दरअसल, इस मामले का जिक्र भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के समक्ष किया गया. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पश्चिम बंगाल सरकार की याचिका को कल यानी गुरुवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई सूर्यकांत ने बुधवार को कहा कि वह पश्चिम बंगाल सरकार की उस याचिका पर पांच अक्टूबर को सुनवाई करेंगे, जिसमें नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार मिलन प्रधान को 2007 में दर्ज छह आपराधिक मामलों में दी गई अंतरिम जमानत को चुनौती दी गई है.
तुषार मेहता लगाते रहे गुहार
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तत्काल सुनवाई की मांग करते हुए कहा कि चुनाव के बाद सुनवाई होने पर याचिका निष्प्रभावी हो जाएगी. पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ने कहा, ‘उन्हें चुनाव लड़ने के लिए जमानत दी गई है. क्या मैं कल का जोखिम ले सकता हूं? मैं बस इतना ही कह रहा हूं.’
सीजेआई सूर्यकांत ने दिया झटका
हालांकि, सीजेआई सूर्यकांत ने मामले को गुरुवार को सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की बोर्ड पहले से ही काफी लंबी है. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, ‘हमारी बोर्ड बहुत लंबी है. हम इसे निश्चित रूप से खारिज करेंगे, लेकिन सोमवार को खारिज करेंगे, कल नहीं.’
सॉलिसिटर जनरल मेहता ने दोबारा गुरुवार को मामले की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया. इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने फिर कहा, ‘नहीं. सोमवार.’ सीजेआई सूर्यकांत की बेंच में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल थे.
कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती
पश्चिम बंगाल पुलिस ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को कलकत्ता हाई कोर्ट की एकल पीठ द्वारा दी गई अंतरिम जमानत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मंगलवार को प्रधान को 20 अक्टूबर तक अंतरिम जमानत दी थी और उन्हें छह अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम उपचुनाव के लिए प्रचार करने की अनुमति दी थी.
कांग्रेस कैंडिडेट को ममता का समर्थन
यह सीट मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के इस्तीफे के बाद खाली हुई है. उन्होंने इस साल की शुरुआत में हुए विधानसभा चुनाव में भवानीपुर और नंदीग्राम सीट से चुनाव लड़ा था और दोनों पर जीत दर्ज की थी. बाद में उन्होंने भवानीपुर सीट बरकरार रखने का फैसला किया. इस सीट पर ममता बनर्जी ने कांग्रेक कैंडिडेट को अपना समर्थन दिया है.
कलकत्ता हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया
कलकत्ता हाईकोर्ट ने प्रधान को 21 अक्टूबर को निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने का भी निर्देश दिया था. प्रधान के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास और शस्त्र अधिनियम के प्रावधानों के उल्लंघन जैसे आरोपों में ये सभी आपराधिक मामले 2007 में नंदीग्राम में भूमि अधिग्रहण के विरोध में चले आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए थे.
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