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Navpreet Singh Latest News: दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल खुफिया विभाग की मदद से 3 अक्टूबर की सुबह नवप्रीत सिंह को तुर्की से भारत लेकर आई है. ड्रग्स तस्करी का किंगपिन पंजाब के अमृतसर का रहने वाला है. स्पेशल सेल ने साल 2021 में करीब 360 किलो हेरोइन बरामद की थी, जिसकी कीमत करीब एक हजार करोड़ से ज्यादा थी. उसी मामले में ये वांटेड था. इस केस में पहले 11 गिरफ्तारी हो चुकी है.

पंजाब के अमृतसर जिले के ब्यास इलाके के गांव वजीर भुल्लर से निकलकर एक युवक कैसे कथित तौर पर अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी के नेटवर्क का बड़ा नाम बन गया… यह कहानी नवप्रीत सिंह उर्फ नव भुल्लर उर्फ नवाब विर्क से जुड़ी है. दस्तावेज के मुताबिक, नवप्रीत सिंह का जन्म 11 नवंबर 1991 को गुरदेव सिंह के घर हुआ था. उसका परिवार मूल रूप से विर्क सरनेम इस्तेमाल करता है, लेकिन गांव के नाम की वजह से वह आगे चलकर नव भुल्लर के नाम से पहचाना जाने लगा. उसकी पहचान का एक खास निशान उसके दाहिने पैर पर चोट का निशान भी बताया गया है.

अपराध की दुनिया में एंट्री
दस्तावेज के अनुसार, नवप्रीत की अपराध की दुनिया में एंट्री हरप्रीत सिंह उर्फ चिंटू के जरिए हुई. चिंटू को एक कुख्यात तस्कर बताया गया है, जिसके पाकिस्तान और अफगानिस्तान में बैठे ड्रग तस्करों से सीधे संपर्क थे. बताया गया है कि चिंटू के साथ रहते हुए नवप्रीत ने सीमा पार से ड्रग की सप्लाई कैसे होती है, इसका तरीका सीखा. शुरुआत में यह उसके लिए एक तरह की ट्रेनिंग थी, लेकिन आगे चलकर यही नेटवर्क उसके लिए बहुत बड़ा हो गया.

पंजाब में बढ़ते आपराधिक मामले
नवप्रीत के खिलाफ पहला दर्ज मामला मई 2016 का बताया गया है. यह मामला होशियारपुर के सदर थाने में NDPS एक्ट के तहत दर्ज हुआ था.
इसके बाद कुछ ही वर्षों में उसके खिलाफ कई और मामले दर्ज हुए. इनमें कपूरथला के सदर और कोतवाली थाने में NDPS और आर्म्स एक्ट के मामले शामिल हैं. अक्टूबर 2019 में फिल्लौर थाने में IPC की धारा 302 से जुड़ा मामला और अगस्त 2020 में SAS नगर के SSOC में भी मामला दर्ज होने का उल्लेख है. दस्तावेज के मुताबिक, इनमें से कई मामलों में उसे Proclaimed Offender यानी घोषित अपराधी बताया गया है.

बड़ी मात्रा में ड्रग बरामदगी
उसके नेटवर्क का कथित पैमाना उन मामलों से भी सामने आता है जिनमें बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ बरामद हुए. एक मामले में 54 किलो अफीम बरामद होने का जिक्र है. यह मामला 9 नवंबर 2021 को जालंधर ग्रामीण के करतारपुर थाने में दर्ज हुआ था. इसके अलावा दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल से जुड़े एक मामले में 354 किलो हेरोइन की बरामदगी का उल्लेख है.

गिरफ्तारी से बचने के लिए देश से भागा
साल 2019 तक पंजाब पुलिस उसके नेटवर्क पर लगातार शिकंजा कस रही थी. उसके कई साथियों को NDPS के मामलों में गिरफ्तार किया गया और पुलिस ने नवप्रीत की तलाश तेज कर दी. दस्तावेज के अनुसार, इसी दौरान नवप्रीत भारत से बाहर निकल गया. बताया गया है कि वह भूटान के रास्ते दुबई पहुंचा और फिर वहां से तुर्की चला गया.

जिस गुरु से सीखा, उसी की हत्या का आरोप
दस्तावेज में एक गंभीर आरोप का भी जिक्र है. बताया गया है कि नवप्रीत ने बाद में अपने कथित मेंटर हरप्रीत सिंह उर्फ चिंटू की हत्या करवा दी. आरोप के मुताबिक, चिंटू को यह पता था कि नवप्रीत की गिरफ्तारी में उसकी भूमिका रही थी. चिंटू के हटने के बाद नवप्रीत ने कथित तौर पर उसका पूरा ड्रग नेटवर्क अपने कब्जे में ले लिया. यानी जिस नेटवर्क में नवप्रीत ने एक शागिर्द के रूप में कदम रखा था, आगे चलकर वही नेटवर्क उसके हाथ में आ गया.

तुर्की में बदली पहचान
तुर्की पहुंचने के बाद नवप्रीत ने कथित तौर पर अपनी नई पहचान बनाई. दस्तावेज के मुताबिक, 14 जुलाई 2020 को उसे तुर्की की नागरिकता मिली और माना जाता है कि उसने वहां नवाब विर्क नाम अपना लिया. इस्तांबुल के Esenyurt इलाके में “Virk and Kunar Ticaret Ltd. Şti.” नाम की एक विदेशी व्यापार कंपनी का भी जिक्र दस्तावेज में है. आरोप है कि इस कारोबारी पहचान की आड़ में उसने तुर्की से अपना ड्रग नेटवर्क चलाया और दुबई तक नेटवर्क खड़ा किया. दस्तावेज के मुताबिक वह इस्तांबुल में रह रहा था.

इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस
पंजाब पुलिस के अनुरोध पर इंटरपोल ने नवप्रीत के खिलाफ Red Corner Notice No. A-5725/7-2021 जारी किया. दस्तावेज में बताया गया है कि वह तुर्की में ही है और उसके वहां गिरफ्तार होने की भी सूचना दी गई है.

परिवार भी तुर्की पहुंचा
दस्तावेज के मुताबिक, नवप्रीत का भाई हरप्रीत सिंह अपनी पत्नी आलिया अमीन के साथ 2019 में तुर्की चला गया. आलिया अमीन जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के तंगधार इलाके के गांव गोमल के रहने वाले मोहम्मद अमीन की बेटी बताई गई हैं, जो BSF में रहे हैं. 27 मार्च 2020 को हरप्रीत सिंह और आलिया अमीन को भी तुर्की की नागरिकता मिलने का उल्लेख है. हरप्रीत को हेमराज सिंह विर्क और आलिया को आलिया अमीन विर्क नाम से नागरिकता मिलने की बात कही गई है. दोनों का नाम नवप्रीत की इस्तांबुल स्थित कंपनी के पूर्व निदेशकों में भी बताया गया है.

पैसों का नेटवर्क
दस्तावेज में पैसों के लेन-देन का भी जिक्र है. बताया गया है कि आलिया अमीन के जरिए भारत में पैसा भेजा जाता था. वह कथित तौर पर MoneyGram के जरिए अपनी बहन मसरत अमीन को पैसे भेजती थीं और मसरत भारत में उनकी ओर से रकम प्राप्त करती थीं. इसके बाद कुछ पैसा जम्मू-कश्मीर में रिश्तेदारों तक मनी एक्सचेंज चैनलों के जरिए पहुंचने की बात कही गई है. दस्तावेज के मुताबिक, रकम अक्सर एक साथ बड़ी मात्रा में नहीं भेजी जाती थी. कुछ सौ डॉलर की छोटी-छोटी रकम अलग-अलग ट्रैवल एजेंसियों और एक्सचेंज हाउस के जरिए दिल्ली और श्रीनगर तक भेजे जाने का उल्लेख है. कभी-कभी पैसा ऐसे लोगों को भी दिया जाता था जिनका परिवार से सीधा संबंध नजर नहीं आता था या जिनके नाम से अलग मोबाइल नंबर दर्ज था. दस्तावेज इसे छोटे-छोटे और अलग-अलग लेन-देन का तरीका बताता है, जिससे पैसे को ट्रैक करना मुश्किल हो सके.

नेटवर्क में ‘डॉक्टर साब’ कौन?
नव भुल्लर के कथित नेटवर्क में एक और व्यक्ति का जिक्र है, जिसे ‘डॉक्टर साब’ कहा गया है. दस्तावेज के मुताबिक, वह अफगानिस्तान का रहने वाला व्यक्ति है और नवप्रीत का करीबी सहयोगी माना जाता है. वह नवप्रीत की मदद करने के लिए तुर्की गया था और इससे पहले कुछ समय दिल्ली में भी रह चुका था.

बाबा बकाला में सामने आया नेटवर्क
इस पूरे नेटवर्क की भारत में गतिविधियों की सबसे स्पष्ट तस्वीर 26 अक्टूबर 2024 की कार्रवाई से सामने आने की बात दस्तावेज में कही गई है. काउंटर इंटेलिजेंस, अमृतसर को सूचना मिली थी कि नव भुल्लर पाकिस्तान के जरिए सीमा पार से ड्रग तस्करी का नेटवर्क चला रहा है और विदेशी WhatsApp नंबरों के जरिए पंजाब में अपने लोगों से संपर्क करता है. इसी सूचना के आधार पर बाबा बकाला की लेडी रोड कॉलोनी में किराए के मकान से तीन लोगों का एक मॉड्यूल चलने की बात सामने आई.

दुबई से शुरू हुआ कनेक्शन
दस्तावेज के मुताबिक, इस मॉड्यूल की कहानी दुबई से शुरू हुई. रॉकी रंधावा, जो ब्यास का रहने वाला बताया गया है, 2023 में राजस्थान में NDPS के मामले में नाम आने के बाद दुबई भाग गया था. इसी दौरान मई 2023 में बाबा बकाला का रहने वाला नवजोत सिंह विजिटर वीजा पर दुबई गया और वहां रॉकी से मिला. करीब 15 दिन बाद नवजोत भारत लौट आया. इसके बाद रॉकी ने उससे संपर्क किया और उसे अपने नेटवर्क में शामिल किया. नवजोत की मुलाकात दुबई में रहने वाले सनी और फिर नव भुल्लर से कराई गई. आरोप के मुताबिक, नवजोत को नए लोगों को नेटवर्क में जोड़ने और सामान रखने के लिए सुरक्षित जगह तलाशने का काम दिया गया.

बाबा बकाला में बनाया गया सेफ हाउस
नवजोत ने लवप्रीत कुमार और गगनदीप सिंह उर्फ गग्गी को अपने साथ जोड़ा. इसके बाद बाबा बकाला में करीब 15 हजार रुपये महीने के किराए पर एक मकान लिया गया. यह मकान लवप्रीत के नाम पर किराए पर लिया गया था. दस्तावेज के मुताबिक, नवजोत के iPhone में नव भुल्लर के दो WhatsApp नंबर ‘वड्डा भाई’ और ‘वड्डा वीरा’ नाम से सेव थे. नवजोत खुद सीमा पर नहीं जाता था. नेटवर्क के दूसरे लोग ड्रग की खेप लेकर आते और उसे किराए के मकान में रखा जाता था.

7 किलो हेरोइन से खुला बड़ा राज
पुलिस ने सूचना के आधार पर बाबा बकाला में विशेष नाका लगाया. एक Volkswagen Virtus कार को रोककर नवजोत सिंह और लवप्रीत कुमार को पकड़ा गया. उनके पास से 7 किलो हेरोइन बरामद हुई. पूछताछ के बाद पुलिस उस किराए के मकान तक पहुंची, जहां इससे कहीं ज्यादा बड़ा ड्रग स्टॉक मिला.

मकान से क्या-क्या मिला?
दस्तावेज के अनुसार, मकान से बरामद हुआ:

– 98 किलो हेरोइन
– 31.930 किलो कैफीन एनहाइड्रस
– 17 किलो डेक्सट्रोमेथॉर्फन यानी DMR
– 5 विदेशी पिस्टल
– 1 देसी पिस्टल

यह बरामदगी बताती है कि यह केवल छोटी मात्रा में ड्रग रखने का मामला नहीं था, बल्कि बड़े स्तर पर खेप को स्टोर करने की व्यवस्था थी.

हेरोइन में मिलावट के लिए इस्तेमाल होने वाले पदार्थ
दस्तावेज में कैफीन और DMR को लेकर भी अहम जानकारी दी गई है. इन दोनों पदार्थों पर NDPS एक्ट लागू नहीं बताया गया है और दस्तावेज के मुताबिक ये खुले बाजार में आसानी से उपलब्ध भी नहीं होते. इनका इस्तेमाल हेरोइन की मात्रा बढ़ाने के लिए कटिंग एजेंट के तौर पर किए जाने की बात कही गई है. यानी बड़ी मात्रा में मिली हेरोइन को दूसरे पदार्थों के साथ मिलाकर उसकी मात्रा बढ़ाने की तैयारी की जा रही थी.

पाकिस्तान से पानी के रास्ते आती थी खेप?
दस्तावेज में बरामद सामान से ड्रग की सप्लाई के संभावित तरीके का भी जिक्र है. हेरोइन में नमी पाई गई थी और अनुमान लगाया गया कि उसे करीब 8 से 9 महीने पहले वहां लाकर रखा गया होगा. मकान से बड़े रबर के टायर ट्यूब भी मिले. दस्तावेज के मुताबिक, इससे जांच एजेंसियों को शक हुआ कि पाकिस्तान से नशीले पदार्थ पानी के रास्ते तैराकर भारत लाए गए होंगे.

नव भुल्लर पर भी केस
इस कार्रवाई के बाद FIR नंबर 62, दिनांक 26 अक्टूबर 2024 को SSOC अमृतसर में दर्ज की गई. इसमें NDPS एक्ट की धारा 21, 25 और 29 तथा आर्म्स एक्ट की धारा 25 लगाई गई. दस्तावेज के मुताबिक, इस मामले में नव भुल्लर का नाम भी शामिल किया गया.

पूरी कहानी का सार
वजीर भुल्लर गांव से शुरू हुई नवप्रीत सिंह की कहानी कथित तौर पर पंजाब, दुबई और तुर्की तक फैले एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क तक पहुंचती है. पहले वह पंजाब में एक तस्कर के संपर्क में आया. फिर उसके खिलाफ लगातार NDPS और अन्य आपराधिक मामले दर्ज हुए. पुलिस की कार्रवाई तेज होने के बाद वह भारत से बाहर निकलकर पहले दुबई और फिर तुर्की पहुंचा.

तुर्की में उसने कथित तौर पर नवाब विर्क नाम से नई पहचान बनाई और एक कारोबारी कंपनी की आड़ में अपना नेटवर्क खड़ा किया. इसके बाद उसका नेटवर्क भारत, दुबई और पाकिस्तान से जुड़े कथित ड्रग सप्लाई चैनलों तक फैलता गया. 2024 में बाबा बकाला से हुई कार्रवाई ने इस नेटवर्क की भारत में मौजूदगी और कथित संचालन का एक अहम लिंक सामने रखा, जहां से भारी मात्रा में हेरोइन, ड्रग में मिलावट के लिए इस्तेमाल होने वाले पदार्थ और हथियार बरामद किए गए.

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