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Patha Water Crisis: चित्रकूट के पाठा क्षेत्र में गर्मी आते ही गांवों में पानी के लिए जद्दोजहद शुरू हो जाती थी. कहीं महिलाएं रात-दिन हैंडपंप और कुओं के बाहर अपनी बारी का इंतजार करती थीं तो कहीं कई किलोमीटर पैदल चलकर पानी लाना पड़ता था, हालात इतने खराब थे कि लोगों के लिए पानी किसी अनमोल चीज से कम नहीं था. एक समय ऐसा भी आया जब पाठा क्षेत्र में पानी की जरूरत पूरी करने के लिए ट्रेन से टैंकरों में पानी मानिकपुर पहुंचाया जाता था, फिर वहां से टैंकरों के जरिए गांव-गांव पानी की सप्लाई होती थी.

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चित्रकूटः बुंदेलखंड के चित्रकूट पाठा क्षेत्र में पानी कभी सिर्फ जरूरत नहीं बल्कि जिंदगी की सबसे बड़ी चुनौती हुआ करता था. गर्मी आते ही गांवों में पानी के लिए जद्दोजहद शुरू हो जाती थी. कहीं महिलाएं रात-दिन हैंडपंप और कुओं के बाहर अपनी बारी का इंतजार करती थीं तो कहीं कई किलोमीटर पैदल चलकर पानी लाना पड़ता था, हालात इतने खराब थे कि लोगों के लिए पानी किसी अनमोल चीज से कम नहीं था. एक समय ऐसा भी आया जब पाठा क्षेत्र में पानी की जरूरत पूरी करने के लिए ट्रेन से टैंकरों में पानी मानिकपुर पहुंचाया जाता था, फिर वहां से टैंकरों के जरिए गांव-गांव पानी की सप्लाई होती थी.

इन गांव में थी सबसे ज्यादा पानी की किल्लत

आप को बता दे कि पाठा के गोपीपुर,करौंहा, जमुनिहाई सरहट समेत कई गांव पानी की किल्लत के लिए जाने जाते थे. गर्मी के दिनों में यहां की महिलाओं और बच्चों का बड़ा हिस्सा सिर्फ पानी जुटाने में ही बीत जाता था. पानी के लिए लंबी दूरी तय करना और घंटों लाइन में खड़े रहना रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका था. और पानी के लिए एक गाना भी महिलाओं ने बनाया था. इसमें वह गाना गाती थी “भौंरा तेरा पानी गजब कर जाए, मटकी न फूटे चाहे खसम मर जाए” महिलाओं के लिए पानी उनके पति से भी ज़्यादा कीमती था.

पानी की कमी से नहीं होती थी शादियां

वही पाठा क्षेत्र के गोपीपुर गांव की कहानी इस संकट की गंभीरता को बयां करती है. स्थानीय लोगों के मुताबिक गांव में पानी की कमी इतनी बड़ी समस्या थी कि यहां युवाओं की शादी तक में परेशानी आती थी. लोगों को डर रहता था कि शादी के बाद परिवार को पानी के लिए किस तरह जूझना पड़ेगा.और कई लोगों की तो शादियां हुई उसके बाद उनके रिश्ते टूट गए. हालांकि अब यहां की हालात बदल चुके हैं और लोगों को उनके घरों पर ही पानी मिल रहा है.

पानी भरनें में निकल जाता था दिन

चित्रकूट निवासी सत्य प्रकाश ने लोकल 18 को बताया कि करीब 15 साल पहले पाठा क्षेत्र में पानी का संकट बेहद गंभीर था. उन्होंने बताया कि गोपीपुर जैसे गांवों में पानी की कमी के कारण युवाओं की शादी तक नहीं होती थी, लोगों को पानी के लिए कोसों दूर जाना पड़ता था और कई बार पानी भरने में ही पूरा दिन निकल जाता था. हालात ऐसे बने कि ट्रेन के जरिए टैंकरों में पानी मंगाकर मानिकपुर पहुंचाया जाता था और फिर गांवों तक उसकी आपूर्ति की जाती थी.समय के साथ पाठा की तस्वीर बदलने लगी है.अब हर घर जल योजना के तहत गांवों में पाइपलाइन बिछाई गई और घर-घर नल कनेक्शन पहुंचाए गए. जिन गांवों में कभी पानी के लिए लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, आज वहां घर के सामने लगी टोटी से पानी पहुंच रहा है.

69 में से 56 गांव में पहुंच गया है पानी, शेष में जल्द काम होगा पूरा

वही नमामि गंगे के एडीएम स्वप्निल कुमार ने लोकल 18 को बताया कि उनके संज्ञान में आया था कि पाठा क्षेत्र में पहले पानी की काफी समस्या थी. सरकार की ओर से हर घर जल योजना के तहत लगातार काम कराया गया है, जिसमें पाठा क्षेत्र में 69 गांव थे. 56 गांव में काम पूरा हो गया है. 4 गांव में कुछ काम बाकी हैं, जल्द पानी की सप्लाई वहा भी शुरू करने का प्रयास है. उनका कहना है कि जल जीवन मिशन के तहत 92 किलोमीटर की रोड खोदी गई थी जिसमें 82 किलोमीटर की रोड भी बना दी गई है. उद्देश्य है कि पाठा क्षेत्र में पानी की समस्या पूरी तरह खत्म हो और लोगों को घर पर ही शुद्ध एवं स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सके. कभी जिस पाठा में पानी ट्रेन से पहुंचता था, आज उसी पाठा में घर की टोटी से पानी पहुंचना है और उनकी जिंदगियां पटरी पर लौट आई है.

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Rajneesh Kumar Yadav

Rajnish Kumar Yadav is a digital journalist and content publisher with over seven years of experience in print and digital media. He is currently working with News18 Digital (Local18) as a Content Publisher, wh…

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