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फरीदाबाद।

पश्चिमी एशिया में जारी भू-राजनीतिक संकट के बीच जिले को निर्यातकों को रिलीफ योजना की अवधि बढ़ने से राहत मिली है। सरकार के इस फैसले से फरीदाबाद के करीब 20 हजार उद्योगों को फायदा पहुंचेगा। जिले में छोटे-बड़े मिलाकर 35 हजार से अधिक उद्योग हैं। औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े लोगों के अनुसार इनमें करीब 20 हजार उद्योग किसी न किसी रूप में विदेशों को उत्पादों का निर्यात करते हैं। फरीदाबाद के ऑटो पार्ट्स, इंजीनियरिंग उत्पाद, मशीनरी, कपड़ा, गारमेंट और अन्य विनिर्माण उद्योगों का विदेशों में बाजार है। जिले की जिला निर्यात योजना में भी ऑटो और ऑटो कंपोनेंट समेत विभिन्न औद्योगिक उत्पादों को प्रमुख निर्यात क्षेत्र के तौर पर चिन्हित किया है। उद्योगपतियों ने कहा कि पश्चिम एशिया के संकट का असर माल की आवाजाही, शिपिंग समय और लागत पर पड़ सकता है। ऐसे में जोखिम कवर बढ़ने से निर्यातकों को नए ऑर्डर लेने और विदेशी खरीदारों को समय पर माल भेजने में मदद मिलेगी।

क्या है योजना : यह योजना पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में समुद्री मार्गों पर बढ़े जोखिम, माल ढुलाई की बढ़ती लागत और बीमा संबंधी दिक्कतों से निर्यातकों को राहत देने के लिए शुरू की गई थी। इसके तहत पात्र निर्यातकों को ईसीईजी कवर के माध्यम से 95 फीसदी तक जोखिम कवरेज मिल सकता है। यह सुविधा 16 मार्च 2026 या उसके बाद ली गई पात्र स्टैंड-अलोन या होल-टर्नओवर पॉलिसी पर लागू है। इसके साथ ही सरकार ने आरओडीटीईपी योजना को भी 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ा दिया है। पहले इसकी अवधि 30 सितंबर 2026 तक थी। योजना के तहत निर्यात किए गए उत्पादों पर ऐसे केंद्रीय, राज्य और स्थानीय शुल्क, कर तथा लेवी की भरपाई की जाती है, जिनका रिफंड किसी अन्य व्यवस्था के तहत नहीं होता।

पश्चिम एशिया संकट से शिपिंग लागत और जोखिम बढ़े हैं। सरकार का जोखिम कवर बढ़ाना फरीदाबाद के निर्यातकों के लिए सकारात्मक कदम है। धर्मेंद्र, उद्यमी

निर्यात कारोबार में समय और लागत दोनों महत्वपूर्ण हैं। राहत योजना बढ़ने से कंपनियों को विदेशी ऑर्डर पूरे करने में भरोसा और स्थिरता मिलेगी। पवन मोर, उद्यमी

बहुत अच्छी खबर है, वैश्विक स्तर पर को समस्याएं चल रही हैं, उनके बीच अगर यह अवधि नहीं बढ़ाई जाती तो व्यापार करना मुश्किल हो जाता। श्याम सुंदर कपूर, अध्यक्ष आईफोम

अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा कठिन है। सरकार की राहत से माल ढुलाई और पश्चिम एशिया से जुड़े जोखिमों के बीच उद्योगों को कुछ सहारा मिलेगा। आईसी जैन, उद्यमी

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