90 के दशक में एक आइकॉनिक गाने ने सुहागरात से जुड़े खास अहसास और नई दुल्हन के मन की उलझन को बड़े ही नफासत से पर्दे पर उतारा था. बिना किसी अश्लीलता या भद्दे शब्द के इस्तेमाल के गाने ने प्यार और आत्मीयता को इतनी खूबसूरती से बयां किया कि तीन दशक बाद भी यह हर नवविवाहित जोड़े के दिल के बेहद करीब है. चलिए आज आपको उस आइकॉनिक गाने के बारे में बताते हैं जो पिछले 30 सालों से दर्शकों के दिलों पर राज कर रहा है.
नई दिल्ली. किसी भी नवविवाहित जोड़े के लिए सुहागरात हर मायने में बेहद खास और यादगार होती है. एक-दूसरे को समझने की कोशिश, आंखों ही आंखों में शर्म का उतरना और दिल में उठने वाली एक अनजानी खुशी, इन पलों का एहसास ही अलग होता है. शादी के बाद का वह शुरुआती वक्त प्रेम और एक नए रिश्ते की दहलीज पर खड़े होने का मीठा सा दौर होता है, जिसे बयां करने के लिए शब्द अक्सर कम पड़ जाते हैं.
लगभग तीन दशक पहले आई फिल्म ‘दिल से’ के एक गाने ने इस पूरी भावना को बिना किसी भद्देपन बड़े ही खूबसूरत अंदाज में पर्दे पर उतारा था. मणिरत्नम के निर्देशन में बने गाने ‘जिया जले’ को सुनते ही आज भी नए शादीशुदा जोड़े के बीच की वही मासूमियत और रोमांटिक झिझक नजरों के सामने घूम जाती है. शाहरुख खान और प्रीति जिंटा फिल्माया गया यह गाना एक अहसास बन चुका है.
इस गाने की असली खूबसूरती इसकी संवेदनशीलता में छिपी है. सुहागरात पर एक नई दुल्हन के मन में अपने जीवनसाथी को लेकर उठने वाली अनगिनत उमंगों, प्यार की शुरुआत और उस अनकही अंतरंगता को इसमें बड़ी शालीनता से पिरोया गया है. यही वजह है कि फैंस इसे सिर्फ एक फिल्मी गाना नहीं मानते, बल्कि शादी के बाद के खूबसूरत पलों का काव्यात्मक चित्रण मानते हैं. यूट्यूब पर आज भी यह गाना खूब देखा और सुना जाता है.
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गीतकार गुलजार के लिखे बोल इस गाने की सबसे बड़ी ताकत हैं. हर एक शब्द में गहराई और आकर्षण है, लेकिन कहीं भी अश्लीलता की हल्की सी झलक भी नहीं मिलती. उन्होंने बिना किसी सीधे शब्द का इस्तेमाल किए, प्रतीकों और सहज भाषा के जरिए एक दुल्हन की अंदरूनी भावनाओं और झिझक को बेहद कलात्मक ढंग से पिरोया है.
गुलजार के काम पर गहरी पकड़ रखने वाली अनुवादक नशरीन मुन्नी कबीर ने भी इस गाने की तारीफ की है. उनका कहना है कि यह गाना इस बात की मिसाल है कि कैसे बिना किसी उथले शब्द के भी रोमांटिक और निजी अहसासों को दर्शकों के दिल तक सीधे पहुंचाया जा सकता है. पर्दे पर जिस नजाकत के साथ इसे शूट किया गया है, वह इसकी खूबसूरती में चार चांद लगाता है.
संगीतकार एआर रहमान का मैजिकल म्यूजिक इस ट्रैक का दूसरा सबसे बड़ा आकर्षण है. रहमान की दी हुई सुरीली धुन जब गुलजार के शब्दों से मिलती है, तो एक अद्भुत माहौल बन जाता है. इसे लता मंगेशकर ने अपनी सुरीली आवाज से सजाया है. खासकर गाने के बीच में आने वाला मलयालम कोरस इसे एक अलग ही ऊंचाई पर ले जाता है, जो सीधे कान में रस घोलता है.
शाहरुख खान और प्रीति जिंटा की ऑनस्क्रीन केमिस्ट्री और खूबसूरत लोकेशन ने इसे आइकॉनिक बना दिया. वैसे इस फिल्म से प्रीति जिंटा का बॉलीवुड डेब्यू भी एक अहम पड़ाव रहा. भले ही इस बात को अब तीन दशक बीतने को आए हैं, लेकिन जब भी यह गाना बजता है, इसकी ताजगी बिल्कुल वैसी ही महसूस होती है जैसी 90 के दशक में थी.
आज के दौर में भले ही हर रोज ढेरों लव सॉन्ग्स आ रहे हों, लेकिन ‘जिया जले’ की जगह कोई नहीं ले पाया. नवविवाहित जीवन के उस पहले मोड़ पर जो झिझक, मासूमियत और अनकहा प्यार होता है, उसे इतने सलीके से पेश करना हर किसी के बस की बात नहीं. यही वजह है कि समय बीतने के बाद भी यह गाना हर दिल में पहली मोहब्बत की मीठी धुन बनकर हमेशा जिंदा रहेगा.
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