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-डीसीपी मुख्यालय बलवंत कुमार चौधरी की निगरानी में क्राइम ब्रांच और साइबर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई
-गूगल विज्ञापन और फेसबुक पेज के जरिए लोगों को बनाते थे निशाना, 40 लाख से अधिक की ठगी का खुलासा
-गिरोह का सरगना दीपक खन्ना फरार, तलाश में जुटी पुलिस; चार मोबाइल, बैंक दस्तावेज और नकदी बरामद

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। फर्जी बीमा पॉलिसी के नाम पर लोगों से साइबर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए क्राइम ब्रांच और साइबर क्राइम थाना पुलिस ने सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी टाटा एआईजी इंश्योरेंस कंपनी के नाम से फर्जी विज्ञापन और ई-मेल तैयार कर लोगों को पॉलिसी नवीनीकरण तथा प्रीमियम में छूट का लालच देते थे। पुलिस के मुताबिक, गिरोह ने करीब 40 लाख रुपये से अधिक की ठगी की है। मामले में गिरोह का सरगना दीपक कुमार खन्ना उर्फ डीजे फरार है। पुलिस उपायुक्त मुख्यालय बलवंत कुमार चौधरी ने शुक्रवार को प्रेसवार्ता में कार्रवाई का खुलासा करते हुए बताया कि फरार आरोपी की गिरफ्तारी और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश के लिए पुलिस टीमें जुटी हैं। पुलिस आयुक्त के निर्देशन में साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत क्राइम ब्रांच और साइबर क्राइम थाना की संयुक्त टीम ने यह कार्रवाई की।

डीसीपी मुख्यालय बलवंत कुमार चौधरी ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए आरोपियों के नेटवर्क, बैंक खातों और लेनदेन की जांच पर जोर दिया है, ताकि ठगी के पूरे तंत्र का पता लगाया जा सके। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान नीरज गुर्जर, नीरज सोलंकी, विक्रम सिंह, नितिन, सुशील कुमार, विक्रांत सिंह और राहुल कुमार के रूप में हुई है। पुलिस ने इनके कब्जे से चार मोबाइल फोन, दो एटीएम/डेबिट कार्ड, दो चेकबुक, बैंक पासबुक और तीन हजार रुपये बरामद किए हैं।

डीसीपी मुख्यालय बलवंत कुमार चौधरी ने बताया कि राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर केरल, झारखंड सहित अन्य राज्यों से गिरोह के खिलाफ शिकायतें मिली हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपियों के खिलाफ विभिन्न थानों में दर्जनभर से अधिक मुकदमे दर्ज होने की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस अब बैंक खातों, संदिग्ध लेनदेन और अन्य संभावित सहयोगियों की जांच कर रही है। फरार सरगना दीपक कुमार खन्ना उर्फ डीजे की गिरफ्तारी के लिए प्रयास जारी हैं।

गूगल विज्ञापन से फंसाते थे बीमा धारकों को
पुलिस जांच के अनुसार, गिरोह टाटा एआईजी इंश्योरेंस कंपनी के नाम से फर्जी ई-मेल आईडी, गूगल विज्ञापन और फेसबुक पेज तैयार करता था। इसके बाद लोगों से फोन पर संपर्क कर बीमा पॉलिसी अपडेट कराने और नवीनीकरण पर प्रीमियम में छूट देने का झांसा दिया जाता था। विश्वास में आने पर पीडि़तों से गिरोह के बैंक खातों में रकम जमा कराई जाती थी।

इसके बाद फोटो संपादन सॉफ्टवेयर की मदद से फर्जी बीमा प्रमाणपत्र तैयार कर ई-मेल के माध्यम से भेज दिए जाते थे। पुलिस के मुताबिक, नीरज सोलंकी फर्जी ई-मेल आईडी और विज्ञापन तैयार करने में शामिल था, जबकि नीरज गुर्जर, विक्रांत सिंह और अन्य आरोपी फोन पर लोगों से बातचीत करते थे। गिरोह का सरगना दीपक खन्ना कथित तौर पर ठगी के लिए लोगों का विवरण उपलब्ध कराता था।

कॉल सेंटर से सीखा ठगी का तरीका, कमीशन पर खुलवाए खाते
जांच में सामने आया कि गिरोह के कुछ आरोपी पहले दिल्ली स्थित बीएमए नामक कॉल सेंटर में काम कर चुके थे। वहां से उन्हें बीमा पॉलिसी के नाम पर धोखाधड़ी करने का तरीका पता चला। पुलिस की दबिश के बाद कुछ आरोपी वहां से फरार हो गए थे। बाद में वे दीपक खन्ना के संपर्क में आए और कथित तौर पर साइबर ठगी करने लगे। पुलिस के अनुसार, दीपक खन्ना और राहुल कुमार की मुलाकात डासना जेल में हुई थी।

जेल से बाहर आने के बाद दोनों ने ठगी शुरू की। वहीं, विक्रम उर्फ विक्की ने बैंक खाते उपलब्ध कराने में भूमिका निभाई। आरोप है कि सुशील कुमार और नितिन के नाम से खुलवाए गए खातों सहित कुल छह बैंक खाते पांच प्रतिशत कमीशन पर गिरोह को दिए गए। इन खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम मंगाने के लिए किया जाता था।

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