टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक अस्पताल के इन्वेंटरी मैनेजमेंट सेक्शन ने विभिन्न विभागों और वार्डों को निर्देश जारी किया है कि वे प्रभावित बैचों का तुरंत उपयोग बंद कर दें और उन्हें संबंधित दवा इकाइयों में वापस लौटा दें. यह निर्देश अस्पताल ने चार बार नोटिसों के माध्यम से 7 से 14 सितंबर के बीच दिए हैं.
14 सितंबर के एक नोटिस में अस्पताल की ओरल और टॉपिकल ड्रग यूनिट ने बताया कि तीन टैबलेट बैच एनालिटिकल टेस्ट में फेल हो गए थे और उन्हें “स्टैंडर्ड क्वालिटी के नहीं” घोषित किया गया. इनमें सोडियम वैल्प्रोएट 200 मिलीग्राम (मिर्गी के लिए), स्पिरोनोलैक्टोन 50 मिलीग्राम (दिल की विफलता और पानी जमा होने के लिए) और इमिप्रामाइन 25 मिलीग्राम (डिप्रेशन के लिए) शामिल हैं.
इसके साथ ही उसी दिन इंजेक्टेबल ड्रग यूनिट ने पांच इंजेक्शन दवाओं के बैच वापस मंगाने का आदेश जारी किया. ये भी जांच में फेल पाई गईं. इनमें एडेनोसिन, मिथाइल एर्गोमेट्रिन, मल्टीविटामिन इंजेक्शन, फेनिरामाइन मैलिएट और एस्कॉर्बिक एसिड शामिल हैं. मिथाइल एर्गोमेट्रिन बच्चे के जन्म के बाद होने वाली ब्लीडिंग को रोकने के लिए मां को दी जाती है.
दो टैबलेट बैचों में शारीरिक दोष भी पाए गए. 9 सितंबर के नोटिस में बताया गया कि आइसोसॉरबाइड मोनोनाइट्रेट 20 मिलीग्राम की गोलियां स्ट्रिप के अंदर पाउडर रूप में मिलीं. यह बैच ग्लोसन इंडिया लैब्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा जुलाई 2026 में बनाया गया था और इसकी एक्सपायरी जून 2028 है. विभागों को तीन दिनों के अंदर इसे वापस करने को कहा गया है.
इसी तरह 7 सितंबर के नोटिस में मेटोप्रोलॉल 50 मिलीग्राम की गोलियों में भी पाउडर रूप में दोष पाया गया. यह बैच भी ग्लोसन इंडिया लैब्स का था. कुछ सैंपल जैक्सन लैबोरेटरीज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा सप्लाई किए गए थे.
आरएमएल अधिकारियों ने बताया कि जांच परिणाम आने के बाद अस्पताल ने तुरंत रिकॉल प्रक्रिया शुरू की और सभी संबंधित इकाइयों को प्रभावित दवाओं का उपयोग बंद करने और किसी भी मरीज से जुड़ी समस्या की रिपोर्ट करने की सलाह दी गई. फिलहाल किसी मरीज पर इन दवाओं के गंभीर दुष्प्रभाव की कोई शिकायत नहीं आई है.
अस्पताल प्रशासन ने कहा कि मरीजों की देखभाल में कोई बाधा न आए, इसके लिए वैकल्पिक दवाओं की व्यवस्था कर दी गई है. स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है और दवा गुणवत्ता व मरीज सुरक्षा के प्रोटोकॉल के अनुसार सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं.
ये दवाएं कई महत्वपूर्ण बीमारियों के इलाज में काम आती हैं. इसलिए अस्पताल ने जल्दबाजी में इन्हें वापस मंगाया है ताकि मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके
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