाली रही, जो किसी पायलट के शुरुआती दिनों से जुड़ता है और उसके पूरे पेशेवर जीवन में बना रहता है.
इस विमान ने कई पीढ़ियों के पायलटों को उड़ान का प्रशिक्षण देने में भूमिका निभाई है. ऐसे विमान में वायुसेना प्रमुख की अंतिम उड़ान ने इस अवसर को विशेष महत्व दिया. यह उड़ान भारतीय वायुसेना की समृद्ध प्रशिक्षण परंपरा और उड़ान प्रशिक्षकों के योगदान को सम्मान देने का अवसर भी बनी. प्रशिक्षक केवल पायलटों को उड़ान की तकनीक नहीं सिखाते, बल्कि उनके भीतर अनुशासन, कौशल और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने में भी अहम भूमिका निभाते हैं.
उनका मार्गदर्शन उड़ान प्रशिक्षण पूरा होने के बाद भी वायुसेना के कर्मियों के पेशेवर जीवन का हिस्सा बना रहता है. एयर चीफ मार्शल एपी सिंह की इस अंतिम उड़ान ने उनके लंबे उड़ान करियर के एक महत्वपूर्ण अध्याय का समापन किया. किरण विमान, पहले उड़ान प्रशिक्षक की मौजूदगी और पहली उड़ान से जुड़ी यादों ने इस अवसर को यादगार बना दिया. उनके उड़ान सफर का यह पड़ाव भारतीय वायुसेना में प्रशिक्षण, अनुभव और गुरु-शिष्य के स्थायी रिश्ते की अहमियत को भी रेखांकित करता है.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…
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