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नाबालक साहू की हवेली आज भी मिर्जापुर जिले के बसनही बाजार में मौजूद है. शहर के ऐतिहासिक और प्राचीन गंगा घाट पक्का घाट का भी निर्माण नाबालक साहू के द्वारा ही कराया गया था, इसके साथ ही कोतवाली का भी निर्माण पुराने समय में उनके द्वारा ही राजवाड़े की सुरक्षा को लेकर कराया गया था.

मिर्जापुर: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में आजादी से पहले से ही सबसे ज्यादा व्यावसायिक गतिविधियां हुआ करती थी. मिर्जापुर जिला न सिर्फ अपनी प्राचीनता के लिए प्रसिद्ध था. बल्कि, यहां पर कई ऐसे व्यवसाई हुए, जो पूरे विश्व में विख्यात थे. उन्हें व्यवसाईयों में एक नाबालक साहू हुआ करते थे. नाबालक साहू लाह (गोंद) और चमड़े का कारोबार करते थे. लाह और चमड़े की डिमांड उसे समय सबसे ज्यादा हुआ करती थी. लाह यानि गोद सबसे ज्यादा मिर्जापुर के जंगलों से निकलता था, जिसे अलग-अलग प्रान्तों में सप्लाई की जाती थी, इसके साथ ही साथ चमड़े का भी उनका बड़ा कारोबार था. उनके परिवार के लोग आभूषणों के कारोबार से भी जुड़े हुए थे. यह वजह थी कि उन्हें शहर के सबसे बड़े रईसों में एक माना जाता था.

नाबालक साहू की हवेली आज भी मिर्जापुर जिले के बसनही बाजार में मौजूद है. शहर के ऐतिहासिक और प्राचीन गंगा घाट पक्का घाट का भी निर्माण नाबालक साहू के द्वारा ही कराया गया था, इसके साथ ही कोतवाली का भी निर्माण पुराने समय में उनके द्वारा ही राजवाड़े की सुरक्षा को लेकर कराया गया था. नाबालक साहू उसे समय के सबसे बड़े रईस हुआ करते थे. उनकी रियासतें चला करती थी. आज भी उनके अस्तबल यानी तबला के नाम से मोहल्ले का नाम पड़ा हुआ है, उसे नाबालक का तबला के नाम से आज भी जाना जाता है.

प्रसिद्ध कारोबारी थे नाबलक साहू

शिवकुमार मुंडड़ा ने लोकल 18 से बताया कि मिर्ज़ापुर शहर में एक नाबालक साहू का कोठी थी, बेहद ही फेमस थी. जब लोगों को घर नहीं हुआ करता था, तब नाबालक साव की कोठी हुआ करती थी. कोठी में ही नाबालक साहू का अस्तबल हुआ करता था, जिसमें कई घोड़े रहते थे. बग्गियां रहती थी. अस्तबल को तबेला कहा जाता था, जो जगह आज भी इसी नाम से जाना जाता है. आज भी नाबलक साहू की हवेली मौजूद है आज भी प्राचीन इमारत उसी शान के साथ खड़ी हुई है, जिसमें काफी अच्छे अंदर नक्काशीदार इनके पूरे बंगले की तरह बना हुआ है. इस समय खंडहर के रूप में स्थिति इसकी हो गई है, लेकिन सुंदरता कम नहीं हुआ.

राजवाड़े की करते थे सुरक्षा

शिवकुमार मुंडड़ा ​ने बताया कि क्षेत्र में जो कोतवाली का क्षेत्र था. शहर कोतवाली भी काफी प्राचीन थी. आज उसका नवनिर्माण हो गया है. एक समय में वहाँ पर राजाओं का बोलबाला था. यह क्षेत्र रजवाड़ों का था और चारों तरफ कोतवाली की जो बालकनी बनी हुई है. उस बालकनियों से पूरे उसकी निगरानी होती थी और मुख्य रूप से यह हमारा व्यवसायिक केंद्र रहा. मिर्जापुर में पुराने समय के प्रसिद्ध व्यवसाईयों में नाबालक साहू हुआ करते थे. उनकी रियासत बड़ी थी. त्रिमुहानी का पूरा क्षेत्र उन्हीं के अधीन आया करता था. यही वजह है कि इस पूरे क्षेत्र को उन्हीं के नाम से जाना जाता है.

About the Author

Vivek Kumar

विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…

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