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नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सरकार के मुखिया के रूप में निरंतर 25 साल का सफर पूरा करने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए एक औपचारिक धन्यवाद और बधाई प्रस्ताव पारित किया है. यह प्रस्ताव शासन के उस लंबे दौर का विश्लेषण है जिसने राज्य और केंद्र दोनों स्तरों पर सरकारी व्यवस्था का रुख बदल दिया. गुजरात में तीन बार विधानसभा चुनाव और केंद्र में लगातार तीन आम चुनावों में मिली जीत इस बात का प्रमाण है कि मतदाताओं का भरोसा लगातार बना रहा.

कैबिनेट के इस प्रस्ताव में गुजरात के शुरुआती दिनों से लेकर अब तक के 10 बड़े बदलावों का सिलसिलेवार ब्योरा दिया गया है. यह दस्तावेज बताता है कि किस तरह स्थानीय स्तर के प्रयोग आगे चलकर राष्ट्रीय नीतियों का हिस्सा बने.

1. गुजरात मॉडल से दिल्ली की सत्ता तक गवर्नेंस कैसे बदली?

गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी ने जिन प्रशासनिक प्रयोगों को जमीन पर उतारा था, वे बाद में केंद्र सरकार के कामकाज का आधार बने. गुजरात में शुरू हुई स्वागत पहल ने नागरिकों की समस्याओं का सीधे समाधान निकाला था. इस सिस्टम को 2010 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान मिला था.

इसी मॉडल को केंद्र में प्रगति प्लेटफार्म के रूप में लागू किया गया. इस व्यवस्था ने फाइलों में अटकी बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को रफ्तार दी. अफसरों और मुख्यमंत्रियों के साथ सीधी समीक्षा से रुकावटें खत्म हुईं. गुजरात की ज्योतिग्राम योजना की तर्ज पर ही देश भर में कृषि और घरेलू बिजली के लिए अलग-अलग फीडर तैयार किए गए.

2. गरीब परिवारों को सीधे खाते में मदद देकर क्या हासिल हुआ?

कैबिनेट के प्रस्ताव में इस बात पर जोर दिया गया है कि शुरुआती जीवन के अभावों ने सामाजिक कल्याण की नीतियों को दिशा दी. कागजी योजनाओं की जगह सीधे लाभ पहुंचाने का ढांचा खड़ा किया गया.

लगभग 60 करोड़ जन धन खातों के जरिए बैंकिंग सिस्टम से हर नागरिक को जोड़ा गया. 4 करोड़ से ज्यादा पक्के मकान बनाए गए और 25 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से बाहर निकाला गया. बिचौलियों की भूमिका खत्म करके सीधे खाते में पैसा ट्रांसफर करने की व्यवस्था ने सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता लाई.

3. महिलाओं और युवाओं के लिए आर्थिक रास्ते कैसे खोले गए?

महिलाओं की आत्मनिर्भरता को सीधे आजीविका से जोड़ा गया. करीब 3.5 करोड़ ग्रामीण महिलाओं को लखपति दीदी बनाकर उन्हें छोटे उद्योगों से जोड़ा गया. संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए कानून पास कराया गया.

युवाओं के लिए स्टार्टअप इकोसिस्टम और स्किल डेवलपमेंट के बड़े प्रोग्राम शुरू हुए. पीएम किसान योजना के जरिए किसानों के खातों में 4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा सीधे ट्रांसफर किए गए. दूरदराज के इलाकों में रहने वाले पिछड़े आदिवासी तबकों तक विकास पहुंचाने के लिए विशेष अभियान चलाए गए.

4. कड़े और जोखिम भरे आर्थिक फैसलों से सिस्टम पर क्या असर पड़ा?

प्रस्ताव में इस बात का जिक्र है कि राजनीतिक नफा-नुकसान की परवाह किए बिना कई बड़े सुधार लागू किए गए. गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स यानी जीएसटी लागू करना एक ऐसा ही जटिल फैसला था.

पुराने औपनिवेशिक कानूनों को हटाकर नए आपराधिक कानून लागू किए गए. डिजिटल पेमेंट और स्वच्छ भारत जैसे अभियानों को जन आंदोलन में बदलकर नागरिकों की सीधी भागीदारी तय की गई. यह साबित हुआ कि कड़े प्रशासनिक फैसलों को अगर सही नीयत से लागू किया जाए तो जनता उनका समर्थन करती है.

5. सरकारी खजाने से विकास का पहिया कैसे घुमाया गया?

सरकारी पूंजीगत खर्च को 2 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 12 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के स्तर पर पहुंचाया गया. इसका सीधा असर देश के हाईवे और रेलवे नेटवर्क के आधुनिकीकरण पर पड़ा.

इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को 2 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 13 लाख करोड़ रुपये के पार ले जाया गया. देश के भीतर हथियार बनाने और सेमीकंडक्टर चिप तैयार करने के प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम हुआ. इससे विदेशों पर देश की निर्भरता में भारी कमी आई.

6. आम जिंदगी से लेकर स्पेस तक टेक्नोलॉजी का नेटवर्क कैसे फैला?

सरकार ने टेक्नोलॉजी को केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित रखने के बजाय आम नागरिक के जीवन से जोड़ा. मोबाइल नेटवर्क और डिजिटल पहचान के जरिए योजनाओं का वितरण आसान किया गया.

यूपीआई ने देश के पेमेंट सिस्टम को पूरी तरह बदल दिया. कोरोना संकट के दौरान देश में ही वैक्सीन का निर्माण और चंद्रयान का दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचना वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता की मिसाल बने. अब प्राइवेट कंपनियों को अंतरिक्ष और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए जरूरी संसाधन दिए जा रहे हैं.

7. वैश्विक संकटों के बीच देश को सुरक्षित कैसे रखा गया?

कोरोना महामारी के दौर में जब दुनिया भर की सप्लाई चेन टूट गई थी, तब भारत ने अपने नागरिकों को सुरक्षा कवच दिया. पश्चिम एशिया के ताजा तनाव और ऊर्जा संकट के दौरान सरकार ने समय रहते रणनीतिक कदम उठाए.

कच्चे तेल की आपूर्ति और जरूरी सामानों की कीमतों पर नियंत्रण रखकर अर्थव्यवस्था को झटकों से बचाया गया. घरेलू स्तर पर क्षमताएं मजबूत होने के कारण देश हर अंतरराष्ट्रीय संकट में स्थिर बना रहा.

8. राष्ट्रीय सुरक्षा पर लिए गए कड़े फैसलों ने क्या संदेश दिया?

सीमा पार की आतंकी घटनाओं पर कड़ा रुख अपनाते हुए सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक जैसे सख्त कदम उठाए गए. हाल के सालों में चलाए गए सुरक्षा अभियानों ने भारत की रक्षा नीति को नई दिशा दी.

अनुच्छेद 370 को समाप्त करना और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का नया पद बनाना दशकों पुरानी प्रशासनिक मांगों को पूरा करने वाले फैसले थे. पूर्वोत्तर राज्यों में उग्रवाद पर लगाम लगी और नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बलों ने मजबूत पकड़ बनाई.

9. अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की आवाज कितनी मजबूत हुई?

दुनिया के बड़े देशों के बीच जारी तनाव के बावजूद भारत ने अपने स्वतंत्र रुख को कायम रखा. जी20 सम्मेलन में सर्वसम्मति बनाना और अफ्रीकी संघ को इस समूह का स्थाई सदस्य बनवाना कूटनीतिक जीत माना गया.

वैक्सीन मैत्री अभियान के जरिए संकट के समय कई देशों को जीवनरक्षक दवाएं पहुंचाई गईं. 36 से अधिक देशों ने अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान देकर भारत के नेतृत्व को मान्यता दी.

10. आधुनिक विकास के साथ सांस्कृतिक विरासत को कैसे जोड़ा गया?

विकास की इस पूरी यात्रा में पर्यावरण और सांस्कृतिक पहचान को भी पूरा स्थान दिया गया. गुजरात के समय से ही क्लाइमेट चेंज के लिए अलग विभाग बनाने की पहल राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी रही.

योग और मोटे अनाजों को वैश्विक पहचान दिलाई गई. काशी विश्वनाथ और अयोध्या जैसे प्राचीन केंद्रों का कायाकल्प कर सांस्कृतिक आत्मविश्वास को बढ़ावा दिया गया. कैबिनेट का यह प्रस्ताव बताता है कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ने का खाका पूरी तरह तैयार है.

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