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Diwali Kab Hai 2026: बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी के ज्योतिष डिपार्टमेंट के प्रोफेसर पंडित सुभाष पांडेय ने बताया की कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि से दीपवाली के पांच दिवसीय महापर्व का आगाज होता है. पंच दिवसीय इस महापर्व के पहले दिन धन तेरस का पर्व मनाया जाता है.

Diwali Kab Hai 2026: दीप और खुशियों के महापर्व दीपावली को देशभर में धूमधाम से मनाया जाता है. धनतेरस के महापर्व से इसकी शुरुआत होती हैं. बीते कुछ सालों से तिथियों में हेर फेर के कारण दीपावली की तारीख को लेकर कन्फ्यूजन की स्तिथि बनी रहती है. इस बार भी धनतेरस के लेकर दीपावली तक का त्यौहार कब मनाया जायेगा इसको लेकर आपके मन को कोई संशय हैं तो उसे आज ही आप दूर कर लीजिये.

बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी के ज्योतिष डिपार्टमेंट के प्रोफेसर पंडित सुभाष पांडेय ने बताया की कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि से दीपवाली के पांच दिवसीय महापर्व का आगाज होता है. पंच दिवसीय इस महापर्व के पहले दिन धन तेरस का पर्व मनाया जाता है. इस दिन धन की देवी माता लक्ष्मी के साथ आयोग्य के देवता धन्वंतरि की पूजा आराधना भी की जाती है. इस बार धन तेरस का महापर्व 6 नवंबर को मनाया जायेगा.

यम के नाम का जलाया जाता है दीप

इसके अगले दिन (7 नवंबर) चतुर्दशी तिथि को नरक चतुर्दशी और हनुमान जयंती मनाया जायेगा.इस दिन यम के नाम का दीप जलाया जाता है. इससे अकाल मृत्यु का भय दूर होता है. नरक चतुर्दशी के अगले दिन अमावस्या होती है. इस दिन ही दिवाली मनाई जाती है.

8 नवम्बर को मनाई जाएगी दिवाली

वैदिक हिन्दू पंचांग के अनुसार, कार्तिक अमावस्या तिथि की शुरुआत 8 नवम्बर को सुबह 11 बजकर 27 मिनट पर हो रहा है, जो अगले दिन यानि 9 नवम्बर को दोपहर 12 बजकर 29 मिनट पर समाप्त होगा. दीपवाली में लक्ष्मी गणेश की पूजा के लिए निशा कालीन समय और अमावस्या तिथि का होना अनिवार्य होता है. इसलिए इस बार 8 नवम्बर को ही दिवाली मनाई जायेगी.

कब है पूजा का मुहूर्त

दिवाली पर लक्ष्मी गणेश की पूजा के लिए शाम 7 बजकर 35 मिनट से लेकर 8 बजकर 56 मिनट का समय सबसे शुभ है. इस समय में ही आप अपने घर पर व्यवसायिक प्रतिष्ठानों पर पूजा अर्चना कर सकतें है.

भाई दूज पर बहनें करती है पूजा

दिवाली के अगले दिन अन्नकूट का उत्सव मनाया जाता है. उसके अगले दिन यानि कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भाई दूज का पर्व मनाया जाता है. इस बार भाई दूज का पर्व 10 नवम्बर को मनाया जायेगा. इस दिन बहनें अपने भाइयो की लम्बी आयु की कामना से यम की पूजा करती है और गोबर से गोवर्धन बनाकर पूजा अर्चना करती है. भाई दूज के पर्व से ही दीपवाली के पर्व का समापन होता है.

About the Author

Vivek Kumar

विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…

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