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नई दिल्ली (Gautam Dev LinkedIn). लाखों भारतीय विदेश जाकर डॉलर कमाने और शानदार जिंदगी का सपना देखते हैं. आमतौर पर मान लिया जाता है कि जिसके पास IIT कानपुर की मास्टर डिग्री हो, अमेरिका की स्टोनी ब्रुक यूनिवर्सिटी से PhD की हो और टेक इंडस्ट्री में 2 दशक से ज्यादा का लंबा अनुभव हो, उसके जीवन में कभी बेरोजगारी आ ही नहीं सकती. अमेरिकी कॉरपोरेट जगत में ऐसे अनुभवी प्रोफेशनल को हाथों-हाथ लिया जाता है. लेकिन गौतम देव की कहानी कुछ और ही बयां कर रही है.

हाल ही में अमेरिका से आई 61 वर्षीय देव गौतम की कहानी ने टेक इंडस्ट्री की कड़वी सच्चाई उजागर कर दी है. इसके बारे में कोई खुलकर बात नहीं करना चाहता. कभी अमेरिका के Dallas में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर शानदार जीवन जीने वाले देव पिछले 2 साल से फुल-टाइम जॉब के लिए दर-दर भटक रहे हैं. उनके लिंक्डइन बायो से पता चलता है कि वे बेहद मेधावी और बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं. अब उन्हें अपने घर का किराया चुकाने के लिए क्राउडफंडिंग का सहारा लेना पड़ रहा है.

गजब स्किल्स के धनी हैं गौतम देव

गौतम देव के लिंक्डइन ‘अबाउट’ सेक्शन से पता चलता है कि वे साधारण कोडर नहीं, बल्कि साइंस, सोशल सर्विस और टेक्नोलॉजी का अनूठा संगम हैं. उन्होंने अमेरिका की SUNY, Stony Brook यूनिवर्सिटी से फिजिक्स में पीएचडी और आईआईटी कानपुर से एमएससी की है. उन्होंने J2EE, XML, JSP, EJB, Struts, Oracle और Hibernate जैसी दिग्गज तकनीकों पर महारत हासिल की है. वे अपनी नौकरी के अलावा कई क्रिएटिव और ओपन-सोर्स प्रोजेक्ट्स से भी जुड़े थे.

बेरोजगारी की मार झेल रहे गौतम

गौतम देव ने ‘Fast Code’ नाम से ओपन-सोर्स एलिप्स प्लगइन प्रोजेक्ट (fast-code.sourceforge.net) डेवलप किया था. उनकी शेयर बाजार पर भी मजबूत पकड़ थी (वे stock-article.com चलाते थे). समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए उन्होंने whocaresforyou.com के जरिए जरूरतमंद संगठनों की मदद करने की पहल की थी. इतने शानदार रिज्यूमे वाला शख्स आज बेरोजगारी की मार झेल रहा है. यह बात किसी को भी हैरान कर सकती है.

एक फैसले ने बदल दी जिंदगी, नौकरी छोड़ने की भारी कीमत

गौतम देव के जीवन में भूचाल साल 2024 के सितंबर में आया. वे Dallas में एक आईटी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्यरत थे. कंपनी ने उन्हें नौकरी बचाने के लिए किसी दूसरे स्टेट में ट्रांसफर होने का फरमान सुनाया. पर्सनल कारणों के चलते उन्होंने दूसरे राज्य में जाने से इनकार कर दिया और नौकरी छोड़ दी. उन्हें भरोसा था कि 20 साल के तगड़े अनुभव से दूसरी नौकरी ढूंढना उनके लिए बाएं हाथ का खेल होगा. लेकिन अमेरिकी टेक मार्केट में मंदी, छंटनी और उम्र के इक्वेशंस ने उनके सपनों पर पानी फेर दिया.

क्राउडफंडिंग से चलाया घर

गौतम देव को लगातार 2 साल असफलता हाथ लगी और सारी जमा-पूंजी खत्म हो गई. उनके सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया. घर का भारी किराया भरना नामुमकिन हो गया और क्रेडिट कार्ड का कर्ज सिर पर चढ़ गया. जब कॉर्पोरेट दरवाजे बंद हो गए तो पेट पालने के लिए उन्हें Uber, DoorDash और Walmart Spark जैसे प्लेटफॉर्म्स पर गिग वर्कर के तौर पर काम करना पड़ा. जनवरी में उन्हें GoFundMe के जरिए क्राउडफंडिंग शुरू करनी पड़ी. इससे मिले 9,000 डॉलर से उन्होंने अपने बिल चुकाए.

गौतम देव जनवरी में 62 वर्ष के होने का इंतजार कर रहे हैं. इससे उन्हें सोशल सिक्योरिटी का फायदा मिल सकेगा. साथ ही वे वापस भारत लौटने के ऑप्शन पर भी विचार कर रहे हैं.

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