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-आपदा सूचना देकर नहीं आती, नियमित अभ्यास ही बचाव तंत्र की सबसे बड़ी ताकत: राहुल पाल
-आपदा के शुरुआती मिनटों में कितनी तेज दौड़ती है मदद, तीन स्थानों पर हुआ जमीनी परीक्षण
-एनडीआरएफ से लेकर अग्निशमन और स्वास्थ्य विभाग तक एक साथ उतरे, बचाव से सुरक्षित निकासी तक हुआ अभ्यास

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। भूकंप का बड़ा झटका आए, किसी औद्योगिक इकाई में रासायनिक दुर्घटना हो या अचानक आग लगने से बड़ी संख्या में लोग फंस जाएं, ऐसी आपात परिस्थितियों में राहत और बचाव कार्य कितनी तेजी से शुरू हो सकता है, इसका शुक्रवार को गाजियाबाद में व्यावहारिक परीक्षण किया गया। 18 सितंबर को जनपद में भूकंप, औद्योगिक-रासायनिक दुर्घटना और अग्नि सुरक्षा को केंद्र में रखकर राज्य स्तरीय मॉक एक्सरसाइज आयोजित की गई। अभ्यास के दौरान अलग-अलग विभागों की टीमें एक साथ सक्रिय हुईं और काल्पनिक आपदा की स्थिति में मौके पर पहुंचकर बचाव, अग्निशमन, सुरक्षित निकासी और चिकित्सा सहायता की कार्रवाई का अभ्यास किया। मुख्य अग्निशमन अधिकारी राहुल पाल के अनुसार मॉक एक्सरसाइज का सबसे बड़ा उद्देश्य केवल संसाधनों और उपकरणों को परखना नहीं, बल्कि यह देखना था कि वास्तविक आपदा की स्थिति में विभिन्न विभाग कितनी तेजी से एक-दूसरे से समन्वय स्थापित करते हुए कार्रवाई शुरू कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि आपदा के समय शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं।

यदि घटनास्थल पर पहुंचने, सूचना के आदान-प्रदान, बचाव और आग पर नियंत्रण की प्रक्रिया में देरी होती है तो नुकसान बढ़ सकता है। इसलिए ऐसे अभ्यास वास्तविक घटना से पहले कमियों को पहचानने और उन्हें दूर करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। मॉक एक्सरसाइज के लिए गाजियाबाद में तीन प्रमुख स्थानों को चिन्हित किया गया था। इनमें एटीएस एडवांटेज, अहिंसाखंड-1 इंदिरापुरम, बीपीसीएल लोनी और डॉ. केएन मोदी साइंस एंड कॉमर्स इंटर कॉलेज, मोदीनगर शामिल रहे। निर्धारित परिदृश्यों के अनुसार संबंधित स्थानों पर आपात स्थिति उत्पन्न होने की काल्पनिक सूचना दी गई। इसके बाद संबंधित विभागों की टीमें आवश्यक संसाधनों और उपकरणों के साथ घटनास्थल पर पहुंचीं और बचाव अभियान शुरू किया।

राहुल पाल ने कहा कि आपदा कभी सूचना देकर नहीं आती, इसलिए तैयार रहना ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। नियमित अभ्यास से कर्मचारियों को अपनी जिम्मेदारियों की स्पष्ट जानकारी रहती है और वास्तविक घटना के समय घबराहट के बजाय व्यवस्थित तरीके से कार्रवाई की जा सकती है। गाजियाबाद जैसे बड़े और औद्योगिक गतिविधियों वाले जनपद में इस तरह के संयुक्त अभ्यास का महत्व और बढ़ जाता है। राज्य स्तरीय मॉक एक्सरसाइज ने विभिन्न विभागों को एक साझा मंच पर अपनी तैयारियां परखने और आपदा के समय बेहतर समन्वित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने का अवसर दिया।

घटना की सूचना मिलते ही सक्रिय हुईं टीमें
अभ्यास के दौरान काल्पनिक आपदा की सूचना मिलते ही राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, अग्निशमन एवं आपात सेवा, पुलिस और यातायात पुलिस की टीमों ने मोर्चा संभाला। सिविल डिफेंस, नगर निगम, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण, रेडियो विभाग, स्वास्थ्य विभाग समेत अन्य संबंधित विभागों के कर्मचारी भी निर्धारित भूमिका के अनुसार मौके पर पहुंचे। घटनास्थल पर फंसे प्रभावित लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने, आग पर काबू पाने और घायल व्यक्तियों को प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने की कार्रवाई की गई। राहुल पाल ने बताया कि मॉक अभ्यास में इस बात पर विशेष ध्यान दिया गया कि आग या रासायनिक दुर्घटना जैसी स्थिति में बचाव दल खुद को सुरक्षित रखते हुए प्रभावित क्षेत्र में प्रवेश करे।

साथ ही घटनास्थल पर भीड़ नियंत्रण, यातायात व्यवस्था, सुरक्षित मार्ग तैयार करने और जरूरत पडऩे पर प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने की प्रक्रिया का भी अभ्यास किया गया। उन्होंने कहा कि वास्तविक आपदा में केवल एक विभाग की कार्रवाई से स्थिति को नियंत्रित करना संभव नहीं होता। पुलिस को कानून-व्यवस्था और यातायात संभालना होता है, अग्निशमन विभाग को आग पर नियंत्रण और बचाव कार्य करना होता है, स्वास्थ्य विभाग को घायलों के उपचार की जिम्मेदारी निभानी होती है, जबकि अन्य विभागों को राहत, संचार और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने होते हैं। ऐसे में सभी विभागों के बीच बेहतर तालमेल बेहद जरूरी है।

संचार व्यवस्था और त्वरित प्रतिक्रिया का भी परीक्षण
राज्य स्तरीय मॉक एक्सरसाइज के दौरान विभागों के बीच सूचना के आदान-प्रदान और संचार व्यवस्था की भी जांच की गई। यह देखा गया कि आपदा की सूचना संबंधित अधिकारियों और बचाव दलों तक कितनी तेजी से पहुंचती है और उसके बाद मौके पर कार्रवाई किस तरह शुरू होती है। आवश्यक उपकरणों के साथ टीमों की उपलब्धता, घटनास्थल तक पहुंचने की क्षमता और उपलब्ध संसाधनों के इस्तेमाल को भी अभ्यास में परखा गया।

राहुल पाल के मुताबिक ऐसे अभ्यास का मकसद किसी विभाग की कार्यप्रणाली में कमी निकालना नहीं, बल्कि वास्तविक आपदा से पहले तैयारियों को मजबूत करना है। अभ्यास के दौरान सामने आने वाली छोटी से छोटी कमी को भी गंभीरता से लिया जाता है, ताकि भविष्य में जरूरत पडऩे पर उसे तत्काल दूर किया जा सके। उन्होंने कहा कि अग्निशमन विभाग लगातार अपनी तैयारियों को बेहतर बनाने के साथ अन्य विभागों के साथ समन्वय को भी मजबूत कर रहा है।

वास्तविक आपदा से पहले तैयारी की परीक्षा
मॉक एक्सरसाइज में प्रभावित व्यक्तियों की सुरक्षित निकासी, प्राथमिक उपचार, चिकित्सा सहायता, अग्निशमन और राहत-बचाव कार्यों को एक साथ संचालित किया गया। इसके जरिए यह परखा गया कि किसी बड़े हादसे के दौरान उपलब्ध मानव संसाधन, वाहन, उपकरण और अन्य संसाधनों का अधिकतम प्रभावी उपयोग कैसे किया जा सकता है। अभ्यास के बाद विभागीय टीमों के बीच समन्वय, संचार व्यवस्था और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता का व्यावहारिक मूल्यांकन किया गया। अधिकारियों के अनुसार इस तरह के पूर्वाभ्यास आपदा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने के साथ बचाव दलों को वास्तविक परिस्थितियों के लिए तैयार करते हैं।

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