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Ajit Agarkar BCCI Chief Selector Tenure: भारतीय क्रिकेट टीम के चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर ने अपना कार्यकाल न बढ़ाने का फैसला किया है. उन्होंने इसके बारे में बीसीसीआई को अवगत करा दिया है. रोहित शर्मा के भविष्य को लेकर हुए विवाद और बोर्ड के प्रशासनिक हस्तक्षेप से अगरकर काफी नाराज बताए जा रहे हैं. ऐसे में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या अगरकर खुद चीफ सेलेक्टर का पद छोड़ेंगे या एजीएम के बाद बीसीसीआई कोई बड़ा कदम उठाएगा.
अजीत अगरकर का कार्यकाल अगले महीने खत्म हो रहा है.
बैठक के बाद बीसीसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘चयन समितियों से जुड़े मामलों पर फैसला लेने के लिए पदाधिकारियों को अधिकृत किया गया है.’ उन्होंने हालांकि अगरकर के कार्यकाल को लेकर स्पष्ट स्थिति नहीं बताई. बीसीसीआई की 95वीं एजीएम में बोर्ड से संबद्ध राज्य क्रिकेट संघों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. बैठक में बंगाल क्रिकेट संघ (सीएबी) के प्रतिनिधि और भारत के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली तथा कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ के प्रतिनिधि और पूर्व तेज गेंदबाज वेंकटेश प्रसाद भी मौजूद रहे. सीनियर चयन समिति के अध्यक्ष के भविष्य पर फैसला करने के साथ-साथ बीसीसीआई जूनियर चयन समिति के सभी पांच पदों को भी भरने की प्रक्रिया पर विचार कर रहा है. इस बीच, मुंबई क्रिकेट संघ (एमसीए) ने भारतीय क्रिकेट बोर्ड से अनुरोध किया कि मैचों के आवंटन के दौरान उसे कुछ और प्रमुख मुकाबले दिए जाने पर विचार किया जाए.
द टेलीग्राफ के मुताबिक अजीत अगरकर (Ajit Agarkar) ने इसी साल जुलाई में अपने तीन साल का कार्यकाल पूरा किया था, जिसके बाद उन्हें इस महीने तक के लिए अस्थाई एक्सटेंशन दिया गया था. माना जा रहा है कि बोर्ड के बढ़ते हस्तक्षेप और नीतिगत मामलों में मनमुटाव के कारण उन्होंने अचानक पद छोड़ने का निर्णय लिया है. अगरकर के पद छोड़ने के संकेत उस समय मिलने शुरू हो गए थे जब उन्होंने इस महीने की शुरुआत में मुंबई में हुई समीक्षा बैठक में हिस्सा नहीं लिया था. हालांकि, बीसीसीआई (BCCI) के सचिव देवजीत सैकिया (Deavajit Saikia) ने उस समय कहा था कि अगरकर पारिवारिक कारणों से बाहर हैं और इंटरनेट कनेक्टिविटी न होने के कारण ऑनलाइन नहीं जुड़ सके. लेकिन यह बात उस समय आई जब सैकिया ने 2027 वनडे विश्व कप के लिए रोहित शर्मा के समर्थन में खुलकर बयान दिया था और कहा था कि जब रोहित इतना शानदार खेल रहे हैं तो और क्या चाहिए.
अजीत अगरकर का कार्यकाल अगले महीने खत्म हो रहा है.
लंदन का ‘रोहित शर्मा ड्रामा’ और बोर्ड का हस्तक्षेप
अगरकर और बीसीसीआई के बीच मतभेद की सबसे बड़ी वजह हालिया वनडे सीरीज के दौरान लंदन में हुआ घटनाक्रम रहा. सूत्रों के अनुसार, चयन समिति के एक सदस्य ने रोहित शर्मा को सूचित कर दिया था कि चयनकर्ता अब उनसे आगे की सोच रहे हैं और लॉर्ड्स वनडे उनका आखिरी मैच हो सकता है. जब यह खबर मीडिया में फैली और सोशल मीडिया पर हंगामा बढ़ा, तो बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया को बीच-बचाव करना पड़ा. सैकिया ने बयान जारी कर साफ किया कि ऐसा कोई फैसला नहीं लिया गया है और रोहित तब तक खेलेंगे जब तक वे टीम की योजनाओं में फिट बैठते हैं. चयन मामलों में बोर्ड के इस सीधे हस्तक्षेप ने अगरकर को आहत किया, जिसके बाद उन्होंने अलग होने का फैसला कर लिया.
कौन बनेगा अगला मुख्य चयनकर्ता?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगरकर की जगह कौन लेगा. नए मुख्य चयनकर्ता की दौड़ में कई बड़े नाम सामने आ रहे हैं. चयन समिति के अध्यक्ष के लिए वीवीएस लक्ष्मण (VVS Laxman) सबकी पहली पसंद थे, लेकिन बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के प्रमुख लक्ष्मण इस भूमिका में रुचि नहीं दिखा रहे हैं, क्योंकि इसमें लगातार यात्राएं करनी पड़ती हैं. वहीं पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज पार्थिव पटेल (Parthiv Patel) का नाम तेजी से उभरकर सामने आ रहा है और वे इस जिम्मेदारी को संभालने में रुचि भी दिखा रहे हैं. इसके अलावा दिग्गज तेज गेंदबाज जहीर खान इस रेस में एक सरप्राइज और बड़ा विकल्प साबित हो सकते हैं. चूंकि नए मुख्य चयनकर्ता की नियुक्ति की प्रक्रिया में थोड़ा समय लग सकता है, इसलिए संभावना जताई जा रही है कि अगले महीने न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाली व्हाइट-बॉल और टेस्ट सीरीज के लिए प्रज्ञान ओझा को अंतरिम अध्यक्ष बनाया जा सकता है.
आगामी चुनौतियां और रोहित-विराट का भविष्य
नए चयनकर्ता के सामने समय बहुत कम है, क्योंकि 2027 वनडे विश्व कप में एक साल से भी कम का समय बचा है. इसके अलावा भारत वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) की अंक तालिका में पांचवें स्थान पर है और फाइनल की उम्मीदों को जिंदा रखने के लिए न्यूजीलैंड के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की आगामी सीरीज जीतना बेहद जरूरी है. ऐसे में रोहित शर्मा और विराट कोहली के भविष्य पर फैसला लेना नए अध्यक्ष के लिए बड़ी चुनौती होगी.
बोर्ड और चयन समिति के बीच टकराव का पुराना इतिहास
भारतीय क्रिकेट इतिहास में चयन समिति के अध्यक्ष और बीसीसीआई के बीच मनमुटाव कोई नई बात नहीं है. 2011-12 में इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया में 0-4 की करारी हार के बाद तात्कालीन मुख्य चयनकर्ता मोहिंदर अमरनाथ एमएस धोनी को कप्तानी से हटाकर युवा विराट कोहली को कप्तान बनाना चाहते थे. तब बोर्ड अध्यक्ष एन. श्रीनिवासन ने वीटो पावर का इस्तेमाल कर धोनी को बचाया था और अगली एजीएम में अमरनाथ को चयन समिति से बाहर कर दिया गया था. इसी तरह सौरव गांगुली को भी अपने दौर में जगमोहन डालमिया का खुला समर्थन हासिल था. अजीत अगरकर का अचानक हटना एक बार फिर साबित करता है कि भारतीय क्रिकेट में चयन की स्वतंत्रता और बोर्ड के प्रशासनिक दबाव के बीच का टकराव काफी पुराना है.
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कमलेश कुमार राय नेटवर्क18 ग्रुप में बतौर चीफ सब एडिटर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. वह बीते 15 सालों से खेल पत्रकारिता की पिच पर डटे हुए हैं. हिंदी स्पोर्ट्स सेक्शन में वह खेल कंटेंट की गहरी समझ, सटीक विश्लेषण और ब…
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