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Smart Milk Chilling Can: जहानाबाद के इंजीनियरिंग छात्र ऋतिक राज, सत्यम कुमार और उनकी टीम ने मिल्क चिलिंग कैन बनाया है. जो बिना बिजली के दूध को लंबी दूरी तक ठंडा रख सकता है. यह किसानों को दूध खराब होने से होने वाले नुकसान से बचाएगा. इसकी कीमत लगभग 12000 हजार होगी. यह PCM तकनीक का उपयोग करता है.

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जहानाबाद: किसानों के लिए दूध को लंबे समय तक सुरक्षित रखते हुए डेयरी कंपनी तक पहुंचाना बड़ी चुनौती होती है. खासकर लंबी दूरी के परिवहन के दौरान तापमान बढ़ने से दूध की गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा रहता है. कई बार दूध खराब होने की वजह से कंपनियां उसे लेने से मना कर देती हैं. जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. जहानाबाद सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों ने इसी समस्या का समाधान तलाशते हुए एक ऐसा मिल्क चिलिंग कंटेनर तैयार किया है. जो बिना बिजली के दूध को ठंडा रखने में मदद करेगा.

किसानों की समस्या को देखकर तैयार किया मॉडल
इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र ऋतिक राज, सत्यम कुमार और उनकी टीम ने यह मॉडल तैयार किया है. छात्रों के मुताबिक साधारण कंटेनर में दूध को लंबी दूरी तक ले जाने के दौरान उसके खराब होने की शिकायत रहती है. इससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है. ऋतिक राज ने बताया कि स्मार्ट इंडिया हैकथॉन के दौरान किसानों की इस समस्या पर काम करने का विचार आया. उन्होंने देखा कि दूध को कंपनी तक पहुंचाने में समय लगने के कारण उसका तापमान बढ़ जाता है. गुणवत्ता प्रभावित होती है. इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए टीम ने ऐसा कंटेनर बनाने पर काम शुरू किया. जिसमें दूध को लंबे समय तक ठंडा रखने की व्यवस्था हो.

₹12 हजार में मिलेगा मिल्क चिलिंग केन
छात्रों का दावा है कि बाजार में इस्तेमाल होने वाले सामान्य कंटेनर की कीमत करीब ₹8 हजार तक हो सकती है. उनमें दूध को लंबे समय तक ठंडा रखने की सुविधा नहीं होती. उनकी टीम का तैयार किया गया मिल्क चिलिंग केन करीब ₹12 हजार में उपलब्ध कराने का लक्ष्य है.

बिना बिजली के काम करेगा कंटेनर
छात्र सत्यम कुमार ने बताया कि उनके प्रोजेक्ट का नाम ‘डेयरी टेक’ रखा गया है. यह एक मिल्क चिलिंग केन है. जिसे बिना बिजली के इस्तेमाल करने के लिए तैयार किया गया है. इसमें दूध को ठंडा रखने के लिए PCM (Phase Change Material) तकनीक के इस्तेमाल की योजना है. उनके मुताबिक यह तकनीक दूध के तापमान को नियंत्रित रखने में मदद करेगी. इससे किसान दूध को कंपनी तक पहुंचाने के दौरान उसके खराब होने की समस्या से बच सकते हैं.

किसानों के लिए क्यों उपयोगी है यह मॉडल?
इस कंटेनर का मुख्य उद्देश्य दूध के परिवहन के दौरान होने वाले नुकसान को कम करना है. खासकर ऐसे किसान जो गांव या कस्बे से दूध इकट्ठा कर उसे दूर स्थित डेयरी कंपनी तक पहुंचाते हैं. उनके लिए यह मॉडल उपयोगी हो सकता है. छात्रों का कहना है कि बिना बिजली चलने वाला यह कंटेनर परिवहन के दौरान दूध को ठंडा रखने में मदद करेगा. किसानों के सामने आने वाली दूध खराब होने की समस्या को कम कर सकता है.

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Amit Ranjan

अमित रंजन वर्तमान में News18 में बिहार, झारखंड और दिल्ली से जुड़ी खबरों के समन्वय और संपादन का कार्य देख रहे हैं. खोजी पत्रकारिता उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है. राजनीति, शिक्षा, खेल, क्राईम और मौसम जैसे विषयों …

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