Alwar Ramcharit Manas Writing: अलवर के एक सरकारी शिक्षक ने धार्मिक आस्था और राम भक्ति से जुड़ा अनोखा कार्य किया है. शिक्षक ने करीब 7 माह में अपने हाथों से रामचरित मानस लिखी. उनके इस प्रयास के बाद उनके बेटे ने भी राम नाम लेखन शुरू किया है. पिता-पुत्र की यह पहल धार्मिक आस्था और लेखन के प्रति समर्पण का उदाहरण बनी हुई है. परिवार में राम नाम लेखन को लेकर उत्साह का माहौल है.
राजकुमार गुप्ता ने बताया कि सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें धार्मिक ग्रंथों को हाथ से लिखने के बारे में जानकारी मिली. इसके बाद उनके मन में भी रामचरित मानस को स्वयं लिखने की इच्छा हुई. उन्होंने 25 जनवरी 2026 को रामचरित मानस लिखना शुरू किया और 28 अगस्त 2026 को श्रावण पूर्णिमा के शुभ अवसर पर इसे पूरा किया.
विद्यार्थियों को गणित पढ़ाने का कार्य करते
उन्होंने बताया कि वे रोजाना सुबह ब्रह्म मुहूर्त में करीब 3:45 बजे से 5:30 बजे तक रामचरित मानस लिखते थे. इसके बाद स्कूल जाकर विद्यार्थियों को गणित पढ़ाने का कार्य करते थे. उनके अनुसार पूरी रामचरित मानस का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा उन्होंने ब्रह्म मुहूर्त में ही लिखा. उन्होंने बताया कि लेखन के दौरान उन्हें किसी तरह की कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ा. राजकुमार गुप्ता के अनुसार उनके द्वारा लिखी गई रामचरित मानस में विभिन्न लोगों की गणना के आधार पर 1074 दोहे हैं और उन्होंने इसे देखकर लिखते हुए कुल 1034 पेज तैयार किए हैं.
राम नाम लिखना शुरू कर दिया है
उन्होंने बताया कि राम नाम लिखने और धार्मिक ग्रंथ लिखने की प्रेरणा उन्हें अपने पिता से मिली. बचपन में वे अपने पिता को राम नाम लिखते हुए देखते थे और मंदिरों में भी धार्मिक पुस्तकों को देखकर लिखने की प्रेरणा मिली. अब यही संस्कार उनके बेटे में भी दिखाई दे रहे हैं. अपने पिता को राम नाम लिखते देखकर उनके बेटे ने भी उनके साथ राम नाम लिखना शुरू कर दिया है.
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