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-पंप संचालक समय रहते पूरी कर लें सभी तैयारियां, लापरवाही किसी भी कीमत पर नहीं होगी बर्दाश्त: अमित तिवारी
-जिला पूर्ति अधिकारी की दो टूक- नियम तोड़ा तो पंप संचालक पर होगी कड़ी कार्रवाई
-एएनपीआर कैमरे बताएंगे किस वाहन का पीयूसीसी वैध, सितंबर तक पूरी करनी होगी तैयारी
-बिना प्रमाणपत्र ईंधन भरने वालों पर कसेगा शिकंजा, जिलेभर में पंपों की निगरानी तेज

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। जिले में बढ़ते प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए जिला प्रशासन ने अब सख्त रुख अपनाया है। एक अक्टूबर से गाजियाबाद में ‘नो पीयूसीसी, नो फ्यूल’ नीति लागू होने जा रही है। इसके बाद जिस वाहन का वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसीसी) नहीं होगा, उसे पेट्रोल पंप पर पेट्रोल या डीजल नहीं दिया जाएगा। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के निर्देशों के अनुपालन में जिला प्रशासन ने जिले के सभी पेट्रोल और डीजल पंप संचालकों को आवश्यक तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए हैं। नीति को प्रभावी ढंग से लागू कराने की जिम्मेदारी संभाल रहे जिला पूर्ति अधिकारी अमित तिवारी ने इस मामले में सख्त तेवर दिखाते हुए पेट्रोल पंप संचालकों को स्पष्ट कर दिया है कि एक अक्टूबर के बाद बिना वैध पीयूसीसी वाले वाहन में ईंधन डालना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले पंप संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अमित तिवारी ने अधिकारियों और पेट्रोल पंप कर्मियों को निर्देश दिए हैं कि नीति लागू होने के बाद जांच में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

जिला पूर्ति अधिकारी अमित तिवारी ने कहा कि जिले में एक अक्टूबर से ‘नो पीयूसीसी, नो फ्यूल’ नीति हर हाल में लागू की जाएगी। नीति लागू होने में अभी करीब 15 दिन का समय है और इस अवधि में सभी आवश्यक इंतजाम पूरे कराने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने पंप संचालकों से कहा कि वे समय रहते एएनपीआर कैमरे समेत सभी जरूरी व्यवस्थाएं पूरी कर लें, ताकि एक अक्टूबर से व्यवस्था लागू करने में किसी प्रकार की समस्या न आए। उन्होंने वाहन चालकों से भी अपील की है कि यदि उनके वाहन का पीयूसीसी प्रमाणपत्र नहीं बना है या उसकी वैधता समाप्त हो चुकी है तो वे तत्काल नया प्रमाणपत्र बनवा लें।

ऐसा नहीं करने पर एक अक्टूबर के बाद पेट्रोल और डीजल लेने में परेशानी हो सकती है। प्रशासन का मानना है कि पीयूसीसी के बिना चल रहे वाहनों पर प्रभावी नियंत्रण से प्रदूषण की रोकथाम में मदद मिलेगी। अब आने वाले दिनों में पेट्रोल पंपों पर एएनपीआर कैमरों की स्थापना और व्यवस्था की तैयारियों की निगरानी के साथ ही नियमों के पालन को लेकर जिला पूर्ति विभाग की सख्ती और बढऩे की उम्मीद है। जिले में कुल 26,384 वाहनों के पास प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र नहीं है। इनमें दोपहिया वाहनाें की संख्या 20,193 है। कारों की संख्या 6,070 है। इनके अलावा 108 ट्रैक्टर, एक एंबुलेंस, एक गुडस कैरियर वाहन और नो बसों का भी प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र नही है। जिले में वाहनों में ईंधन की आपूर्ति के लिए 135 पेट्रोल, डीजल व सीएनजी पंप हैं।

एएनपीआर कैमरे से होगी पीयूसीसी की जांच
प्रशासन ने जिले के सभी पेट्रोल-डीजल पंप संचालकों को सितंबर माह के भीतर एएनपीआर कैमरे लगाने के निर्देश दिए हैं। इन कैमरों की मदद से पेट्रोल पंप पर आने वाले वाहन के नंबर की पहचान कर यह पता लगाया जा सकेगा कि उसके पास वैध पीयूसीसी है या नहीं। यदि वाहन का प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र वैध नहीं होगा तो उसे ईंधन नहीं दिया जाएगा। जिन पेट्रोल पंपों पर निर्धारित समय तक एएनपीआर कैमरे नहीं लग पाते हैं, वहां वैकल्पिक व्यवस्था के तहत वाहन में ईंधन डालने से पहले सेल्समैन वाहन स्वामी से पीयूसीसी प्रमाणपत्र दिखाने को कहेगा। वैध प्रमाणपत्र दिखाने के बाद ही वाहन में पेट्रोल या डीजल डाला जाएगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी स्तर पर नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

पंपों पर पहुंचकर खुद जांच कराई
नीति लागू होने से पहले व्यवस्था को परखने के लिए मंगलवार को जिला पूर्ति अधिकारी अमित तिवारी ने अधिकारियों की टीम के साथ जिले के विभिन्न पेट्रोल पंपों का निरीक्षण किया। इस दौरान वाहनों की जांच करने के साथ पंप संचालकों को एक अक्टूबर से लागू होने वाली व्यवस्था के बारे में स्पष्ट निर्देश दिए गए। निरीक्षण टीम में क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी विनोद भारती, क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी स्वेज पंवार-भोजपुर एवं मुरादनगर ब्लॉक पूर्ति निरीक्षक हेमलता, मोदीनगर शहर एवं मुरादनगर शहर पूर्ति निरीक्षक दीपा वर्मा, लोनी क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी विशाल यादव, पूर्ति निरीक्षक आनंद स्वरूप त्रिपाठी, तहसील सदर क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी प्रिया तिवारी, नगर क्षेत्र प्रथम एवं ब्लॉक रजापुर पूर्ति निरीक्षक शैलेश कुमार सिंह, नगर क्षेत्र द्वितीय पूर्ति निरीक्षक नीरज कुमार वर्मा तथा ट्रांसहिंडन क्षेत्र पूर्ति निरीक्षक नूर फातिमा शामिल रहे। टीम ने पेट्रोल पंपों पर पहुंचकर व्यवस्था का जायजा लिया और संचालकों को साफ तौर पर चेतावनी दी कि एक अक्टूबर से बिना वैध पीयूसीसी वाले वाहनों को ईंधन देने पर संबंधित पंप के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने पेट्रोल पंप कर्मचारियों को भी निर्देश दिए कि वे वाहन में ईंधन डालने से पहले पीयूसीसी की स्थिति सुनिश्चित करें।

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