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सड़क पर जाम में फंसे बिना नोएडा से गुरुग्राम का सफर अब कुछ ही मिनटों में तय करने की तैयारी शुरू हो गई है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और युबीफ्लाई टेक्नोलॉजीज प्रा.लि. द्वारा संचालित चेन्नई की ‘द ई-प्लेन कंपनी’ ने इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग सेवाओं के लिए बुनियादी ढांचा, नियामक ढांचा और परिचालन इकोसिस्टम तैयार करने को सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं।

समझौते के तहत 2028 तक फ्लाइंग टैक्सी सेवा शुरू करने का लक्ष्य है। इसका उपयोग एयरपोर्ट-टू-एयरपोर्ट ट्रांजिट, शहरों के भीतर दैनिक आवागमन और आपातकालीन एयर एम्बुलेंस सेवाओं के लिए किया जाएगा। साझेदारी के तहत नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की रियायतग्राही (कंसेशनर) कंपनी यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्रा.लि. परिसर में प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट परीक्षणों, वर्टीपोर्ट (वर्टिकल टेकऑफ व लैंडिंग स्टेशन) और एयर-टैक्सी चार्जिंग स्टेशनों के लिए जगह आवंटित करेगी। एयरपोर्ट अपनी मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) को ईवीटीओएल सेवाओं की जरूरतों के अनुरूप ढालेगा। दोनों पक्ष मिलकर एसओपी, वर्टीपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम और परिचालन प्रक्रियाएं भी विकसित करेंगे।

पहले ड्रोन ट्रायल, फिर पायलट वाली उड़ानें

युबीफ्लाई टेक्नोलॉजीज के संस्थापक और निदेशक डॉ. सत्यनारायण चक्रवर्ती ने कहा कि एयर टैक्सी शुरू करने के लिए केवल विमान बनाना काफी नहीं, ग्राउंड इन्फ्रास्ट्रक्चर, नियामक ढांचे और एसओपी का समानांतर विकास भी जरूरी है। उन्होंने कहा, यह एमओयू हमें पायलट वाली ई200एक्स उड़ानों पर जाने से पहले ड्रोन परीक्षणों के जरिए अपने परिचालन मॉडल को व्यवस्थित रूप से परखने की अनुमति देता है। यह एक व्यावहारिक कदम है ताकि विमान प्रमाणित होने पर एयरपोर्ट इकोसिस्टम पूरी तरह तैयार रहे और हम सड़क यात्रा के घंटों को सुरक्षित, उत्सर्जन-मुक्त कुछ मिनटों के सफर में बदल सकें।

डीजीसीए और बीसीएएस से मंजूरियों पर फोकस

कंपनी अब नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) और नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो (बीसीएएस) से जरूरी मंजूरियां हासिल करने और फ्लाइट परीक्षणों पर ध्यान देगी। वहीं दोनों पक्ष नियामकों, एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) और राज्य सरकारों के साथ मिलकर सुरक्षा ढांचा, वर्टीपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम और स्मार्ट-सिटी प्रणालियों से जुड़ी एआई-असिस्टेड फ्लीट शेड्यूलिंग तैयार करेंगे।

डीजीसीए से डीओए पाने वाली पहली कंपनी

2019 में आईआईटी मद्रास इनक्यूबेशन सेल में इनक्यूबेट हुई ‘द ई-प्लेन कंपनी’ एडवांस्ड एयर मोबिलिटी के लिए इलेक्ट्रिक विमान बना रही है। कंपनी का दावा है कि वह इलेक्ट्रिक विमानों के लिए डीजीसीए से औपचारिक डिजाइन ऑर्गनाइजेशन अप्रूवल (डीओए) पाने वाली देश की पहली निजी एयरोस्पेस इकाई है। ई200एक्स नियामक की टाइप-सर्टिफिकेशन पाइपलाइन में स्वीकार किया जाने वाला पहला ईवीटीओएल विमान भी है।

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